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जानें, क्यों चर्चा का विषय बनी है ‘द टेलीग्राफ’ की आज की हेडलाइन

Published At: Friday, 15 March, 2019 Last Modified: Friday, 15 March, 2019

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

सत्ता प्रतिष्ठान के खिलाफ आवाज़ उठाना आसान काम नहीं होता। कई बार इस साहस की भारी कीमत भी चुकानी पड़ती है। कुछ मीडिया संस्थान इस ‘कीमत’ के नीचे दबकर अपनी राह बदल लेते हैं, जबकि कुछ डटे रहते हैं। अंग्रेजी अख़बार ‘द टेलीग्राफ’ भी दूसरे वाले ‘कुछ’ में शामिल है। अख़बार केंद्र सरकार की नीतियों पर लगातार सवाल उठाता रहा है। वैसे बात केवल सवाल उठाने की ही नहीं है, उन्हें जिस अंदाज़ में पेश किया जाता है उससे ‘द टेलीग्राफ’ की संपादकीय टीम की रचनात्मकता का पता चलता है। पुलवामा हमले के बाद जब मीडिया संस्थान अपने-अपने तरीके से जनता को सही-गलत समझाने में लगे थे, तब भी ‘द टेलीग्राफ’ ने कुछ ऐसा किया, जिसने सबका ध्यान खींचा। अख़बार ने फ्रंट पेज पर हमले की तिथि से एक हफ्ते तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिनचर्या को तस्वीरों के रूप में प्रकाशित किया। और इस बार भी ‘द टेलीग्राफ’ ने सबसे हटकर कुछ करने का प्रयास किया है, जिसे सोशल मीडिया पर जमकर सराहा जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी अपने भाषणों में आमतौर पर अपनी उपलब्धियां गिनाने के साथ-साथ कांग्रेसकाल खासकर पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की नीतियों पर कटाक्ष करना नहीं भूलते। उनकी देखादेखी अन्य पार्टी नेता भी यह जताते हैं कि नेहरू की गलत नीतियों और कार्यशैली का खामियाजा देश आजतक भुगत रहा है। ‘द टेलीग्राफ’ ने इसी को आधार पर बनाकर एक ऐसा न्यूज़ आइटम प्रकाशित किया है, जो भाजपा समर्थकों को शायद पसंद न आये, लेकिन तटस्थ नजरिया रखने वालों को उसमें कोई बुराई नज़र नहीं आएगी।

अख़बार के 15 मार्च के अंक में प्रथम पृष्ठ पर एक ग्राफ़िक है, जिस पर बड़े-बड़े शब्दों में ‘वांटेड’ और उसके नीचे लिखा है ‘जवाहरलाल नेहरू उर्फ़ असली दोषी।’ इसके बाद पंडित नेहरू की एक फोटो है, जिसके चारों ओर उन पर लगे आरोपों का जिक्र है। नेहरू की फोटो के ऊपर यह भी लिखा है कि ‘इन्हें आखिरी बार 27 मई 1964 को देखा गया था’।

पूर्व प्रधानमंत्री पर जो आरोप हैं, उनमें चीन को आतंकी अजहर महसूद को बेल आउट करने के लिए उकसाना, अयोध्या में मंदिर बनाने के बजाय आधुनिक भारत का निर्माण, नरेंद्र मोदी को अच्छे दिन लाने से रोकना, 2 करोड़ रोज़गार निर्मित करने के मोदी के अभियान को नुकसान पहुंचाना, हर भारतीय के खाते में 15 लाख जमा करने से नरेंद्र मोदी को रोकना, नागरिकों को अपनी पसंद का भोजन करने पर सजा देने में नाकाम रहना और भारत माता के विरुद्ध कई अन्य अपराध शामिल हैं।

इसके बाद नीचे पीएम की फोटो के साथ लिखा है कि नेहरू को देखते ही शेरिफ को सूचित करें। इसके साथ ही बड़े-बड़े शब्दों में लिखा है इनाम। यानी पता बताने वाले को इनाम दिया जायेगा जो कि नरेंद्र मोदी द्वारा लिखित एग्जाम वारियर्स की एक प्रति है। अख़बार के इस प्रयोग को प्रधानमंत्री या भाजपा पर प्रत्यक्ष हमले के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन इसमें उन्हीं बातों का जिक्र है, जिन्हें अब तक दोहराया जाता आ रहा है। लिहाजा ये केवल सरकार को यह बताने की कोशिश है कि इतिहास के पन्ने पलटने से वर्तमान को नहीं बदला जा सकता और इसे किसी के समर्थन या विरोध के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

इस ग्राफिक्स को आप यहां देख सकते हैं-



पोल

पुलवामा में आतंकी हमले के बाद हुई मीडिया रिपोर्टिंग को लेकर क्या है आपका मानना?

कुछ मीडिया संस्थानों ने मनमानी रिपोर्टिंग कर बेवजह तनाव फैलाने का काम किया

ऐसे माहौल में मीडिया की इस तरह की प्रतिक्रिया स्वाभाविक है और यह गलत नहीं है

भारतीय मीडिया ने समझदारी का परिचय दिया और इसकी रिपोर्टिंग एकदम संतुलित थी

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