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हिमालय को कोट पहनाने जैसे कदम

Published At: Saturday, 26 May, 2012 Last Modified: Friday, 21 April, 2017

पाणिनी आनंद, वरिष्ठ वेब पत्रकार सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर लगाम लगाना हिमालय को कोट पहनाये जाने जैसा है। यह बिल्कुल सही है कि मीडिया की मानिटरींग होनी चाहिये। उसकी जवाब देही सुनिश्चित की जाये, लेकिन निजी स्तर पर लोगों की सोच और उसकी अभिव्यक्ति को न तो कभी नियत्रिंत किया जा सका है, न किया जा सकेगा। सोशल नेटवर्क की सबसे बड़ी खासियत ये है कि न वो पन्ने छापते हैं, न अपने विचार रखते है और न ही अपने तरफ से कुछ चीजें दिखाते है। वो केवल एक माध्यम है जिसका इस्तेमाल बहुतायत लोग अपनी निजी सोच को अभिव्यक्ति करने के लिए कर रहे होते हैं। ऐसे में पूरी सोशल नेटवर्किग साइट्स पर नियंत्रण की बात सोचना फिलहाल लोगों के दिमाग को नियंत्रित करने जैसी कल्पना है। अगर देश के 50करोड़ लोग फेसबुक या ट्विटर पर आ गये तो क्या डेढ़ करोड़ लोगों की मानेटरिंग सरकार कर पाएगी । यह कैसे संभव हो सकेगा जब दूसरे देशों में बैठे लोग भारत के लिए लिख रहे होगे। पूर्व में पाकिस्तान और चीन इसके लिए हंसी का पात्र बनते रहे हैं। ये अच्छा है की सरकार इस पर गंभीर हो सरकार को चाहिये की इसकी जवाब देही के लिए क्या किया जाये। सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर रोक लगाना समाधान नही है समाधान केवल जवाब देही के अच्छे तरीके अपनाने में है। समाचार4मीडिया देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल exchange4media.com की हिंदी वेबसाइट है। समाचार4मीडिया.कॉम में हम आपकी राय और सुझावों की कद्र करते हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो कर सकते हैं।

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क्या इंडिया टीवी के चेयरमैन रजत शर्मा का क्रिकेट की दुनिया में जाना सही है?

हां, उम्मीद है कि वे वहां भी उल्लेखनीय कार्य कर सुधार करेंगे

नहीं, जिसका काम उसी को साजे। उनका कर्मक्षेत्र मीडिया ही है

बड़े लोगों की बातें, बड़े ही जाने, हम तो सिर्फ चुप्पी साधे

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