Share this Post:
Font Size   16

जागरण में ये कैसी चूक, भाजपा में राष्ट्रीय उपराष्ट्रपति?

Published At: Thursday, 04 January, 2018 Last Modified: Thursday, 04 January, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

भाजपा के वरिष्ठ नेता है विनय सहश्रबुद्धे, बीजेपी के काडर को यूं तो संघ की शाखाओं में ट्रेनिंग दी जाती है, लेकिन तमाम अन्य रास्तों से आने वाले, या शाखाओं के इतर आज की राजनीति को ढंग से समझने वालों के लिए एक ट्रेनिंग सेंटर मुंबई के पास चलाने के चलते ज्यादा जाने जाते हैं विनय। हाल ही में उन्हें देश के बड़े मीडिया समूह 'जागरण' की जागरण जोश वेबसाइट ने बीजेपी का राष्ट्रीय उपराष्ट्रपति बताया है। 

दरअसल मामला मानवीय गलती है का है, जो जागरण के किसी पत्रकार से हुई है, खबर पर किसी शारदा नंद का नाम है तो या तो उनकी गलती है या ट्रांसलेशन करने वाले की भी गलती हो सकती है। दरअसल विनय सहश्रबुद्धे को हाल ही में आईसीसीआर यानी इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशंस का अध्यक्ष चुना गया है। उसकी खबर जागरण जोश की वेबसाइट ने भी बनाई, जिसने भी लिखी इस बात का ध्यान रखा कि टेक्नीकल गलती ना हो। बंदा इतना ईमानदार था कि सरकारी भाषा में लिखा कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नियुक्त किया है, इतना भी ध्यान रखा कि आईसीआईसीआर की फुल फॉर्म कहीं या 'इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशंस' ना लिख जाए, बल्कि उसकी जगह कई जगह 'भारतीय सांस्कृतिक सम्बन्ध परिषद' ही लिखा है, यानी हिंदी का पूरा सम्मान। ट्रांसलेशन में कोई गडबड़ ना चली जाए.. फिर भी चली गई।

शायद उसने वाइस प्रेसीडेंट का भी गूगल ट्रांसलेशन किया होगा। तभी चूंकि विनय भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं तो अंग्रेजी में उन्हें नेशनल वाइस प्रेसीडेंट लिखा जाता है, बंदे या बंदी ने उनको लिख दिया, ‘’विनय सहश्रबुद्धे भाजपा में ‘राष्ट्रीय उपराष्ट्रपति’ हैं।'' राष्ट्रीय उपराष्ट्रपति अपने आप में एक ऐसा शब्द है, जिस पर किसी की भी नजर चली जाएगी, लेकिन पूरे जागरण परिवार में नहीं गई, ये चौंकाने वाली बात है क्योंकि खबर 31 दिसम्बर को लिखी गई थी और पांच दिन बाद तक डिजिटल वर्जन में कोई संशोधन देखने को नहीं मिला है। 

जानकार बताते हैं कि आजादी से पहले कांग्रेस पार्टी के प्रेसीडेंट को सभापति भी बोला जाता था क्योंकि तब कांग्रेस पार्टी में तब्दील नहीं हुई थी, एक सभा के तौर पर साल में एक बार मिलते थे। बाद में कांग्रेस प्रेसीडेंट का हिंदी में ट्रांसलेशन वो कांग्रेस के राष्ट्रपति के तौर पर भी करने लगे थे। लेकिन आजादी के बाद ऐसा कोई उदाहरण नहीं मिला कि किसी पार्टी के अध्यक्ष को राष्ट्रपति या उपाध्यक्ष को उपराष्ट्रपति लिखा गया हो। ऐसे में जागरण की ये खबर मानवीय भूल ही ज्यादा लगती है।


समाचार4मीडिया.कॉम देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल exchange4media.com की हिंदी वेबसाइट है। समाचार4मीडिया में हम अपकी राय और सुझावों की कद्र करते हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो कर सकते हैं। 



पोल

मीडिया-एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से लगातार आ रही #MeToo खबरों पर क्या है आपका मानना

जिसने जैसा किया है, वो वैसा भुगत रहा है

कई मामले फेक लग रहे हैं, ऐसे में इंडस्ट्री को कुछ ठोस कदम उठाना चाहिए

दोषियों को बख्शा न जाए, पर गलत मामला पाए जाने पर 'कथित' पीड़ित भी नपे

Copyright © 2018 samachar4media.com