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जब मीडिया मानती थी कि बच्चन साहब है इमर्जेंसी में मीडिया बैन के पीछे...

Published At: Monday, 30 January, 2017 Last Modified: Friday, 21 April, 2017

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।

Finished.... यही हेडिंग थी इलेस्ट्रेड वीकली की कवर पेज पर, जिसे अमिताभ बच्चन ने अपने कमरे में अपनी टेबल पर लगा रखा था और रोज उसे देखते थे। ये हेडिंग बच्चन के लिए ही लिखी गई थी कि उनका कैरियर तो फिनिश्ड हो गया। सालों तक लगी रही। दरअसल ये दौर था इमरजेंसी के बाद का जब तमाम फिल्मी मैगजींस ने मीडिया पर बैन के लिए इंदिरा गांधी के करीबी अमिताभ बच्चन को जिम्मेदार माना। उनका मानना था कि इसके पीछे अमिताभ बच्चन हैं। कई सालों तक ये बैन रहा, कि अचानक स्टार डस्ट ने उनको लेकर एक आर्टीकल छापा और उस आर्टीकल के बाद अमिताभ बच्चन स्टार डस्ट मैगजीन पब्लिश करने वाली वाली कंपनी मैग्ना पब्लिशिंग के मालिक नारी हीरा से मिलने जा पहुंचे।

दरअसल उस वक्त की चर्चित सिनेमा मैगजींस स्टार डस्ट, सिने ब्लिट्ज, स्टार एंड स्टाइल आदि को लगा कि मीडिया पर जो सेंसरशिप लगाई गई है, उसकी सलाह अमिताभ बच्चन ने दी होगी। नहीं तो क्या अमिताभ बच्चन विरोध नहीं करते। सच को किसी ने बच्चन से जानने की कोशिश नहीं की, लेकिन अपने तरीके से बच्चन का विरोध करना शुरू कर दिया। तय कर लिया कि अमिताभ बच्चन के बारे में ना कोई रिपोर्ट छपेगी और ना ही उनका कोई फोटो छापा जाएगा। होता ये था कि अगर किसी ग्रुप फोटो में अमिताभ बच्चन भी हैं तो उसको या तो साइड से क्रॉप कर दिया जाता था, या फिर वो स्पेस ब्लैंक करके ही छापा जाता था।

अमिताभ बच्चन को भी अहसास हो गया था, लेकिन उन्होंने इस बात पर ना गुस्से का इजहार किया और ना ही कोई बयान दिया। बल्कि खुद भी मीडिया से दूरी बना ली, वो भी फिल्मी पत्रकारों को अपनी तरफ से बैन करने लगे। इसी दौर में बच्चन एक बार पहाड़ों पर छुट्टी मनाने गए थे, तो एक प्रेस फोटोग्राफर ने फोटो लेने की कोशिश की, तो बच्चन ने उससे कैमरा छीनने की कोशिश की और वो फोटो काफी चर्चित हुआ था। ये वो साल थे जब अमिताभ बच्चन स्टार से सुपरस्टार होने के दौर में थे। 1975 में अमिताभ की शोले और दीवार रिलीज हुई थीं, तो 1976 में कभी कभी और हेराफेरी, 1977 में अमर अकबर एंथोनी तो 1978 में त्रिशूल। मीडिया उन्हें छाप नहीं रही थी और जनता सुपरस्टार बनाने पर तुली थी। 1982 तक ऐसे ही चलता रहा, जब तक कि नारी हीरा ने उनके ऊपर एक आर्टीकल नहीं छापा।

दरअसल 1982 में कुली की शूटिंग के दौरान अमिताभ के साथ का हादसा तो सबको पता ही है, अमिताभ ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। नेशनल मीडिया के जरिए फैंस को खबर लग रही थी, पूरे देश में दुआएं जारी थीं और फिल्मी मीडिया खामोश था। स्टार डस्ट जैसी बड़ी मैगजीन निकालने वाले नारी हीरा से रहा नहीं गया, उन्होंने बैन को एक तरफा तोड़ दिया और एक लेख अमिताभ बच्चन और उनके हादसे को लेकर अपनी मैगजीन में छापा। हॉस्पिटल में बच्चन को काफी आश्चर्य हुआ। जब वो ठीक हुए तो नारी हीरा से मिलने जा पहुंचे।

अमिताभ ने नारी हीरा से पूछा कि आपने ये लेख क्यों लिखा, आप तो नाराज थे मुझसे? तो नारी हीरा के जवाब ने अमिताभ को लाजवाब कर दिया, वो जवाब था- “हम ये तो चाहते थे कि आप फेल हो जाएं, लेकिन ये बिलकुल नहीं कि आप मर जाएं।“ हालांकि उस मीटिंग में गिले शिकवे दूर हो गए, लेकिन बच्चन और मीडिया का ये अलगाव चलता रहा। उसके बाद बच्चन राजनीति में चले गए। बताते हैं कि 1999 में अजूबा की शूटिंग के दौरान अमिताभ ने पत्रकारों को खुद सैट पर बुलाया था, तब से रिश्ते सामान्य हुए। लेकिन नारी हीरा के इस लेख की कहानी बच्चन ने खुद अपने ब्लॉग में अपने चाहने वालों से शेयर की।

नारी हीरा ने अपने कैरियर की शुरूआत एड एजेंसी से की थी, लेकिन बाद में उसे पब्लिशिंग हाउस में बदल दिया। स्टार डस्ट, शो टाइम, सेवी और हैल्थ जैसी मैगजींस शुरू कीं। एक दौर में स्टार डस्ट तो फिल्म इंडस्ट्री की सबसे चर्चित मैगजीन बन गई, उसके स्कूप देश भर में चर्चा का विषय बनने लगे। हालांकि अब स्टार डस्ट मैगजीन से ज्यादा उसके अवॉर्ड्स की चर्चा होती है। वीड़ियो फिल्मों के दौर में अपने बैनर हीबा फिल्म्स के तहत कुल 15 वीडियो फिल्में नारी हीरा ने बनाईं। आदित्य पांचोली और उर्मिला मांतोडकर को उनकी ही खोज माना जाता है। 2007 में नारी हीरा ने अपना फिल्म प्रोडक्शन हाउस मैग्ना फिल्म्स खोलकर फिल्म प्रोडक्शन में उतरने का मूड बनाया, डिनो मोरिया और मिलिंद सोमन को लेकर एक मूवी भी बनाई- भ्रम। लेकिन बाद में इरादा बदल दिया।

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