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27 मई को लॉन्च होगी पत्रिका दलित दस्तक

Published At: Friday, 25 May, 2012 Last Modified: Friday, 21 April, 2017

आरिफ खान मंसूरी,  समाचार4मीडिया.कॉम देश में पिछड़े लोगों को ध्यान में रखते हुए एक हिंदी मासिक मैगजीन की शुरुआत की जा रही है। दलित दस्तक नाम से शुरू हो रही इस मैगजीन को 27 मई को लॉन्च किया जायेगा। संपादकीय बोर्ड में शामिल सुशील कुमार ने बताया कि हमारी मैगजीन देश के पिछड़े लोगों की आवाज बनेगी। और उनसे जुड़े मुद्दों को मैगजीन में प्रमुखता से छापा जायेगा। मैगजीन में फीचर्स, विश्लेषण और न्यूज सेक्शन होगा। शुरुआत में इसकी करीब चार हजार कॉपियां प्रकाशित की जायेंगी जिसे बाद में पाठकों के रिसपोंस के आधार पर बढ़ा दिया जायेगा। विज्ञापन रणनीतियों के बारे में सुशील कुमार का कहना है कि हम ऐसा कोई विज्ञापन हमारी मैगजीन में नहीं प्रकाशित करेंगे जो कि हमारी नीतियों के खिलाफ हो। मैगजीन के कीमत 20 रूपये रखी गई है और इसके सालाना सब्शक्रिप्शन की कीमत 250 रूपये रखी गई है। मैगजीन शुरू करने के बारे में उनका कहना है कि हम पहले दलितमत.कॉम से एक वेबसाइट संचालित कर रहे हैं जिसको अच्छा रिसपोंस मिला। लेकिन हमने महसूस किया कि देश के कुछ एक हिस्से ऐसे हैं जो कि इंटरनेट एक्सेस नहीं करते हैं जिसके लिए हमने प्रिंट की शुरुआत की। और हमारे दिमाग में एक मैगजीन शुरू करने का विचार आया। 54 पेज की एक मैगजीन में 8 पेज रंगीन और बाकी ब्लैक एंड व्हाइट होंगे। इसके एडिटर अशोक दास हैं जो कि एक दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं उन्होंने कई मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। अभी वो महाराष्ट्रा के देशोन्नती अखबार के दिल्ली ब्यूरो चीफ की भूमिका निभा रहे थे। मैगजीन के संपादकीय बोर्ड में एनडीटीवी के रवीश कुमार, जेएनयू के प्रोफेसर विवेक कुमार, दलित लेखिका और चिंतक अनीता भाटी और कई सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। समाचार4मीडिया देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल exchange4media.com की हिंदी वेबसाइट है। समाचार4मीडिया.कॉम में हम आपकी राय और सुझावों की कद्र करते हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो कर सकते हैं।

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पोल

क्या इंडिया टीवी के चेयरमैन रजत शर्मा का क्रिकेट की दुनिया में जाना सही है?

हां, उम्मीद है कि वे वहां भी उल्लेखनीय कार्य कर सुधार करेंगे

नहीं, जिसका काम उसी को साजे। उनका कर्मक्षेत्र मीडिया ही है

बड़े लोगों की बातें, बड़े ही जाने, हम तो सिर्फ चुप्पी साधे

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