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हैप्पी बर्थडे के.जी. सुरेश: जिज्ञासु, कर्मशील, कर्तव्यबोध, राष्ट्रप्रेम से ओत-प्रोत पत्रकार

Published At: Wednesday, 26 September, 2018 Last Modified: Wednesday, 26 September, 2018

डॉ. दिलीप कुमार

पोस्ट डॉक्टरल रिसर्च फेलो, 

ICSSR, यूनिवर्सिटी ऑफ राजस्थान, जयपुर ।।



गुरु गोविन्द दोऊ खड़ेकाके लागूं पांय।

बलिहारी गुरु आपने जिन गोविन्द दियो मिलाय।

कबीर ने बहुत पहले गुरु की महत्ता को ईश्वर से भी अधिक स्थापित किया था। यह बिल्कुल सत्य है कि मनुष्य जीवन में अनेक प्रकार से शिक्षा ग्रहण करता है। मैंने जीवन में औपचारिक शिक्षकों से ज्यादा क्लासरूम के बाहर के गुरुओं से अधिक सीखा है। जीवन में अनेक लोगों से मुलाकात होती है और लोगों के बीच में अनायास आपको जीवन का मार्गदर्शन मिल जाता है। गुरु प्रो. के.जी सुरेश से मेरी मुलाकात यूं ही अनायास एक संगोष्ठी में हुई।

सन 2016 में एक संगोष्ठी के दौरान, जो आईआईएमसी में ही थी। मैं संगोष्ठी में एक सत्र के संचालक के तौर पर शामिल था और ये दायित्व हमारे बड़े भाई प्रो. अरुण कुमार भगत जी ने हमें सौंपा था। आप बतौर महानिदेशक स्वयं अपने परिसर में बड़ी ही संजीगदी के साथ संपूर्ण कार्यक्रम की रूपरेखा को बड़ी ही पैनी नजर से देख रहे थे और कहीं कोई कमी न रह जाए, इस बात की निश्चितता निर्धारित करने में लगे हुए थे।

क्या आम और क्या खास, किसी को भी कोई परेशानी न हो, इस बात का आपने विशेष ख्याल रखा था। उसी तैयारी के क्रम में आपसे मिला और जिस आत्मीयता के साथ आप मुझसे मिले, कुछ देर के लिए भूल सा गया कि मैं एक संस्था के महानिदेशक से मिल रहा हूं। मुझे ऐसा प्रतीत हुआ कि आप मेरे संरक्षक हैं। आपसे परिचय की जो आत्मीय यात्रा उस संगोष्ठी से प्रारंभ हुई, वह आज भी अविरल जारी है।

उस संगोष्ठी में आज के पत्रकारिता विभाग के अनेक दिग्गज विद्वान मेरे साथ प्रतिभागी थे और सबने अपने-अपने ढंग से भारत और विश्व में पत्रकारिता के स्वरूप पर प्रकाश डाला, लेकिन जैसे ही आपने अपना वक्तव्य प्रारंभ किया तो मेरे लिए आश्चर्य का विषय था। क्योंकि बतौर दक्षिण भारतीय हिंदी भाषा पर जिस तरह का नियंत्रण आपके पास है, अन्यत्र किसी विद्वान से मैंने नहीं सुना, चाहे वह उत्तर भारतीय विद्वान क्यों न हो।

आपने जब विषय पर बोलना प्रारंभ किया तो ऐसा लगा कि विषय हो या भाषा मानों आपकी अनुयायी होकर पीछे-पीछे चल रही हों। धाराप्रवाह शैली में पत्रकारिता के विषय, भाषिक परिदृश्य, पुरातन भारतीय पत्रकारिता तथा आज सकारात्मक पत्रकारिता की जरूरतों पर जो आपने प्रकाश डाला, वह हमारे जैसे पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए आंखे खोलने जैसा था। अमूमन वक्ता अपने ज्ञान से श्रोतओं को आतंकित करते हैं लेकिन आप श्रोताओं को अपनी जगह बांधकर रख देते हैं, जो आज भी अनवरत जारी है।

गुरुवर की सृजनात्मक ऊर्जा तो गजब है ही, किन्तु आपका प्रबंधकीय कौशल किसी आईआईएम के एमबीए के छक्के छुड़ाने के लिए काफी है। वे स्वयं अकेले ही किस प्रकार राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय आयोजन किस प्रकार करते रहते हैं और किस तरह उनके इस कार्य में स्वयमेव वित्तीय सहयोग करने वाले उनके पीछे-पीछे डोलते हैं, यह भी अपने आप में चमत्कार से कम नहीं है।

लगभग तीन वर्षों से महानिदेशक आईआईएमसी (IIMC) का चमत्कारिक दायित्व विषम परिस्थितियों में निभाने और अनेक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ मिलकर IIMC के कैंपस में आयोजनों की भरमार लगा देना आप के ही बूते की बात है। सेमिनार में देश-विदेश के तमाम हिस्सों से प्रतिभागी आते हैं, आप प्रत्येक के हितों का भरपूर ध्यान रखते हैं। रात-बेरात स्टेशन से लाने का प्रबंध करना, उन्हें छोड़ना, यह भी आपके कार्यों में शुमार है। पता नहीं, इतनी ऊर्जा कहां से लाते हैं। यही नहीं, सुबह के नौ बजे से लेकर रात के 10 बजे तक अपने दफ्तर के कार्यों को प्राथमिकता देना, किसी भी फाइल के कार्यों को कल पर न छोड़ना, आपकी दिनचर्या में शामिल है। इतना व्यस्त होने के बाद भी आपसे मिलने की इच्छा रखने वाले आगंतुकों से सहजता से मिलना बेमिसाल लगता है।

बाल सुलभ जिज्ञासा, जीवन को भरपूर जीने की इच्छा और ईमानदारी गुरुवर की सबसे बड़ी ताकत है। आप हमेशा समाज और छात्रों के हितों के बारे में सोचते हैं। चाहे वह उनकी प्लेसमेंट हो या उनके लिए बेहतर प्रशिक्षण या फिर सभी परिसरों में छात्रावास की विभिन्न सुविधाओं का ध्यान रखना, अत्यंत बारीकी से आप सब का ध्यान रखते हैं। यहां तक कि संस्थान ने दुनिया के बेहतरीन प्रशिक्षण केंद्र के रूप में यदि आज स्थापित होने में सफलता प्राप्त की है तो इसका श्रेय भी आपको जाता है। आपने क्षेत्रीय भाषाओं में पत्रकारिता की जरूरत को ध्यान में रखते हुए संस्था में इस तरह के पाठ्यक्रम की शुरुआत भी की है।

आपने देश और दुनिया की जरूरतों को महसूस करते हुए, संस्थान के नए परिसर की स्थापना भी की है। यहां तक कि इसे विश्वविद्यालय बनाने के क्रम में आप अथक प्रयास भी कर रहे हैं, जिसमें आपको सफलता भी मिलते हुए दिखाई पड़ रही है, जो पत्रकारिता जगत के लिए अत्यंत ही शुभकारी है। आप बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्ति हैं। आप वर्तमान में बतौर एक्सपर्ट, सलाहकार और जूरी के रूप में पत्रकारिता की लगभग हर विधा से जुड़े हुए हैं।

देश के सर्वाधिक सम्मानित जिस मीडिया गुरु के शिष्य और प्रशंसक कश्मीर से कन्याकुमारी और असम तेजपूर से लेकर दूसरे छोर सौराष्ट्र तक फैले हैं, उस गुरु का सर्वाधिक आत्मीय शिष्य होने का दंभ मैं कैसे पाल सकता हूं। हां, यह जरूर कह सकता हूं कि जब मैं अत्यंत दुखी और निराश हो जाता हूं, बतौर संरक्षक आपसे हमेशा मुझे या मुझ जैसे अनेकों विद्यार्थियों को आशा की किरणें ही नहीं बल्कि अर्थपूर्ण, रास्ता अवश्य ही प्राप्त होता है।

अब लिखने के लिए तो बहुत कुछ है। एक सिरे से लिखना शुरू करता हूं तो लगता है कि दूसरा सिरा छूट रहा है। आपके व्यक्तित्व के न जाने कितने-कितने आयाम हैं। न जाने कितनी कही-अनकही कहानियां हैं। न जाने कितनी कही-अनकही पीड़ाएं हैं, जो मैंने आपसे साझा की होंगी, लेकिन यदि एक वाक्य में मुझे गुरुवर का परिचय देना हो तो कहूंगा—

आप एक ऐसे जिज्ञासु, अनथक कर्मशील पत्रकार हैं जो जीवन के अपार उत्साह, कर्तव्यबोध से परिपूर्ण, राष्ट्रप्रेम से ओत-प्रोत से स्वयं तो जीता ही है, दूसरों को भी जीने के लिए प्रेरित करता है और जिसके जीवन का प्रमुख लक्ष्य है। 

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत्॥

 



पोल

‘नेटफ्लिक्स’ और ‘हॉटस्टार’ जैसे प्लेटफॉर्म्स को रेगुलेट करने की मांग को लेकर क्या है आपका मानना?

सरकार को इस दिशा में तुरंत कदम उठाने चाहिए

इन पर अश्लील कंटेट प्रसारित करने के आरोप सही हैं

आज के दौर में ऐसे प्लेटफॉर्म्स को रेगुलेट करना बहुत मुश्किल है

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