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इस बीमारी से लड़ते हुए जिंदगी की जंग हार गए वरिष्ठ पत्रकार शिशिर टुडू...

Published At: Wednesday, 04 July, 2018 Last Modified: Wednesday, 04 July, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।


हिंदी के साहित्यकार, वरिष्ठ पत्रकार और डॉक्यूमेंट्री फिल्म मेकर शिशिर टुडू का निधन मंगलवार तड़के लखनऊ में हो गया। वे ब्लड कैंसर से पीड़ित थे और इलाज के लिए मात्र तीन दिन पहले ही लखनऊ गए थे।


मूल रूप से झारखंड के पाकुड़ जिले के रहने वाले शिशिर ने पत्रकारिता जगत में एक अलग पहचान बनाई थी। उन्होंने कई पत्र-पत्रिकाओं के साथ जुड़कर काम किया। शिशिर टुडू को पत्रकारिता जगत में शिशिर दाके नाम से जाना जाता है। 


शिशिर दाके निधन पर पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने गहरा शोक व्यक्त किया है। मुंडा ने कहा कि वे एक संवेदनशील पत्रकार थे। उनके असामयिक निधन से पत्रकारिता जगत को नुकसान हुआ है। ईश्वर उनके परिजनों को दुख बर्दाश्त करने की शक्ति दे।


वहीं उनके निधन पर झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष शिबू सोरेन और कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने भी शोक जताया है। हेमंत ने कहा कि पत्रकारिता के छात्रों के लिए शिशिर टुडू मिसाल थे। ईश्वर उनके परिवार को दुख सहने की हिम्मत दे। 


72 वर्षीय शिशिर टुडू ने 1970 के दशक से लिखना शुरू किया था। उन्होंने 400 से अधिक रेडियो कार्यक्रमों का निर्माण किया। 20 से अधिक डॉक्यूमेंट्री फिल्में बनाईं। इतना ही नहीं उन्होंने आदिवासी व झारखंड से जुड़े मुद्दों पर कई किताबें भी लिखीं। उन्होंने आर कास्टेयर्स की किताब हाड़मा विलेज का 'ऐसे हुआ हूल' के नाम से हिंदी अनुवाद किया। हिंदी दैनिक प्रभात खबर में भी उनके काफी लेख प्रकाशित हो चुके हैं। वे रांची से प्रकाशित सांध्य दैनिक झारखंड न्यूजलाइन के संपादक भी रहे। साथ ही तरंग भारती पत्रिका में भी बतौर संपादक काम किया। 

 

 

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