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न्यूज एंकर सुशांत सिन्हा ने सीएम योगी पर दागा ‘तीखा सवाल’

Published At: Thursday, 07 February, 2019 Last Modified: Friday, 08 February, 2019

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

‘इंडिया न्यूज़’ के डिप्टी एडिटर सुशांत सिन्हा उन पत्रकारों में शुमार हैं, जो सोशल मीडिया पर होने वाली हर हलचल पर न केवल पैनी नज़र रखते हैं, बल्कि उस पर अपनी प्रतिक्रिया देने में भी देर नहीं लगाते। सुशांत वैसे भी अपनी हाज़िरजवाबी और बेवाक बयानबाजी के लिए पहचाने जाते हैं। यदि उन्हें कुछ गलत लगता है, तो फिर वो ये नहीं सोचते कि गलत बोलने वाला व्यक्ति कौन है। वैसे एक पत्रकार से ऐसी ही अपेक्षा की जाती है।

इस वक़्त भी सुशांत एक मुद्दे को लेकर शब्दबाण चला रहे हैं और उनके निशाने पर कोई और नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं। दरअसल, आदित्यनाथ ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) को लेकर एक ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने लिखा है कि एएमयू को भारत सरकार 300 करोड़ रुपये का अनुदान देती है। वह अल्पसंख्यक विश्वविद्यालय नहीं है। फिर वहां अनुसूचित जाति के लोगों को आरक्षण का लाभ क्यों नहीं मिल पाता’?

योगी कहना तो बहुत कुछ चाहते थे, लेकिन ट्विटर सीमित शब्दों में ही भावनाओं को व्यक्त करने की इज़ाज़त देता है। इसलिए, उन्होंने अलीगढ़ में आयोजित भाजपा के सम्मलेन में खुलकर अपनी बात कही। उन्होंने कहा कि एएमयू को केंद्र सरकार की ओर से प्रति वर्ष 150 से 300 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाता है। यह पैसा देश की जनता का है। मैं सपा, बसपा और अन्य दलों से पूछता हूं कि आखिर क्यों एएमयू में अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्ग को आरक्षण का लाभ नहीं मिलता, जबकि कोर्ट कह चुका है कि यह अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है’।

 

मुख्यमंत्री के इस ट्वीट या कहें कि सवाल पर सुशांत सिन्हा ने तुरंत सवाल दाग दिया। उन्होंने अपने जवाब में कहा ‘सर आप नेता हैं, मुख्यमंत्री हैं...पत्रकार नहीं। आपको जवाब देना है, उल्टा आप ही सवाल पूछ रहे हैं। केंद्र में आपकी सरकार, सूबे में आपकी सरकार फिर जवाब किससे मांग रहे हैं आप’? सुशांत का यह सवाल कुछ लोगों को चुभने वाला लगा, जबकि कुछ ने उसकी तारीफ भी की।

वैसे भी सुशांत ने जो कहा वो पूरी तरह सही है।  आमतौर पर विपक्ष में बैठी पार्टी इस तरह के सवाल उठाती है, क्योंकि उसे कुछ करना नहीं होता। लेकिन यहां उत्तर प्रदेश से लेकर केंद्र तक में भाजपा की सरकार है। इसके अलावा हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसले भी हिंदूवादी संगठनों की सोच के पक्ष में हैं, इसके बाद भी यदि खुद मुख्यमंत्री सवाल उठाएंगे, तो उनपर सवाल दागना लाज़मी है। 

 सुशांत के ट्वीट का समर्थन करते हुए विजय गुलहरे नामक यूजर ने लिखा है ‘इस जवाब के बाद शायद कुछ चिल्गोजों के मुह बंद हो जाएं,जो कहते हैं कि सुशांत जी भाजपा के लोगों से सवाल नही पूछते, सिर्फ विपक्ष पर सवाल करते हैं। हालांकि इस बात को समझने के लिए उनको चश्मा उतारना पड़ेगा’। जबकि डॉक्टर सत्य प्रकाश गुप्ता ने लिखा ‘प्रिय सुशांत, वो मीडिया और ऐसे लोगों के समक्ष वाजिब प्रश्न उठा रहे हैं, जो भारत पर राज करते हैं। आप अपने न्यूज़ चैनल पर यह मुद्दा क्यों नहीं उठाते’? इसी तरह किशोर नामक यूजर ने ट्वीट किया ‘सुशांत जी, आपकी अक्ल की दाद देता हूं, वहां आरक्षण का लाभ नही देने का फैसला पुराना है, अब उस पर चर्चा होना जरूरी है नहीं तो आप कहोगे लोकतंत्र खतरे मे है। जरा लोकतंत्र के बारे मे थोड़ा पढ़ लीजिये’।

ये है मामला-

सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने 1967 में अजीज पाशा मामले में फैसला देते हुए कहा था कि एएमयू अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है, लेकिन 1981 में केंद्र सरकार ने कानून में जरूरी संशोधन कर इसका अल्पसंख्यक दर्जा बरकरार रखने की कोशिश की थी। इसके बाद एएमयू ने अल्पसंख्यकों के लिए प्रवेश में 50 फीसद आरक्षण लागू कर दिया था। इसे इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। हाई कोर्ट ने 2006 में एएमयू को अल्पसंख्यक दर्जा देने वाले कानून को रद्द कर दिया और कहा कि अजीज पाशा मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला ही सही है। इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ एएमयू और केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी। इसके बाद भाजपा के सत्ता में आने के बाद केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में साफ कर दिया है कि वह एएमयू को अल्पसंख्यक संस्थान नहीं मानती और इस लिहाज से सुप्रीम कोर्ट में पिछली सरकार की ओर से की गई अपील को वह वापस ले लेगी।



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