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राजनाथ सिंह बोले, सरकार को इस तरह का ‘आईना’ न दिखाए मीडिया

Published At: Saturday, 05 January, 2019 Last Modified: Saturday, 05 January, 2019

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

13वें रामनाथ गोयनका एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म अवार्ड' चार जनवरी को दिल्ली में आयोजित एक समारोह में प्रदान किए गए। पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 29 पत्रकारों को इस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने पत्रकारों को ये अवॉर्ड्स दिए। इस मौके पर उन्होंने कहा कि सच्ची पत्रकारिता बहुत जरूरी है, क्योंकि यह देश को ताकत देने का काम करती है। उन्होंने इमरजेंसी के दौर में रामनाथ गोयनका के साहसिक निर्णयों की चर्चा करते हुए कहा कि पहरेदार जितना जागरूक व निडर होगा, लोकतंत्र उतना ही मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि आज खबरों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है, जो इस पेशे का अपमान है। उन्होंने कहा, ‘मीडिया को चाहिए कि वह सरकार को आईना दिखाए, लेकिन वह आईना रंगीन न हो।’

सोशल मीडिया की चर्चा करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि परंपरागत मीडिया की प्रासंगिकता हमेशा बनी रहेगी, लेकिन इसके लिए सही तथ्यों को पेश करना होगा। केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि आज अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात की जाती है। इमरजेंसी के समय में जिन लोगों द्वारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात की गई थी, उनके सवालों का भी जवाब हमें तलाशने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘मैं इस बात में विश्वास नहीं करता कि मीडिया और सरकार के बीच दोस्ती नहीं हो सकती। भले ही वे दोस्त न हों,  लेकिन उन्हें एक-दूसरे को लेकर कटुता की भावना नहीं रखनी चाहिए।’ उन्होंने कहा कि निडरता और राष्ट्रवाद के स्तंभों पर पत्रकारिता टिकी है।

सिंह ने कहा, ‘जो पत्रकारिता देश के खिलाफ है और भ्रष्टाचार के दृष्टांतों को छिपाती है, वह पत्रकारिता नहीं है।’ उन्होंने इस बात पर जोर दिया दिया कि पत्रकारिता सिर्फ लोकतंत्र का पहरुआ नहीं है, बल्कि यह बैरोमीटर भी है, जिसपर इसे मापा जाता है। उन्होंने कहा, ‘सच्ची पत्रकारिता राष्ट्र मजबूत करती है। पत्रकारिता जितनी मजबूत होती है, लोकतंत्र की चमक उतनी तेज होती है।’ उन्होंने इंगित किया कि वर्षों से यह भरोसा बना है जो लोगों और मीडिया के संबंधों को परिभाषित करता है। यह भरोसा न डिगे, इसके लिए मीडिया को चौकन्ना रहने की जरूरत है।

गृहमंत्री ने इस पर भी चर्चा की कि ‘सोशल मीडिया और फेक न्यूज के रूप में पारंपरिक मीडिया को किस प्रकार से चुनौतियां मिल रही हैं। उन्होंने कहा, ‘पारंपरिक मीडिया का महत्त्व तब तक बना रहेगा, जब तक यह अपनी विश्वसनीयता बनाए रखेगी।’ उन्होंने कहा कि अखबार या मीडिया समूहों की अपनी विचारधारा हो सकती है, लेकिन यह खबरों में नहीं दिखनी चाहिए।  सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर सिंह ने कहा कि परंपरागत मीडिया का महत्व नहीं घटेगा, चाहे नई मीडिया कितना भी आगे बढ़ जाए।

पुरस्कार समारोह के बाद ‘#MeToo इन द न्यूजरूम : व्हाट एडिटर्स कैन एंड शुड डू’ विषय पर एक पैनल डिस्कशन हुआ। पैनल में न्यूज रूम की नायक रहीं चार महिला संपादक द न्यूज मिनट की सह-संस्थापक एवं प्रधान संपादक धन्या राजेंद्रन, मुंबई मिरर की संपादक मीनल बघेल, द क्विंट की सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी ऋतु कपूर और बीबीसी वर्ल्ड सर्विस में भारतीय भाषाओं की प्रमुख रूपा झा शामिल थीं। चर्चा का संचालन द इंडियन एक्सप्रेस की डिप्टी एडिटर सीमा चिश्ती ने किया।



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