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पत्रकार के परिजनों को 16 साल बाद मिला इंसाफ...

Published At: Friday, 11 January, 2019 Last Modified: Friday, 11 January, 2019

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

हरियाणा के पत्रकार के परिजनों की लड़ाई आखिर रंग लाई और 16 साल बाद उन्हें कोर्ट से न्याय मिला। दरअसल, पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में पंचकूला की सीबीआई की विशेष अदालत ने शुक्रवार को डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम समेत चार लोगों को दोषी ठहराया है। जज जगदीप सिंह की अदालत ने गुरमीत के साथ कृष्ण लाल, कुलदीप और निर्मल सिंह को दोषी करार दिया है। दो साध्वियों के साथ दुष्कर्म के मामले में डेरा प्रमुख फिलहाल 20 साल की सजा काट रहा है। अब इस मामले में 17 जनवरी को सजा सुनाई जाएगी।

रोहतक की सुनारिया जेल में बंद गुरमीत सिंह की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई। फैसले के मद्देनजर डेरा सच्चा सौदा, सुनारिया जेल और विशेष अदालत के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पंजाब और हरियाणा पुलिस ने अलर्ट जारी किया था।

गौरतलब है कि पत्रकार रामचंद्र छत्रपति को 24 अक्‍टूबर 2002 को गोली मार दी गई थी। 21 नवंबर 2002 को रामचंद्र की दिल्ली के अपोलो अस्पताल में मौत हो गई थी। पत्रकार रामचंद्र सिरसा में स्‍थानीय अखबार ‘पूरा सच’ निकालते थे। उन्‍होंने ही डेरा सच्‍चा सौदा से जुड़ी खबरें प्रकाशित करना शुरू किया था और अपने अखबार में साध्‍वी यौन शोषण और रणजीत सिंह हत्‍याकांड का खुलासा किया गया था।

जनवरी 2003 में छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर प्रकरण की सीबीआई जांच करवाए जाने की मांग की थी। याचिका में अंशुल ने गुरमीत सिंह पर पिता की हत्या किए जाने का आरोप लगाया था। पत्रकार के परिजनों की मांग पर मामला सीबीआई को सौंप दिया गया था। सीबीआई ने वर्ष 2007 में चार्जशीट दाखिल कर दी थी और राम रहीम को हत्या की साजिश रचने का आरोपी माना था। तबसे यह मामला चल रहा था, जिसमें शुक्रवार को कोर्ट ने राम रहीम को दोषी करार दिया है।

बताया जाता है कि छत्रपति को घर से बुलाकर पांच गोलियां मारी गई थीं। चूंकि छत्रपति सच्चाई लिखने से नहीं चूकते थे, उनकी धारदार पत्रकारिता की तूती बोलती थी। इस नाते 25 अक्टूबर 2002 को घटना के विरोध में सिरसा शहर बंद रहा था। तब से लेकर आज तक पत्रकार के परिजन इस मामले में टकटकी लगाए बैठे थे कि आखिर कब उन्‍हें न्‍याय मिलेगा।  



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