Share this Post:
Font Size   16

किताब के विमोचन के समय पर उठा सवाल, हेमंत शर्मा ने दिया ये जवाब...

Published At: Friday, 21 September, 2018 Last Modified: Friday, 21 September, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

साप्ताहांत में दिल्ली में अकसर पुस्तक लोकार्पण के कार्यक्रम होते रहते हैं। पर कल यानी 20 सितंबर, 2018 की शाम डॉ. भीमराव अम्बेडकर इंटरनेशनल सेंटर में हुआ एक पुस्तक लोकार्पण समारोह अपने आप में ही भव्य था। भव्यता ऐसी थी कि दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी के प्रधान, सबसे बड़ी सामाजिक संस्था के प्रमुख समेत कई कैबिनेट मंत्री के साथ-साथ बड़ी संख्या में देश के बड़े संपादक, देश की नव्ज समझने वाले रिपोर्टर्स और अयोध्या के प्रति श्रद्धा रखने वाले राम सेवक मौजूद थे। कार्यक्रम था देश के जाने-माने पत्रकार हेमंत शर्मा की दो पुस्तकों ‘युद्ध में अयोध्या’ और ‘अयोध्या का चश्मदीद’ का लोकार्पण। व्यवस्था संभाल रहे थे टीवी में कई चमकने वाले चेहरे। कार्यक्रम की शुरुआत अयोध्या पर बनी एक शानदार डाक्यूमेंट्री और फिर उसके बाद सजी सुरों की एक शानदार शाम।

राम मंदिर के लिए हर कोई मिलकर काम करे-

पुस्तक विमोचन के मौके पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कार्यक्रम की तरीफ करते हुए कहा कि मुझे लग रहा है कि मैं वाराणसी में बैठा हुआ हूं। इस दौरान उन्होंने किताब के लेखक हेमंत जी की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि उनसे मेरा संबंध 30-32 साल पुराना है और ये सच है कि जब मैं 1991 में उत्तर प्रदेश का शिक्षा मंत्री था, तो हेमंत जी मेरे कटु आलोचक थे। तब वे जनसत्ता में लिखा करते थे और वे जो लिख देते थे, उस पर जबरदस्त चर्चा होती थी। इसलिए मैं उनकी पत्रकारिता का कायल रहा हूं। कभी हेमंत जी से अयोध्या की बाते होती थीं, तो ये होता था लिखिए, लिखिए, लिखिए। कुछ समय पहले भी उन्होंने चर्चा की थी कि अयोध्या पर जल्द ही कुछ लिखूंगा। मैंने कहा लिख दीजिए। इसलिए मैं बधाई देना चाहता हूं कि हेमंत जी आपने किसी की सुनी अथवा नहीं, लेकिन अयोध्या की सुनकर आपने दो पुस्तकें लिख दीं। दो पुस्तकें जो उन्होंने लिखी है और जितनी भी उसकी भूमिका मैंने पढ़ी व जो चलचत्रि देखा, उससे दावे के साथ कह सकता हूं कि इसमें अयोध्या का पूरा यात्रचक्र शामिल है। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि यह संतोषजनक होगा अगर भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए सभी धर्मों के अनुयायी मिलकर काम करें।  

राम जन्मभूमि के मुद्दे पर नहीं बोलेंगे ज्यादा-

वहीं कार्यक्रम में शामिल हुए बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने शायद सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के चलते ही राम जन्मभूमि के मुद्दे पर ज्यादा बात करने से इनकार कर दिया, लेकिन फिर भी इस दौरान उन्होंने जो कुछ बोला, वह अखबारों के लिए सुर्खिया बनने के लिए काफी था। उन्होंने न केवल राम जन्मभूमि आंदोलन को स्वतंत्रता के बाद से देश का सबसे बड़ा आंदोलन बताया, बल्कि यह भी कहा कि राम मंदिर के लिए हुए इस आंदोलन ने समाज के सभी वर्गों को छू लिया था। उन्होंने कहा कि अयोध्या से सम्बंधित पांच नहीं छह घटनाएं हैं। छठी घटना है- विवादित ढांचे का टूटना, वहीं से ये संघर्ष शुरू हुआ। उन्होंने कहा कि छह सदी पहले अयोध्या में मंदिर ध्वस्त होने के बाद से ही लोगों का आंदोलन चल रहा था और यह तब तक जारी रहेगा, जब तक कि संस्कृति की जीत नहीं हो जाती। उन्होंने कहा, ‘लोगों की भावनाएं हमेशा लोकतंत्र में जीतती हैं, और मुझे विश्वास है कि यह आंदोलन इसी दिशा में जाएगा।’

हालांकि इस दौरान उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि अयोध्या की विवादित जमीन के मालिकाना हक पर बातचीत हो तो राम मंदिर के निर्माण के तथ्य से किनारा नहीं किया जा सकता है, क्योंकि इस तथ्य से इनकार नहीं कर सकते कि अयोध्या में राम मंदिर ध्वस्त हुआ है।

ये बहस तो चलती रहेगी-

वहीं, कार्यक्रम में मौजूद राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, 'मैं हेमंत जी को पहले नहीं जानता था, लेकिन वो जब इस पुस्तक के प्रकाशन के लिए उपस्थित होने का न्योता लेकर आए, तभी उनसे पहली भेंट हुई। पहले पता भी नहीं था। पंडित मनु शर्मा (लेखक हेमंत शर्मा के पिताजी) का नाम तो सुना था लेकिन कभी उनकी पुस्तकें पढ़ीं नहीं, क्योंकि इधर उत्तर प्रदेश में कभी रहा नहीं। वैसे किताब की टाइमिंग को लेकर सवाल तो मुझसे भी पूछा गया। इस दौरान उन्होंने राम जन्मभूमि विवाद पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, 'जन्मभूमि एक ही होती है वहां मंदिर बनाने की मांग है। ये कहा गया होता कि इस जमाने में ये सम्भव नहीं है तो मान भी लेते, लेकिन कहा गया कि वहां राम का जन्म हुआ ही नहीं। ये सुनकर हम पढ़े लिखे धैर्य कर भी लें तो गली में चलने वाला आस्तिक लड़का धैर्य कैसे रखेगा। हम राम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर जल्द से जल्द बनवाना चाहते हैं।'

मोहन भागवत ने कहा कि मस्जिद किसने तोड़ी, कौन उसका जिम्मेदार है इसकी बहस तो चलती रहेगी, क्योंकि ये राजनीति का हिस्सा है और सच को सामने लाना जरूरी भी है। हालांकि यहां उन्होंने एक विवादित बयान भी दिया कि जब-जब सच्चाई और न्याय को नकारा जाएगा, अयोध्या में महाभारत होगी। ऐसा नहीं होना चाहिए लेकिन इसे कोई रोक भी नहीं सकेगा।

किताब लिखना मेरा गिलहरी प्रयास-

खुद लेखक ने भी राम मंदिर आंदोलन को अपने अंजाम तक पहुंचाने का संकेत करते हुए अमित शाह को मंच से इशारा किया। लेखक हेमंत शर्मा ने कहा, 'अमित शाह जी अयोध्या आपकी ओर बड़ी उम्मीद से देख रही है। मैंने इसे इसलिए अभी लिखा ताकि मेरा भी इस महायज्ञ में गिलहरी प्रयास हो जाय।' उन्होंने कहा कि इस किताब को लिखने में काफी मुश्किल आती अगर ASI, नेशनल आर्काइव, नेहरू मेमोरियल म्यूजियम ने मदद न की होती।    

इन दो पुस्तकों को देखकर मेरा मन अब खुद से पूछ रहा है कि क्या सचमुच तुम इन पुस्तकों के लेखक हो। क्या तुमने ये काम किया है? मेरा मन नहीं मान रहा है कि मैं ही इन पुस्तकों का लेखक हूं, मुझसे तो यह काम करा लिया गया है। कोई ऐसी ताकत है जिसने मुझसे यह काम कराया है। हम उसे भी प्रणाम करते हैं।

पुराने पत्रकारीय साथी ने मुझसे पूछा कि यह किताब आपने अभी क्यों लिखी। इसकी टाइमिंग पर सवाल उठेगा और तुम्हारे लिखने पर भी। हालांकि ये हमारे मित्र सड़क पर बाएं चलने के अलावा विचारों में भी बाएं से चलते हैं। उनसे मैंने कहा कि बात तो आपकी सही है। अयोध्या पर मैं नहीं लिखूंगा, तो कौन लिखेगा। अयोध्या पर अब तक जो कुछ लिखा गया वह अब देखा गया और सुना हुआ यथार्थ था। किताब में मेरा भोगा हुआ यथार्थ है। चार घटनाओं पर मैं मौजूद था इसलिए मेरा लिखने का हक है। चार इसलिए क्योंकि पहली घटना में मेरा जन्म नहीं हुआ था। अब तक अयोध्या के बारे में जो कुछ लिखा गया अयोध्या के बारे में, वह या तो इस पक्ष का था या उस पक्ष का। निरपेक्ष दृष्टि से अयोध्या पर लिखा नहीं गया। अयोध्या का सच किसी ने जाना नहीं।

उन्होंने कहा कि इसकी टाइमिंग को लेकर सवाल उठ सकते हैं। हमारे पत्रकार साथी की जैसी जिज्ञासा और लोगों की भी हो सकती हैं। पर अयोध्या विवाद इस समय निर्णायक बिंदु पर है। देश की सर्वोच्च अदालत में इस पर सुनवाई हो रही है। मैंने सोचा कि ये मेरा धर्म है कि मैंने जो कुछ देखा है, जो कुछ सुना है अयोध्या की नजरों से उसे बयान कर दूं, तो शायद मेरा भी कुछ गिलहरी प्रयास हो जाए, इस वजह से मैंने इसे अभी लिखा।  

 सत्ता के ये सिपाही थे मौजूद-

देश की मोदी सरकार के कई मंत्री इस समहारोह की शोभा बढ़ाते नजर आए। कैबिनेट मंत्री महेश शर्मा, रविशंकर प्रसाद, प्रकाश जावड़ेकर, कलराज मिश्र, गिरिराज सिंह, थावर चंद गहलोत, विजय गोयल, संतोष गंगवार  आदि।

नेताओं का था हुजूम-

बीजेपी के बड़े नेता ओम माथुर, कांग्रेस के बड़े नेता जनार्दन द्विवेदी, सपा के महासचिव रामगोपाल यादव, यूपी बीजेपी अध्यक्ष महेंद्र पांडे,  गृहमंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र और नोएडा के विधायक पंकज सिंह, बीजेपी प्रवक्ता नवीन कुमार, शाहनवाज हुसैन, मनोज सिन्हा,  एस.पी. सिंह बघेल आदि।

संपादक पत्रकारों का लगा था मेला-

देश के कई वरिष्ठ संपादक और पत्रकार इस मौके पर नजर आए, जिसमें प्रमुख रूप से प्रसार भारती के चेयरमैन ए.सूर्य प्रकाश, डॉ. वेद प्रताप वैदिक, एन.के. सिंह, राहुल देव, जी यूपी और जी एमपी-छत्तीसगढ़ के संपादक दिलीप तिवारी, जगदीश चंद्रा, प्रभु चावला, सुमित अवस्थी, अजीत अंजुम, विनोद कापड़ी, अजय उपाध्याय, शिवेंद्र कुमार सिंह, आलोक श्रीवास्तव, शेष नारायण सिंह, जय शंकर गुप्त, शरद गुप्ता, पुष्पेष पंत, संतोष भारतीय, , राम बहादुर राय, ऋचा अनिरुद्ध, लखनऊ से मालिनी अवस्थी, यतीन्द्र मिश्र, नवनीत सहगल, अरविंद कुमार सिंह आदि।  

यहां देखें किताब के विमोचन का विडियो:

 

 

 

Tags headlines


पोल

‘नेटफ्लिक्स’ और ‘हॉटस्टार’ जैसे प्लेटफॉर्म्स को रेगुलेट करने की मांग को लेकर क्या है आपका मानना?

सरकार को इस दिशा में तुरंत कदम उठाने चाहिए

इन पर अश्लील कंटेट प्रसारित करने के आरोप सही हैं

आज के दौर में ऐसे प्लेटफॉर्म्स को रेगुलेट करना बहुत मुश्किल है

Copyright © 2018 samachar4media.com