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अदालतों की अनदेखी छवियों को उकेरती विनय ठाकुर की किताब का हुआ विमोचन

Published At: Saturday, 01 December, 2018 Last Modified: Saturday, 01 December, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

लेखक व फोटोग्राफर विनय आर. ठाकुर व उनके पुत्र अमोग ठाकुर की किताब ‘आर्किटेक्चर ऑफ जस्टिस’ (Architecture of Justice) का विमोचन शुक्रवार को दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर सभागार में मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस शरद ए. बोबडे ने की। किताब का विमोचन सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोईव न्यायमूर्ति शरद बोबडे ने किया। दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति एस. रविन्द्र भट भी कार्यक्रम के एक पैनल में मौजूद रहे।   

बता दें कि विनय आर. ठाकुर पेशे से वकील भी हैं और उनके पुत्र व सह-लेखक अमोग ठाकुर द्वारा अदालत के निर्माण वास्तुकला पर लिखी गई यह एक दुर्लभ किताब है। इस किताब में अदालतों की अनदेखी छवियां देखने को मिलेंगी।


कार्यक्रम के दौरान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि एक फोटो एक हजार शब्दों के बराबर होती है। इसी तरह से एक हजार शब्द अलग-अलग एक हजार लोगों के लिए होता है। गोगोई ने कहा कि इस किताब के 10,000 फोटो कितने शब्दों को और कोर्ट के इतिहास को बयां कर रहा है जो काफी रोचक है। उन्होंने कहा कि इस किताब का विमोचन करते हुए मुझे विशेष खुशी हो रही है, जिसके लिए मैं अपने आपको खुशकिस्मता समझता हूं।


किताब की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि किताब में कोर्ट का पूरा इतिहास समाया हुआ है। इसको लिखने और फोटो कलेक्शन में जो मेहनत की गई है वह वाकई-काबिले-तारीफ है। उन्होंने लेखक के समर्पण और वचनबद्ध की प्रशंसा की।     

वहीं न्यायमूर्ति एस. रविन्द्र भट ने किताब के बारे में कहा कि यह किताब देश के न्यायालयों के बारे में रोचक जानकारी उपलब्ध कराती है। यह एक अनूठी तरह की नई कॉफी-टेबल बुक है, जिसमें हमारे देश के न्यायालयों की भव्यता और समारोह को प्रमाणित करती है।

वहीं, ‘आर्किटेक्चर ऑफ जस्टिस’ के लेखक और फोटोग्राफर विनय आर. ठाकुर ने कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट का सही शॉट लेने के लिए अग्निशमन विभाग से अनुमति लेनी पड़ी,ताकि सुप्रीम कोर्ट का सही शॉट लिया जा सके। उन्होंने कहा कि फोटोग्राफी में मेरा प्रशिक्षण और अनुभव काम आया। यही वजह है कि मैंने अलग नजरिए से अदालत की सुंदर इमारत को देखा,सीखा और महसूस किया। मैंने सीखा कि केन्द्रीय हॉल जो अदालतों की ओर जाता है,उसे ‘पियानो नोबाइल’कहा जाता है,जो इसकी यूरोपीय आर्किटेक्चर पृष्ठभूमि से चित्रित होता है।

किताब के सह लेखक अमोग ठाकुर ने कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट और भारत के उच्च न्यायालयों का एक पिक्चरियल वॉकथ्रू है, जो भवनों को उनके इतिहास और संदर्भ की पृष्ठभूमि को प्रस्तुत करता है। मुखौटे से खंभे तक, खिड़कियां और नक्काशीदार, जो एक आम व्यक्ति के लिए बेशक सामान्य सी लगती हैं, लेकिन एक फोटोग्राफर की आंखों से सुंदरता का प्रतीक नजर आती है।



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