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नक्सली रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को जान का खतरा, मार डालने के आदेश...!

Published At: Thursday, 28 September, 2017 Last Modified: Thursday, 28 September, 2017

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में पत्रकारिता करना आसान काम नहीं है। इन इलाकों में पत्रकारों का काम दोधारी तलवार पर चलने जैसा है। राज्य के पत्रकारों पर पुलिस और नक्सली दोनों का ही खतरा हमेशा बना रहता है, क्योंकि कोई इन्हें ‘नक्सली एजेंट’ समझता है तो कोई ‘सरकारी एजेंट। इसलिए यहां के पत्रकार भय और असुरक्षित माहौल में काम करने को मजबूर हैं। ऐसे में छत्तीसगढ़ में कथित रूप से एक ऐसा वायरलेस ऑडियो मैसेज वायरल हुआ है, जिससे नक्सलियों की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों की नींद उड़ा दी है और उन पर जान का खतरा बढ़ गया है, क्योंकि इस ऑडियो में नक्सलियों की खबर बनाने वाले पत्रकारों को मरवाने की हिदायत दी गई है। हालांकि इस ऑ​डियो के सामने आने के बाद इसकी जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

30 सेकेंड के इस ऑडियो टेप में बस्तर आने वाले पत्रकारों की हत्या करने की बात कही जा रही है। बुधवार को बिलासपुर प्रेस क्लब द्वारा जारी किए गए इस ऑडियो क्लिप को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है। पुलिस अब इसकी जांच कर रही है।

इस ऑडियो में एक वायरलेस सेट में दो लोगों के मध्य संवाद हैजिसमें एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को अलर्ट रहने और जो पत्रकार नक्सलियों को कवर करने जाए उसे मरवाने की हिदायत दे रहा है। वहीं दूसरा व्यक्ति राजर सरराजर सरठीक हैओके कह रहा है।

बीजापुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष गणेश मिश्रा ने अपने बयान में कहा कि इस ऑडियो क्लिप के आने से सुरक्षाबलों की मानसिकता का पता चलता है। उन्होंने कहा, 'एक तरफ जहां सुरक्षाबल पत्रकारों को धमकी दे रहे हैं वहींनक्सली पत्रकारों को मुखबिर बताकर उनकी हत्या कर दे रहे हैं। ऐसे में पत्रकारों के लिए इन परिस्थितियों में काम करना बहुत कठिन है।

वहीं नक्सल मामलों के विशेष पुलिस महानिदेशक डीएम अवस्थी ने बताया कि उन्होंने ऑडियो को सुना है और बस्तर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक को मामले की जांच करने के लिए कहा है। अवस्थी ने कहा कि अभी यह जानकारी नहीं मिली है कि इसकी सच्चाई क्या हैजांच के बाद ही इस संबंध में सही जानकारी मिल सकेगी। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि जांच के बाद जो भी दोषी पाया जाएगाउसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

दूसरी तरफ, कुछ पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस तरह का ऑडियो साल 2004—05 में भी सामने आया था। हालांकि उन्होंने यह दावा नहीं किया कि यह वही ऑडियो का हिस्सा है। इधरऑडियो के सामने आने के बाद राज्य के वरिष्ठ पत्रकारों और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इसकी तीखी आलोचना की है।

वरिष्ठ पत्रकार रमेश नैयर ने कहा है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पत्रकार दोहरे दबाव में कार्य करते हैं. इसके बाद भी वह सच्चाई को लोगों के सामने लाने के लिए प्रयासरत हैं। ऐसे में इस ऑडियो का सामने आना चिंताजनक है। नैयर ने कहा कि मामले की जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।  

 

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हां, उम्मीद है कि वे वहां भी उल्लेखनीय कार्य कर सुधार करेंगे

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