Share this Post:
Font Size   16

हैप्पी बर्थडे प्रमोद जोशी: ऐसा 'शांत' संपादक जो क्वॉलिटी कंटेंट पर काम करता है

Published At: Saturday, 23 June, 2018 Last Modified: Saturday, 23 June, 2018

अकु श्रीवास्तव

संपादक, नवोदय टाइम्स

प्रमोद जी को मैं लगभग 45 साल से जानता हूं। जब मैंने लखनऊ विश्‍वविद्यालय में प्रवेश लिया था, उससे पहले भी हालांकि मुझे लिखने-पढ़ने का काफी शौक था, तभी उनसे मेरा साबका पड़ा था।

खबरों की बात करें तो प्रमोद जी ने हमेशा कुछ न कुछ नया करने का रवैया अपनाया और आगे बढ़ते चले गए। 

मुझे उनके साथ काम करने का मौका दो पारियों में मिला। एक बार मैंने उनके साथ करीब नौ साल तक ‘नवभारत टाइम्स’ में काम किया। जबकि दूसरी पारी उनके साथ दैनिक 'हिन्‍दुस्‍तान' में करीब पांच साल रही। इन दोनों ही पारियों में मैंने हमेशा उन्‍हें सौम्‍य और शांत देखा। वे कभी किसी बात पर ज्‍यादा उत्‍तेजित नहीं होते हैं। लेकिन दोनों दौर में खबरों को लेकर उनकी भूख एक जैसी ही रही। वह हर समय कुछ नई खोज और नएपन में लगे रहने वालों में से हैं।

कभी किसी जूनियर ने या किसी और ने उन्‍हें कोई आइडिया दिया और उन्‍हें पसंद आया तो उन्‍होंने उसे सहर्ष स्‍वीकार करने में किसी तरह की हिचक महसूस नहीं की। ये उनका बहुत बड़ा बड़प्‍पन है कि किसी को भी उन्‍होंने कभी कम नहीं आंका और सभी के विचारों की हमेशा कद्र की है।

 आज 40 साल के कॅरियर के बाद मैं कह सकता हूं कि आगे बढ़ने के लिए प्रमोद जी ने किसी भी तरह की राजनीति अथवा दूसरों की आलोचना का सहारा नहीं लिया। न ही वह किसी को गिराकर आगे बढ़ने वालों में से रहे हैं। हालांकि यह हो सकता है कि कुछ चीजें उन्‍हें समय पर नहीं मिलीं लेकिन दूसरों को फांदकर आगे बढ़ना उनकी प्रवृति में ही नहीं रहा है। ऐसा नहीं है कि उनके जीवन में कभी कठिन दौर नहीं आया होगा लेकिन प्रमोद जी की खासियत है कि वह हमेशा शांत और लिखने-पढ़ने वाले रहे हैं। ऐसे बहुत कम ही लोग होते हैं जो समय के साथ नहीं बदलते हैं लेकिन प्रमोद जी की खास बात यह है कि वह हमेशा एक जैसे लिखने-पढ़ने वाले शांत व्‍यक्ति रहे हैं।

प्रमोद जी के बारे में एक खास बात और है कि वह हमेशा ज्ञान का भंडार रहे हैं। जब भी हमें उनके मार्गदर्शन की जरूरत पड़ी, उन्‍होंने हमेशा हमें सही सलाह दी है। इसके अलावा उन्‍होंने खुद को किसी एक पक्ष का दिखाने की कोशिश नहीं की। उन्‍होंने उसी का पक्ष लिया जो सही है। 

प्रमोद जी को खाद्य व्यंजनों का  शौक काफी पहले से रहा है। उम्र के साथ हो सकता है कि कुछ पाबंदियां हों लेकिन पहले जमाने में वह खाने-पीने के बहुत शौकीन रहे हैं। अच्‍छा खाना हमेशा से उनकी पसंद रहा है। 



पोल

सबरीमाला: महिला पत्रकारों को रिपोर्टिंग की मनाही में क्या है आपका मानना...

पत्रकारों को लैंगिक भेदभाव के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए

मीडिया को ऐसी बातों के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए

महिला पत्रकारों को मंदिर की परंपरा का ध्यान रखना चाहिए

Copyright © 2018 samachar4media.com