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'India Today' ने बताया, कौन से हैं देश के टॉप-10 मीडिया कॉलेज

Friday, 01 June, 2018

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।

अंग्रेजी मैगजीन 'इंडिया टुडे' (India Today) ने इस बार देश के श्रेष्ठ कॉलेजों पर एक स्‍पेशल इश्‍यू निकाला है। विभिन्‍न संकायों में बेहतरीन कॉलेजों के साथ ही जर्नलिज्‍म और मास कम्‍युनिकेन के क्षेत्र में कॅरियर बनाने वालों की सुविधा के लिए ऐसे कॉलेजों को भी इसमें शामिल किया गया है। जर्नलिज्‍म और मास कम्‍युनिकेन के इन कॉलेजों में ‘इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ मास कम्‍युनिकेशन’ (IIMC) को नंबर वन की पोजीशन पर रखा गया है।

टॉप टेन कॉलेजों की लिस्‍ट में पहले नंबर पर दिल्‍ली स्थित आईआईएमसी के अलावा दूसरे नंबर पर दिल्‍ली में ही जामिया मिलिया इस्‍लामिया स्थित 'एजेके मास कम्‍युनिकेशन रिसर्च सेंटर' (A.J.K MASS COMMUNICATION RESEARCH CENRRE) को रखा गया है।

इसके अलावा हैदराबाद विश्‍वविद्यालय, हैदराबाद के 'डिपार्टमेंट ऑफ कम्‍युनिकेशन' (DEPARTMENT OF COMMUNICATION, UNIVERSITY OF HYDERABAD) को तीसरा और मुंबई के 'जेवियर इंस्‍टीट्यूट ऑफ कम्‍युनिकेशन' (XAVIER INSTITUTE OF COMMUNICATION) को चौथा स्‍थान दिया गया है।

पांचवें नंबर पर उडुपी स्थित मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन के 'स्‍कूल ऑफ कम्‍युनिकेशन' (SCHOOL OF COMMUNICATION) और छठे नंबर पर पुणे के सिंबॉयसिस इंस्‍टीट्यूट ऑफ मीडिया एंड कम्‍युनिकेशन (SYMBIOSIS INSTITUTE OF MEDIA & COMMUNICATION ) को रखा गया है।

सातवें नंबर पर बेंगलुरु की 'क्रिस्‍ट' डीम्‍ड यूनिवर्सिटी के 'डिपार्टमेंट ऑफ मीडिया स्‍टडीज' (DEPARTMENT OF MEDIA STUDIES), आठवें नंबर पर मुंबई के सोफिया श्रीमती मनोरमा देवी सोमानी कॉलेज के 'सोशल कम्‍युनिकेशंस मीडिया डिपार्टमेंट' (SOPHIA SMT MANORAMA DEVI SOMANI COLLEGE), नौवें नंबर बेंगलुरु के 'इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ जर्नलिज्‍म एंड न्‍यू मीडिया' (INDIAN INSTITUTE OF JOURNALISM & NEW MEDIA) के अलावा दसवें नंबर पर कोट्टयम, केरल के 'मनोरमा स्‍कूल ऑफ कम्‍युनिकेशन' (MANORAMA SCHOOL OF COMMUNICATION) को शामिल किया गया है।

सरोज कुमार की ओर से 'मीडिया इज द मैसेज' (Media Is The Message) नाम से लिखे गए आर्टिकल में बताया गया है कि छह दशकों में 'आईआईएमसी'  ने देश को बेहतरीन मीडिया प्रोफेशनल्‍स दिए हैं। इसके अलावा अब कॉलेज में न्‍यू मीडिया टेक्‍नोलॉजी पर भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आर्टिकल के अनुसार, छात्रों की सुविधा के लिए आईआईएसी में कम्‍युनिटी रेडियो स्‍टेशन के साथ कम्‍युनिटी रेडियो एंड रिसर्च सेंटर, टेलिविजन स्‍टूडियोज, कंप्‍यूटर लैब और ऑडिटोरियम भी है। इसके अलावा आईआईएमसी की लाइब्रेरी में 34000 बुक्‍स और जर्नल्‍स हैं, जिनके बारे में इंस्‍टीट्यूट का दावा है कि मास कम्‍युनिकेशन का सबसे ज्‍यादा मैटीरियल उनके पास है।

आर्टिकल के अनुसार, 'आईआईएमसी' की शुरुआत करीब छह दशक पूर्व 17 अगस्‍त 1965 को हुई थी। तत्‍कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री इंदिरा गांधी ने इसका उद्घाटन किया था। शुरुआत में इसका काम केंद्रीय सूचना सेवा के अधिकारियों को प्रशिक्षण के साथ कुछ रिसर्च स्‍टडी करना था। लेकिन आज आठ पोस्‍ट ग्रेजुएट डिप्‍लोमा कोर्स चलते हैं। दिल्‍ली स्थित कैंपस में हर साल 250 छात्रों को प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अलावा आईआईएमसी के, ढेंकनाल (ओडिशा),  आईजोल (मिजोरम), अमरावती (महाराष्‍ट्र), कोट्टयम (केरल) और जम्‍मू (जम्‍मू एवं कश्‍मीर) में रीजनल सेंटर भी खुले हुए हैं। इस समय आईआईएमसी के देशभर में फैले केंद्रों पर वर्ष 2018-19 सत्र के लिए 430 सीट उपलब्‍ध हैं।

'इंडिया टुडे' में छपे इस आर्टिकल के अनुसार, आइआईएमसी के डायरेक्‍टर जनरल केजी सुरेश ने बताया कि वर्ष 2017-18 शैक्षिक सत्र के दौरान इंस्‍टीट्यूट में जमा होने वाले फॉर्म्‍स की संख्‍या में 45 प्रतिशत का इजाफा देखने को मिला। 2017-18 के दौरान विभिन्‍न कोर्सों के लिए करीब 6500 छात्र आए। इस स्थिति से पता चलता है कि जो लोग मीडिया के क्षेत्र में अपना कॅरियर बनाना चाहते हैं, उनके लिए सबसे पहली पसंद आईआईएमसी ही है।

केजी सुरेश का कहना है, 'आजकल सभी लोग मीडिया इंडस्‍ट्री में गिरावट की बात करते हैं। इसके विपरीत, हमने देखा है कि कई जानी-मानी मीडिया कंपनियां हमारे यहां कैंपस रिक्रूटमेंट के लिए आ रही हैं। प्‍लेसमेंट सेशन के दौरान हमारे करीब 85 प्रतिशत छात्रों को विभिन्‍न मीडिया कंपनियों की ओर से नौकरी की पेशकश की गई है। पिछले साल हमारे यहां के सभी छात्र नौकरी पाने में सफल रहे थे। यह साबित करता है कि मीडिया इंडस्‍ट्री में नौकरी के लिए आईआईएमसी के छात्रों को वरीयता दी जाती है।'

आर्टिकल के अनुसार, 'इस साल पब्लिक एडवर्टाइजिंग और पब्लिक रिलेशंस (AD & PR) में सबसे ज्‍यादा 13 लाख रुपये सालाना के पैकेज पर 'टाटा स्‍टील' द्वारा इंस्‍टीट्यूट के दो छात्रों को नौकरी ऑफर की गई। इंस्‍टीट्यूट के करीब 85 प्रतिशत छात्रों को विभिन्‍न कंपनियों में 3.5 लाख से 13 लाख रुपये के सालाना पैकेज पर नौकरी मिली है।'

सुरेश ने बताया कि सिर्फ आईआईएमसी में ही विभिन्‍न भाषाओं में पत्रकारिता का कोर्स कराया जाता है। यहां पर हिन्‍दी, उडि़या, मलयालम, मराठी और उर्दू में न सिर्फ पत्रकारिता की पढ़ाई कराई जाती है बल्कि उस भाषा में पत्रकारिता के इतिहास से भी रूबरू कराया जाता है। यही नहीं, मॉसकम्‍युनिकेशन के क्षेत्र में हो रहे बदलाव व नए ट्रेंड के बारे में भी आईआईएमएस लगातार सजग रहता है और नई टेक्‍नीक आदि से खुद को अपडेट रखता है। इस बात का उदाहरण है कि इंस्‍टीट्यूट ने दो साल पहले 20 मई 2016 को अपने यहां न्‍यू मीडिया और आईटी डिपार्टमेंट को शुरू कराया था।

केजी सुरेश के अनुसार, मीडिया इंडस्‍ट्री के कई बड़े नाम जैसे- सुप्रिया प्रसाद, निधि राजदान, सुधीर चौधरी और दीपक चौरसिया आईआईएमसी की ही देन हैं। इंस्‍टीट्यूट की पूर्व छात्रा और गूंज नामक गैर सरकारी संगठन की संस्‍थापक अंशू गुप्‍ता को रोमन मैग्‍सेस पुरस्‍कार भी मिल चुका है।

इसके अलावा भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों और सशस्‍त्र बलों के लिए यह एक ट्रेनिंग सेंटर भी है। भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों के लिए यहां पर दो साल का ट्रेनिंग प्रोग्राम कराया जाता है और केंद्र व राज्‍य सरकार के कर्मचारियों के लिए शॉर्ट टर्म कोर्स भी कराए जाते हैं। आजकल सरकार लोगों से कम्‍युनिकेशन करने पर ज्‍यादा जोर दे रही है। यह भी हमारे कोर्स का एक हिस्‍सा है। केजी सुरेश के अनुसार, 'आईआईएमसी ने डीम्‍ड यूनिवर्सिटी का दर्जा हासिल करने के लिए हाल ही में 'विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग' (UGC) के यहां आवेदन किया है। एक बार यह दर्जा मिल जाने के बाद हम मास्‍टर्स डिग्री के साथ अपने यहां एमफिल और पीएचडी भी करा सकेंगे।'

आर्टिकल में केजी सुरेश के हवाले से बताया गया है कि निम्‍नलिखित खासियतों की वजह से ही आईआईएमसी को नंबर वन का दर्जा हासिल हुआ है और यह दूसरों से कई मायनों में बेहतर है। आइए जानते हैं, इसकी कुछ खासियतों के बारे में--

सबसे पहले कम्‍युनिटी रेडियो रिसर्च सेंटर की बात करें तो यहां छात्रों को आला दर्जे का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अलावा उन्‍हें कंटेंट, रिसोर्स और टेक्‍नोलॉजी के बारे में काफी सपोर्ट दिया जाता है ताकि वे अपना कम्‍युनिटी रेडियो स्‍टेशन स्‍थापित कर सकें। इसके अलावा यूनिसेफ, ऑक्‍सफोर्ड यूनिवर्सिटी और थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन के साथ मिलकर करीब दो साल पहले देश का पहला पब्लिक हेल्‍थ कम्‍युनिकेशन कोर्स 'Critical Appraisal skills Program' (CASP) शुरू किया गया था। यह प्रोग्राम अब सभी कोर्स का महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा है। इंस्‍टीट्यूट में न्‍यू मीडिया के नाम से एक डिपार्टमेंट है, जिसमें मोबाइल से लेकर ड्रोन जर्नलिज्‍म तक विभिन्‍न विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाता है। सशस्‍त्र सुरक्षा बल और राज्‍य सरकारें अपने अधिकारियों को प्रशिक्षण के लिए आईआईएमसी भेजती हैं। वहीं, जिस तरह से आईआईएमसी में लैंग्‍वेज जर्नलिज्‍म यानी विभिन्‍न भाषाओं में पत्रकारिता की पढ़ाई कराई जाती है, ऐसा कोई अन्‍य संस्‍थान नहीं करता है। आईआईएमसी में उर्दू, उडि़या, मराठी और मलयालम भाषा में भी पत्रकारिता की पढ़ाई कराई जाती है। आईआईएमसी में एंटरप्रिन्‍योनरल जर्नलिज्‍म के बारे में भी बताया जाता है। आजकल कई ऑनलाइन वेंचर्स खुल रहे हैं, सरकार भी ऑनलाइन कम्‍युनिकेशन को बढ़ावा दे रही है। इन सबको ध्‍यान में रखते हुए आईआईएमसी ने भी अपने पाठ्यक्रम में आवश्‍यक बदलाव किए हैं।

 


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