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हैप्पी बर्थडे बिग बी: ये तीन गुण ही तो आपको बनाती हैं खास

Published At: Thursday, 11 October, 2018 Last Modified: Friday, 12 October, 2018

अभिज्ञान प्रकाश 

सीनियर कंसल्टिंग एडिटर, 'एनडीटीवी इंडिया '।।

डिटर्मिनेशन, डिसिप्लिन और डेडिकेशन ये तीन शब्द बॉलिवुड के महानायक अमिताभ बच्चन को परिभाषित करने के लिए काफी हैं। बिग-बी का जीवन इन्हीं तीन शब्दों के इर्द-गिर्द घूमता है। 76 साल की उम्र में भी जिस समर्पण भाव से वह अपने काम को अंजाम देते हैं, वह किसी अन्य कलाकार के लिए मुमकिन नहीं। अमिताभ बच्चन का जन्म आज ही के दिन यानी 11 अक्टूबर 1942 को इलाहाबाद में हुआ था।

मैं भी अमिताभ बच्चन की अदाकारी और सादगी का कायल हूं। बच्चन साहब का डिटर्मिनेशन, डिसिप्लिन और एनर्जी लेवल गजब का है, उसे कोई मैच नहीं कर सकता। उम्र के इस पड़ाव में भी वह जिस तरह से ऊर्जा से लबरेज़ नज़र आते हैं, वो बिरले ही हैं।

2012 की एक घटना का जिक्र करते हुए यहां कहना चाहूंगा कि ये वो दौर था जब केबीसी अपने पीक पर था। केबीसी के निर्माता-निर्देशक सिद्धार्थ बसु के आमंत्रण पर मैं कई एपिसोड में गया था। मैंने वहां अमितजी का एक नया ही रूप पाया। मैंने देखा कि जब सभी दर्शक बैठा जाते थे और उन्हें शो के स्टेज पर आना होता था, तो उनकी ऊर्जा का स्तर ये होता था कि वे दौड़ कर स्टेज पर आते थे। आज इतने सालों बाद भी उनमें वही जज्बा और जूनून कायम है। वह कॉन्फिडेंस और डिसिप्लिन के साथ अपनी स्क्रिप्ट पर काम करते हैं। पर्सनल या प्रोफेशनल कमिटमेंट उनसे बेहतर कोई और नहीं समझा सकता, वह काम को महज काम नहीं बल्कि जीवन के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में समझते हैं, उनका डिटर्मिनेशन, डेडिकेशन, जिंदादिली और सादगी यही सब है, जो उन्हें दूसरों से अलग बनाता है, वह सिर्फ स्टार नहीं बल्कि लीजेंड हैं। 

अक्सर मैंने देखा है कि जब इंसान सफलता के शिखर पर पहुंच जाता है, तो विन्रमता और संयम जैसे शब्द उसके शब्दकोष से गायब होते जाते हैं, मगर अमिताभ बच्चन बिल्कुल नहीं बदले। मेरा उनसे काफी पुराना रिश्ता है, जैसा मैं उन्हें कल देखता था, वैसा ही आज भी पाता हूं। वह इतनी बड़ी शख्सियत हैं कि हर कोई उनसे मिलना, हाथ मिलाना चाहता है। उन्हें देखकर कई बार लोग सुधबुध हो बैठते हैं, उनसे कोई गाना गाने या डायलॉग दोहराने की मांग करते हैं, लेकिन वह कभी किसी किस्म का गुस्सा नहीं करते। वह मुस्कुराते हैं, झुककर विन्रमता से उनका अभिवादन करते हैं और बड़ी ही खूबसूरती से जवाब देते हैं। इसमें हल्का सा कटाक्ष भी होता है, जो उनके जवाब को और भी खूबसूरत बना देता है। क्या आप किसी अन्य कलाकार से ऐसी अपेक्षा कर सकते हैं? निसंदेह नहीं... बस यही उन्हें लीजेंड बनाता है।


आने वाले समय में अमिताभ बच्चन को हिंदी और साहित्य की दिशा में काम करता देखना चाहता हूं। अमितजी का साहित्य से लगाव बढ़ा है, हिंदी पर हमारी उनकी लंबी-लंबी चर्चाएं हुई हैं। इसमें कोई दोराय नहीं कि वे अपनी सामाजिक ज़िम्मेदारी को समझते हैं। आने वाले समय में मैं इसी रूप में उन्हें ज्यादा देखना चाहूंगा। उनके अंदर काम करने की जो ऊर्जा है वो कमाल की है, उन्हें देखकर लगता है कि वो जब तक चाहेंगे काम करेंगे और वो करना भी चाहते हैं, ये वाकई कमाल की बात है। जब आपको कुछ करने की ज़रूरत नहीं है, कोई ऐसी चीज़ नहीं है जो आपको जीवन में हासिल करनी है, फिर भी इतनी लगन से काम करना, काम के प्रति उनके समर्पण और प्यार को दर्शाता है।  

देखें विडियो-

अमिताभ बच्चन की एक बात जो मुझे सबसे खास लगती है और मैंने भी उसे अपने जीवन में आत्मसात किया है, वो है रिश्तों का सम्मान करना। अमितजी पुराने रिश्तों का बहुत सम्मान करते हैं। चूंकि मैंने बॉलिवुड को बहुत करीब से देखा है, वहां मेरे कई अच्छे दोस्त हैं। वक्त के साथ-साथ उनके रवैये में एक किस्म का परिवर्तन मैंने महसूस किया है, मैं इस बारे में ज्यादा विस्तार से नहीं जाना चाहता, लेकिन अमिताभ बच्चन आज भी वैसे ही हैं। उनके अंदर इतनी उर्जा है कि हम थक जाते हैं, वो नहीं थकते।


हर दिन आप तैयार हैं कि आपको कुछ नया करना है, स्क्रिप्ट सुनते हैं, नौजवानों से बात करते हैं, मिलते हैं, उन्हें आगे बढ़ने की सीख देते हैं। हंसते-हंसते दिन की शुरुआत करते हैं और हंसी के साथ ही दिन समाप्त करते हैं। अमितजी सिर्फ एक कलाकार ही नहीं, एक शख्सियत हैं, लीजेंड हैं, उनके जैसा व्यक्ति न कभी था, और न आगे होगा। मैं तहे दिल से उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं देना चाहता हूं और चाहता हूं कि हमें ऐसे ही उनका साथ, मार्गदर्शन मिलता रहे।



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