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राणा यशवंत की सोच: बात होनी ही चाहिए, जब बात ज़रूरी हो...

Published At: Thursday, 20 September, 2018 Last Modified: Thursday, 20 September, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

जो लोग कहते हैं कि टीवी न्यूज के पत्रकारों में रचनात्मकता नहीं होती। वे साहित्य और समाज को लेकर उदासीन है। लेकिन ऐसा नहीं है, आलोचकों के मिथक को आजकल टेलिविजन के पत्रकार लगातार तोड़ रहे हैं। इन पत्रकारों में इंडिया न्यूज के मैनेजिंग एडिटर राणा यशवंत का नाम भी शुमार है, जो जाने-माने पत्रकार होने के साथ-साथ एक अच्छे कवि भी हैं। और अमूमन कवि अपनी कविता के जरिए अपनी सोच को भी दर्शाता है। 2016 में उनका काव्य संग्रह ‘अंधेरी गली का चांद’ का विमोचन हुआ था, जो काफी लोकप्रिय रहा। उनकी द्वारा लिखी एक कविता आप यहां पढ़ सकते हैं-  

 

बात होनी ही चाहिए

जब बात ज़रूरी हो

कोई मसला हो, कोई मुसीबत हो

कोई संकट हो, कोई मजबूरी हो

बात होनी ही चाहिए

जब बात ज़रूरी हो

 

समय के पहले बात नहीं बनती

समय के बाद बात नहीं पचती

बात से बात निकल जाती है

बात से बात बन जाती है

बात होनी ही चाहिए

जब बात ज़रूरी हो

 

बात पर कोई टिक जाता है

बात पर कोई बिक जाता है

बात-बात में अंतर बन जाता है

बात का बतंगड़ बन जाता है

बात होनी ही चाहिए

जब बात ज़रूरी हो

 

 

 

 



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