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अजय शुक्ल को कुछ यूं याद कर रही है ताजनगरी, हुई शानदार विदाई...

Friday, 08 June, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

अजय शुक्ल, रीढवान संपादक के तौर पर आगरा में प्रख्यात हैं। उनके शहर के जाने की खबर जब समाचार4मीडिया ने ब्रेक की, तो हमारे पास शहर की कई गणमान्य हस्तियों के फोन आए। कुछ ने ये जानना चाहा कि अचानक ऐसा क्या हुआ कि अजय शहर से जा रहे हैं, तो कई ने कहा कि क्या उनके रुकने की कोई संभावना है।

पर ये ऐसे सवाल है, जिनके जवाब शायद अजय शुक्ल के पास ही है, हमारा भी यही जवाब था। पर कई लोगों ने कहा कि जब अब वो अपनी अगली पारी बड़ी भूमिका के साथ शुरू करने वाले हैं, तो उन्हें ढेरों शुभकामनाएं। बताया जा रहा है कि शहर की कई शख्सियतों ने उनकी विदाई को शानदार बनाने के लिए पूरी प्लानिंग की है। शुक्रवार को हिन्दुस्तान समूह के ग्रुप एडिटर खास तौर पर आगरा आए और उन्होंने अजय शुक्ल की फेयरवेल पार्टी में हिस्सा लेते हुए कहा कि अजय के साथ मेरा प्रोफेशनल रिश्ता तो है ही, पर मजबूत व्यक्तिगत संबंध भी हैं।


इस अवसर पर अजय शुक्ल ने अपनी अगली पारी में सफलता के लिए शशि शेखर से आशीर्वाद भी लिया। अजय शुक्ला की उपबल्धियों और व्यवहार कुशलता के बारे में बताते हुए शशि शेखर भावुक भी हुए। मिली जानकरी के मुताबिक, आज पूरे दिन ताजनगरी के बाशिंदों ने उनसे मुलाकात कर उन्हें शुभकामनाएं दीं। आइए जानते हैं कि अजय शुक्ल को किस तरह ताज के वाशिंदों ने अपनी शुभकामनाएं दी हैं...


पूरन डावर, उद्योगपति:

संपादक के तौर पर अजय शुक्ल का कार्यकाल काफी बढ़िया रहा है। उनके नेतृत्व में हिन्दुस्तान अखबार ने शहर में बहुत तरक्की की है। बेहतरीन कंटेंट के चलते अखबार का सर्कुलेशन भी काफी बढ़ा है।  अलग-अलग विषयों को अखबार ने जिस तरह जगह दी, वे काबिल-ए-तारीफ है। हर तबके की समस्या को उठाने का अखबार ने पूरा प्रयास किया। अजय शुक्ल जी के संपादक काल में हिन्दुस्तान ने एक ऐसे गढ़ में अपनी मजबूत पैठ बनाई है, जहां प्रतिस्पर्धी का बोलबाला रहा है। 

राजीव गुप्ता, पूर्व अध्यक्ष, नेशनल कॉमर्स:

अजय शुक्ल को मैं राजाओं का राजा कहता हूं। आम नागरिक की खबर को वो जिस तरह महत्व देते हैं, वे ही असली पत्रकारिता है। उनका पैना दृष्टिकोण और अखबार का हर जन से फीडबैक लेने की कला वाकई अनोखी है। वे ऐसे बिरले संपादक है जो गलती होने पर उसे स्वीकारने का माद्दा रखते हैं, साथ ही अपने सहयोगियों के साथ सद्व्यवहार करते हैं। उन्होंने अपनी खबरों और व्यवहार से पाठकों के दिल में जगह बनाई है।

विनय पतसरियारंग कर्मी :

निष्पक्ष और बेबाक पत्रकारिता के लिए जाने जाते है अजय शुक्ल। हिन्दुस्तान को शहर मे ऊंचाइंयों तक ले जाने में उनकी अहम भूमिका रही है। उन्होंने पत्रकारिता के नए मापदंड स्थापित किए हैं। उन्होंने कभी भी किसी खबर को लेकर समझौतेवादी रुख नहीं अपनाया है।

ए.के. सिंह, शिक्षाविद् :

अजय जी मन बहुत विचलित है। आप आगरा छोड़ देंगे लेकिन हम आपको कभी नहीं छोड़ेंगे। आप ने एक संपादक की तरह नहीं एक आगरावासी की तरह काम किया। मानवीय संवेदना को बहुत करीब से समझा। एक छाप छोड़ी हमारे दिलो पर। आपने बहुत बड़ी लकीर खींची। उज्जवल भविष्य को आपका इन्तजार हैजाओ दोस्त चूम लो आसमान। शुभकामना एवं शुभेच्छा। लेकिन.. अभी अलविदा मत कहो दोस्तों न जाने कहां फिर मुलाकात हो’...

पवन आगरी, कवि:

एक संपादक के साथ साथ अजय शुक्ल जी एक सहृदय इंसान हैंजो पहली ही मुलाकात में लोगों को अपना बना लेते हैं। आगरा में हिन्दुस्तान समाचार पत्र ने उनके नेतृत्व में जिस तरह से साहित्यिकसांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों को प्रमुखता से अपने यहाँ स्थान दिया उससे लोगों का उनसे व्यक्तिगत जुड़ाव भी बढ़ता गया। उनकी एक खास बात यह भी रही कि वो बेहद बेबाकी से अपनी बात रखते हैं वो फिर चाहे देश की सियासत और वज़ीर का मामला हो या अन्य कोई मुद्दा। उनकी कमी आगरा को हमेशा खलेगी।

वत्सला प्रभाकर, समाजसेवी:

अजय शुक्ल का आगरा से जाना खराब खबर है, अभी शहर को उनकी जरूरत है। बहुत दिनों बाद शहर में कोई ऐसा संपादक आया था जिसने आम आदमी और संपादक की बीच की दूरी को मिटा दिया था। हंसमुख और मिलनसार स्वभाव के चलते हर कोई उनका प्रेमा बन गया है। 

गिरिजा शंकर शर्मापीआरओडॉ. बीआर अंबेडकर विॆश्वविद्यालय:

अजय का मिलनसार व्ववहार उनको खास बनाता है। कई मंचों पर उनको साथ रहा हूं। शहर के विकास को लेकर वे जिस तरह उत्साही रहते हैंये इस शहर के लिए गौरव की बात है।  

शिशिर भगत, बिजनेसमैन:

अजय जी के तौर पर एक सक्रिय संपादक दिखा। विविध विषयों पर आधारित खबरों का अखबार में समावेश करना उनकी विशिष्टिता है। हर क्षेत्र की हर समस्या को उनके कार्यकाल के दौरान अखबार ने प्रमुख रूप से उठाया और उसका समाधान कराया। वे प्रोगेसिव जर्नलिज्म में विश्वास रखते है। उन्होंने अखबार के कंटेंट और कलेवर को इस तरह निखारा कि शहर के हर शख्स को अब हिन्दुस्तान अखबार पढ़ने की आदत सी हो गई है। 

डॉ. हृदेश चौधरी  (महासचिव) आराधना संस्था व (अध्यक्ष) जाट क्षत्राणी सभा :

इंसान की व्यवहारिकता भी उसके काम के साथ साथ उसको बड़ा बनाती है शायद यही गुण हिंदुस्तान के संपादक अजय शुक्ल जी में था। जिसके कारण उन्होंने अच्छे और सच्चे पत्रकार के साथ साथ सहृदयी इंसान के रूप में हर दिल में अपनी जगह बनाई। जब भी उनसे मिले उन्होंने यही कहा शहर में वास्तविक धरातल पर जो भी सामाजिक लोग कार्य कर रहे हैं, उनको प्रेस में आने की भी जरूरत नहीं है, बस एक मेल और एक फ़ोन से सूचना देना काफी है। आराधना परिवार को एक ऐसे सहज स्वभाव के धनी और पत्रकारिता के मानदंडों को जीने वाले संपादक की कमी अखरेगी पर वो इससे भी ऊँचे पायदान पर पहुंचें, ऐसी कामना है। 

 

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