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क्या आपके टीवी का बिल कम हो रहा है या ज्यादा?

Published At: Monday, 11 February, 2019 Last Modified: Monday, 11 February, 2019

रितविका नंदा/ पूजा चंद्रन नांबियर 

टेलीविजन स्क्रीनिंग पर हाल ही में किए गए अध्ययन से यह बात सामने आई कि भारतीय दर्शक उन्हें उपलब्ध कराए जा रहे चैनलों में से महज 30 के आसपास चैनल ही नियमित रूप से देखते हैं। इस अध्ययन को ध्यान में रखते हुए भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने एक (New Tariff Order) जारी किया था, जिसके तहत दर्शकों को यह आज़ादी मिली कि वे अपनी पसंद के चैनल चुन सकते हैं, यानी उन्हें अपने केबल ऑपरेटर द्वारा जबरन दिए जा रहे बड़ी संख्या में चैनल पैकेज का खर्चा उठाने की ज़रूरत नहीं है।

नया टैरिफ ऑर्डर के तहत, डीटीएच प्रदाता केवल 100 चैनलों के सेट के लिए (लागू जीएसटी को छोड़कर) अधिकतम 130 रुपए बतौर शुल्क ग्राहकों वसूल सकता है, इसके अलावा वह ग्राहकों को अलग से अपनी पसंद का चैनल चुनने और उसका भुगतान करने का विकल्प भी देता है। हालांकि पहली नजर में 1 फरवरी को लागू हुए नया टैरिफ ऑर्डर को देखकर लगता है कि यह ग्राहकों की इच्छा और उनके जेब दोनों की रक्षा करता है, लेकिन यह एक दोधारी तलवार साबित हो सकता है। नया टैरिफ ऑर्डर केवल उन ग्राहकों के लिए फायदेमंद प्रतीत होता है, जो  चैनलों के किसी विशेष प्रोफाइल को पसंद करते हैं और एकाधिक दर्शक जैसे कि परिवारों के मामले में यह प्रभावी साबित नहीं हो सकता।

इसके अतिरिक्त, क्या 100 बेस चैनलों के सेट में ऐसे सबसे लोकप्रिय चैनल शामिल हैं, जो काफी हद तक अज्ञात हैं? इसी तरह, ‘कम के लिए कम खर्च, और ज्यादा के लिए ज्यादा’ का फंडा भी उतना कारगर नज़र नहीं आ रहा है, यानी दर्शकों को लगभग उतना ही भुगतान करना पड़ सकता है, जितना वह करते आ रहे थे। यह ये भी संभव है कि उन्हें कम चैनलों के लिए पहले से ज्यादा दाम चुकाने पड़ें।

सिक्का का दूसरा पहलू यह है कि अलोकप्रिय चैनलों के अनसब्सक्राइब होने पर नए सिरे से चिंता जताने के साथ नया टैरिफ ऑर्डर केबल ऑपरेटरों, डीटीएच ऑपरेटरों, वितरकों के साथ-साथ ब्रॉडकास्टर्स के लाभ पर भी कैंची चलाएगा। सस्ते उपभोक्तावादी युग में, नया टैरिफ ऑर्डर भारतीय दर्शकों के नुकसान का कारण बनेगा या फिर उनके खर्चों में कटौती करेगा, यह देखने वाली बात होगी।
(लेखकगण Trust Legal Advocates & Consultants से बतौर एडवोकेट जुड़े हैं)
 



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