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यूपी में ऐसे हो रही मीडिया कंट्रोल करने की कोशिश

Published At: Thursday, 20 September, 2018 Last Modified: Monday, 24 September, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

उत्तर प्रदेश में फर्जी खबरों पर लगाम लगाने के नाम पर मीडिया पर ही अंकुश लगाने की कोशिशें शुरू हो गई हैं। कम से कम ललितपुर जिला प्रशासन के तुगलकी फरमान से तो ऐसा ही प्रतीत हो रहा है। जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि वॉट्सऐप ग्रुप और न्यूज पोर्टल के जरिए खबर देने वाले सभी पत्रकारों को प्रशासन के पास पूरी जानकारी देनी होगी। उन्हें अपने वॉट्सएप ग्रुप का सूचना विभाग में रजिस्ट्रेशन करना होगा। बात केवल इतनी भर नहीं है, प्रशासन ने चेतावनी भी दी है कि ऐसा न करने वाले पत्रकारों पर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

इस लिखित आदेश के मुताबिक, जिले का कोई भी पत्रकार बिना सूचना विभाग में पंजीकरण करवाए मीडिया वॉट्सऐप ग्रुप का संचालन नहीं कर सकता। ग्रुप एडमिन को ग्रुप में जुड़े सभी सदस्यों की जानकारी देनी होगी। इसके साथ ही ग्रुप एडमिन को आधार कार्ड की कॉपी, फोटो और अन्य जानकारियां उपलब्ध करानी होंगी। ग्रुप में किसी भी तरह की आपत्तिजनक या अपमानित करने वाले पोस्ट को शेयर करने के लिए एडमिन पूरी तरह से जिम्मेदार होगा। यह आदेश सभी मीडिया वेबसाइटों पर भी लागू होता है। इस फरमान को लेकर अब बवाल शुरू हो गया है, मीडिया संगठनों ने इसे पूरी तरह से गलत करार देते हुए आदेश वापस लेने की मांग की है। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि आदेश में कुछ गलत नहीं है।

आखिर क्या है वजह?

दरअसल, बीते दिनों जिले की महरौनी कोतवाली के चौकी गांव में दो पक्षों में विवाद हो गया था, जिसके बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह के अफवाह फैलाई जाने लगीं। यह भी कहा गया कि कुछ फर्जी पत्रकार वॉट्सऐप ग्रुप के जरिए अफवाह फैलाने वालों में शामिल थे। इसके बाद जिला प्रशासन ने फर्जी पत्रकारों पर नकेल कसने के नाम पर मीडिया पर ही अंकुश लगाने का यह फरमान सुना डाला।

यह है आशंका

पत्रकारों को आशंका है कि मीडिया पर शिकंजा कसने के लिए राज्य के अन्य जिलों में भी इस तरह के फरमान सुनाये जा सकते हैं। यदि ऐसा होता है कि न केवल पत्रकारों की परेशानी बढ़ेगी, बल्कि मीडिया में सरकार की दखलंदाजी भी बढ़ जाएगी। हालांकि, यूपी सूचना विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकार की ऐसी कोई योजना नहीं है और न ही उसकी तरफ से ऐसा कोई आदेश जारी किया गया है। विभाग का कहना है कि यदि ललितपुर जिला मजिस्ट्रेट द्वारा ऐसा आदेश जारी किया गया है, तो यह पूरी तरह से स्थानीय स्तर पर है। वहीं, ललितपुर जिलाधिकारी के आदेश का असर दिखाई देने लगा है, जिले के साथ ही राज्य के कई पत्रकारों ने अपने वॉट्सऐप ग्रुप बंद कर दिए हैं। आशंका है कि आने वाले दिनों में और भी पत्रकार बेवजह की परेशानी से बचने के लिए यह कदम उठा सकते हैं।

पुरजोर विरोध शुरू 

इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स के सोशल मीडिया सेल के राष्ट्रीय संयोजक के. विश्वदेव का कहना है कि यदि प्रशासन फेक न्यूज को लेकर चिंतित है, तो ऐसा करने वालों पर कार्रवाई की जानी चाहिए, न कि पत्रकारों पर अंकुश लगाने के प्रयास होने चाहिए। उन्होंने कहा ‘पत्रकारों से अपने वॉट्सऐप ग्रुप सरकारी सूचना विभाग से पंजीकृत कराने के आदेश से स्पष्ट होता है कि सरकार स्वतंत्र मीडिया को नियंत्रित करना चाहती है’। वहीं, पत्रकारों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले कार्यकर्ता मुदित माथुर ने जिला प्रशासन के इस आदेश को अभिव्यक्ति पर हमला करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह असंवैधानिक है और किसी भी सरकार को ऐसे आदेश जारी करने का अधिकार नहीं है।

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