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अटल जी पर लिखी इस पुस्तक ने मात्र दस दिनों में बनाया रिकॉर्ड

Published At: Wednesday, 09 January, 2019 Last Modified: Thursday, 10 January, 2019

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन पर आधारित और साहित्यकार भुवनेश सिंघल द्वारा संपादित पुस्तक ‘स्मृतियाँ अटल हैं’ मात्र 10 दिनों में बेस्ट सेलर बुक बन चुकी है। इस पुस्तक को बेच रहे प्रकाशकों ने इन दिनों दिल्ली के प्रगति मैदान में चल रहे विश्व पुस्तक मेले के दौरान इसे बेस्ट सेलर बुक घोषित किया है।

सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति के संस्थापक वरिष्ठ साहित्यकार व अटल जी के साथी रहे पं. सुरेश नीरव ने इस पुस्तक को ‘बेस्ट सेलर बुक अवार्ड’ प्रदान किया। यह सम्मान भुवनेश सिंघल को प्रदान किया गया।

इस मौके पर हॉल संख्या-8 के प्रथम तल स्थित ऑडिटोरियम में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में अटल जी की सरकार में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री रहे राज्यसभा सांसद पदमश्री डॉ. सी. पी. ठाकुर ने दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम का प्रारम्भ किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में भाजपा के जिलाध्यक्ष रोशन कंसल, जिलाध्यक्ष अजय महावर, वरिष्ठ समाजसेवी नवीन तायल, डॉ. यू. के. चौधरी व पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक की पुत्री व कथक नृत्यांगना आरूषी निशंक रहीं। कार्यक्रम में सभी अतिथियों का स्वागत प्रतीक चिन्ह व अंगवस्त्र भेंट कर किया गया।

इस मौके पर पुस्तक चर्चा का आयोजन भी किया गया। समाचार4मीडिया डॉट कॉम के संपादकीय प्रभारी अभिषेक मेहरोत्रा और लोकसभा टीवी के एंकर पराक्रम सिंह शेखावत के साथ हुई पुस्तक चर्चा में भुवनेश सिंघल ने बताया, ‘यह पुस्तक पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन से जुड़े संस्मरणों पर आधारित है। इस पुस्तक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व राष्ट्रपति से लेकर तमाम मुख्यमंत्रियों, राज्यपालों, केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों, वरिष्ठ साहित्यकारों, कवियों, पत्रकारों व अटल जी के पुराने मित्रों द्वारा अटल जी के साथ बिताए गई यादों से जुड़े संस्मरणों को संग्रहित करके तैयार किया गया है। इस पुस्तक को तैयार करने में लगभग दो वर्षों का समय लगा है, क्योंकि अटल जी के मित्रों को खोजना व उनसे समय लेना तथा देश के शीर्ष राजनेताओं जिन्होनें अटल जी के साथ काम किया है, उनसे संस्मरण लेना एक कठिन कार्य था, मगर अटल जी के प्रति समर्पण ने यह कठिन कार्य भी सरल कर दिया।‘

उन्होंने बताया, ‘यह पुस्तक अटल जी के जीवन का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इस पुस्तक में अटल जी के जीवन के अनेक अनछुए पहलुओं को सामने लाया गया है। इसमें उनकी अनेक ऐसी यादों को संग्रहित किया गया है जो उनके चाहने वालें के सामने कभी नहीं आ सकी थीं। यह उनके चाहने वालों के लिए एक यादगार पुस्तक है। इसमें प्रधानमंत्री के उस लेख को संग्रहीत किया गया है, जिसमें उन्होंने अटल जी को ‘मेरे अटल’ कहकर सम्बोधित किया था और बहुत ही भावुक क्षणों को शब्दों में पटल पर उतारा था।‘

भुवनेश सिंघल ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के शब्द ‘मेरे अटल’ ने उन्हें खासा प्रभावित किया है। साथ ही सिंघल ने यह भी बताया कि इस पुस्तक में यह भी बताया गया है कि अटल जी के जीवन का अंतिम सम्मान उन्होंने स्वयं अपने हाथों से अटल जी को उनकी मृत्यु से मात्र कुछ माह पहले ही प्रदान किया था, जो उनके जीवन का अंतिम सम्मान था।

इसके अलावा पूर्व मंत्री सीपी ठाकुर ने अटल जी के साथ के अनेक संस्मरणों को साझा किया। उन्होंने कहा, ‘इस पुस्तक के लिए जब सिंघल जी मेरे पास आए तब अटल जी जीवित थे। भुवनेश ने मुझसे कहा कि मैं अटल जी की यादों को एक पुस्तक में संग्रहित करना चाहता हूं, ताकि उनके चाहने वालों को एक उपहार दे सकूं। मुझे इनकी सोच अच्छी लगी और मैंने अटल जी के साथ के अनेक किस्से भुवनेश सिंघल को सुनाए। अटल जी की सरकार में मुझे केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री और जल संसाधन मंत्री रहने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मैं दो बार मंत्री रहा। अटल जी अपने साथ के हर आदमी को आगे बढ़ाते थे। अटल जी को पूरी दुनिया में जो सम्मान हासिल हुआ वो बहुत ही विरले  लोगों के नसीब में होता है। उनकी मृत्यु पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं भयंकर गर्मी में स्वयं पैदल चलकर उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए, जो विश्व भर के लिए संवेदनाओं और श्रद्धा का एक अनूठा उदाहरण है।‘

इस अवसर पर लोकसभा टीवी के एंकर पराक्रम सिंह शेखावत का सम्मान भी किया गया।

रोशन कंसल ने कहा, ‘अटल जी जैसा श्रेष्ठ वक्ता होना सरल नहीं है। वो जब बोलते थे तो लोग मंत्रमुग्ध  होकर सुनते थे। उनके चाहने वालों की संख्या का अंदाजा लगाना नामुमकिन है। वो एक सच्चे जननेता थे। भुवनेश सिंघल ने ऐसे महान व्यक्तित्व की यादों को एक पुस्तक के रूप में संजोकर अटल जी के चाहने वालों को एक तोहफा प्रदान किया है। यह पुस्तक आज बेस्ट सेलर बुक के रूप में सम्मानित की गई है, यह होना स्वाभाविक था क्योंकि अटल जी के जाने के बाद उनके जीवन के बारे में जानने को लोग बहुत ज्यादा उत्सुक हैं और उनकी उत्सुकता को केवल यही पुस्तक पूर्ण कर सकती है।‘

इस अवसर पर पुस्तक के विक्रेता प्रकाशकों में समदर्शी प्रकाशन, केबीएस प्रकाशन आदि प्रकाशक उपस्थित रहे। वहीं अन्य  मुख्य लोगों में मेजर एस. पी. सिन्हा, कर्नल आर. सी. वर्मा, समाजसेवी डी. पी. गोयल, अनिल जिंदल, राजकुमार गर्ग, पवन झा, अमरेन्द्र कुमार, प्रशांत द्विवेदी, श्याम जैन, जयप्रकाश विलक्षण, मेजर एस. पी. सिन्हा, नरेन्द्र अरोड़ा, अनिल जिंदल, मोहन गोयल, सचिन मावी व वैभव सिंघल आदि मौजूद रहे।

गौरतलब है कि हाल ही में इस पुस्तक का लोकार्पण अटल जी के जन्म दिवस की पूर्व संध्या पर संसद भवन में किया गया था। इस दिन संसद भवन में विगत पांच वर्षों से अटल सम्मान समारोह का आयोजन भी भुवनेश सिंघल द्वारा किया जाता है। भुवनेश सिंघल अटल जी से बचपन से ही प्रभावित रहे हैं।



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