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दैनिक जागरण: अब मुंबई का नेतृत्व संभाल रहे हैं ये वरिष्ठ पत्रकार

Tuesday, 21 November, 2017

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

फिल्म और एंटरटेनमेंट पत्रकारिता के जाने-माने नाम वरिष्ठ फिल्म पत्रकार अनुज अंलकार को अब दैनिक जागरण ने मुंबई की कमान सौंपी है। वे बतौर असोसिएट एडिटर (फिल्म व टीवी) जागरण समूह से जुड़े हैं। दैनिक जागरण में यह उनकी दूसरी पारी है। 

उल्लेखनीय है कि वरिष्ठ टीवी पत्रकार अजय ब्रह्मात्मज के दैनिक जागरण से रिटायर होने के बाद अब मुंबई में जागरण समूह का नेतृत्व अनुज अलंकार कर रहे हैं। 

जागरण समूह से जुड़ने से पहले अनुज अंलकार ‘हिन्दुस्थान समाचार’ न्यूज एजेंसी में एंटरटेनमेंट एडिटर के पद पर कार्यरत थे और यहां वे दिसंबर, 2016 से जुड़े हुए थे। किसी न्यूज एजेंसी के साथ ये उनकी पहली पारी थी।

तीन दशक से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता कर रहे अनुज के योगदान ने फिल्मी पत्रकारिता को एक नया आयाम देने की कोशिश की है। 

1985 में उन्होंने पत्रकारिता सफर की शुरुआत अपने होमटाउन यानी यूपी के बिजनौर शहर से की थी। यहां रहकर करीब 8 महीनें तक उन्होंने रिपोर्टिंग की बारीकियों को सीखा। नवंबर, 1985 में वे अपना इस्तीफा देकर ‘विश्वमानव’ दैनिक से बतौर सब एडिटर जुड़ गए। यहां उन्होंने सहारनपुर और अंबाला के लिए काम किया। 19 साल की उम्र में वे अंबाला एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने और फिर 14 लोगों की टीम का नेतृत्व किया। ये वो दौर था जब उम्र कम थी और जिम्मेदारी बड़ी। पर कुशलतापूर्वक उसका संचालन कर अनुज ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। 

1987 में हैदराबाद के मिलाप समूह द्वारा दिल्ली से 'मिलाप' हिंदी का प्रकाशन शुरू किया, तो अनुज दिल्ली आ गए और इसके साथ जुड़ गए। रिपोर्टिंग को एक नई धार देने के साथ यहां उन्होंने डेस्क पर भी काम किया। 

1988 मे उन्होंने दिल्ली से मुंबई की ओर रुख किया और मैगजीन ‘नया सिनेमा’ में काम करने लगे। यहां पहली बार उनका नाम प्रिंटलाइन का हिस्सा बना। 

वहां 10 महीने (नवंबर-1988 से अगस्त, 1989 तक) काम करने के बाद वे फिल्म सिटी मीडिया के साथ जुड़ गए। करीब डेढ़ साल तक उन्हें यहां कई फिल्मों के लिए रिव्यू लिखने और बॉलिवुड हस्तियों के इंटरव्यू करने का मौका मिला।

मार्च, 1991 में वे हिंदी सांध्य दैनिक ‘दोपहर’ से जुड़े, जहां उन्होंने एंटरटेनमेंट और स्पोर्ट्स एडिटर के तौर पर काम किया। दो वर्षों तक यहां उन्होंने स्पोर्ट्स स्टेडियम से लेकर फिल्म स्टूडियो तक स्टोरी कवर की। इस दौरान उन्होंने पॉलिटिक्स सहित कई बीट्स पर काम करके जमकर मेनस्ट्रीम पत्रकारिता की। 

फिर मार्च, 1993 में उनके सफर का प्लेटफॉर्म ‘एक्सप्रेस स्क्रीन’ बना, जहां वे फ्रीलांसर राइटर के तौर पर जुड़े और करीब साढ़े चार वर्षों तक अपना योगदान दिया। इस दौरान उन्होंने इतनी बड़ी संख्या में स्टीरीज लिखीं कि लोग उन्हें स्टाफर समझते थे। बड़ी बात ये है कि उनका पारिश्रमिक भी कई स्टाफर्स से ज्यादा रहता था। जब संजय दत्त की गिरफ्तारी हुई, तो उस दिन हिंदी स्क्रीन  का अंक प्रिंटिंग के लिए जाने वाला था, पर इस खबर के बाद 10 घंटे में उन्होंने टीम के साथ मिलकर संजय दत्त पर केंद्रित पूरा संस्करण तैयार किया, जिसमें 28 में से 24 लेख अनुज ने ही लिखे थे।

उसके बाद वे ‘अमर उजाला’ से जुड़े, पर वहां सालभर भी काम नहीं किया और प्रतिष्ठित हिंदी मैगजीन ‘इंडिया टुडे’ में फ्रीलांस राइटर के तौर पर अपना योगदान देने लगे। इस दौरान उनका एक कॉलम ‘परदे के उस पार’ का प्रकाशन होता था। लगातार दस साल तक चलने वाले ये कॉलम खूब लोकप्रिय था। 

अब तक की सबसे लंबी पारी उनकी ‘इंडिया टुडे’ मैगजीन के साथ रही। वे यहां अप्रैल, 1994 से जून, 2004 तक रहे। 

फरवरी, 2004 में वे ‘दैनिक जागरण’ में सीनियर कॉरेस्पोंडेंट के पद से जुड़ गए, लेकिन इस दौरान भी उन्होंने ‘इंडिया टुडे’ के लिए लिखना बंद नहीं किया और लगातार दो महीने तक और लिखते रहे। अक्टूबर, 2007 में दैनिक जागरण के साथ तो उनका सफर थम गया, लेकिन पत्रकारिता के सफर का अगला प्लेटफॉर्म ‘लोकमत’ बना और यहां उन्होंने करीब 9 वर्षों तक एंटरटेनमेंट ब्यूरो चीफ की भूमिका निभाई। लोकमत समूह में एंटरटेनमेंट पेज की शुरुआत करने का श्रेय उन्हीं को जाता है।  

 

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हां, उम्मीद है कि वे वहां भी उल्लेखनीय कार्य कर सुधार करेंगे

नहीं, जिसका काम उसी को साजे। उनका कर्मक्षेत्र मीडिया ही है

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