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डा. कायनात काजी की ‘बोगनवेलिया’: पुरुष प्रेम कहानी नहीं लिख सकते, क्योंकि...

Thursday, 05 January, 2017

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।

कलमकार फाउंडेशन द्वारा नई दिल्ली के साहित्य अकादमी सभागार में आयोजित एक समारोह में सोलो फीमेल ट्रेवेलर, फोटोग्राफर और ब्लॉगर डा. कायनात काजी के कहानी संग्रह ‘बोगनवेलिया’ का लोकार्पण किया गया।

समारोह की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध उपन्यासकार और हिंदी अकादमी, दिल्ली की उपाध्यक्ष मैत्रेयी पुष्पा ने की। वरिष्ठ कवि और भारतीय ज्ञानपीठ के निदेशक लीलाधर मंडलोई इस अवसर पर मुख्य अतिथि थे। ‘पाखी’ के संपादक प्रेम भारद्वाज और वरिष्ठ टीवी पत्रकार व समीक्षक अनंत विजय भी विशिष्‍ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में उपस्थित थे। ‘बोगनवेलिया’  नौ प्रेम कहानियों का संग्रह है। इसमें प्रेम के नौ अलग-अलग रंग हैं।

समारोह में मैत्रेयी पुष्पा ने कहा, ‘पुरुष प्रेम कहानी नहीं लिख सकते, क्योंकि स्त्री ही प्रेम की कोमल भावनाओं को बेहतर तरीके से समझ सकती है। प्रेम को नकारना और प्रेम को छिपाना अपराध है। हम प्रेम को छिपाकर उसे अपराध की संज्ञा दे देते हैं, जो कि उचित नहीं है। अगर प्रेम है तो उसे खुलेआम स्वीकार करना चाहिए।’

उन्‍होंने कहा कि आजकल अच्छी कहानियां पढ़ने को नहीं मिल रही हैं। कायनात की कहानियां इस कमी को पूरा कर रही हैं। उन्‍होंने कहा कि स्त्री की आजादी सही मायने में तब होगी, जब उसे प्रेम करने की स्वतंत्रता होगी। वह जिससे प्रेम करे, उसे बिना संकोच पति से मिलवा सके। समाज भी यह स्वीकार सके कि पति अलग होता है और प्रेमी अलग। इतनी ताकत तब मिलेगी जब ये समझ सकेंगे कि प्रेम की मनाही कही नहीं है और देह प्रेम नहीं है।

picकार्यक्रम में लीलाधर मंडलोई ने प्रेम के शेड्स की बात करते हुए कहा कि प्रेम और करुणा दुनिया में दो ही तत्व हैं। प्रेम पर ढेर सारे क्लासिक्स लिखे जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि स्त्री अगर प्रेम कहानी लिखे तो पुरुष उसे नहीं पढ़ सकता। लोगों को अगर प्रेम समझ आ जाये तो समाज में नफ़रत ही नहीं रहेगी।

 ‘पाखी’ पत्रिका के संपादक प्रेम भारद्वाज ने कहा कि प्रेम और सियासत पर लिखना कठिन कार्य है। वरिष्ठ टीवी पत्रकार एवं समीक्षक अनंत विजय ने डॉ कायनात काजी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी भाषा में रंग हैं। उत्तर आधुनिक बिम्ब हैं।

‘बोगनवेलिया’ कायनात की दूसरी और कहानी संग्रह की पहली पुस्तक है। कायनात की इससे पहले ‘कृष्णा सोबती का साहित्य और समाज’  नामक पुस्तक प्रकाशित हो चुकी है। कायनात काजी ‘राहगीरी’ नाम से हिंदी का पहला ट्रैवेल फोटोग्राफी ब्लॉग भी चलाती हैं। युवा लेखिका डॉ कायनात काजी ने कहा कि ‘बोगनवेलिया’ प्रेम के अलग-अलग रूपों को बुनती कहानियों का संग्रह है।

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