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#MeToo: TOI का सख्त एक्शन, गौतम भी गए, HR की है अपनी मुश्किलें...

Published At: Wednesday, 10 October, 2018 Last Modified: Wednesday, 10 October, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

सोशल मीडिया पर इन दिनों यौन शोषण को लेकर चल रहे मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। #MeToo कैंपेन के तहत मीडिया और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी तमाम महिलाएं अपने साथ हुए यौन शोषण के मामले उठा रही हैं। मंगलवार को भी कई महिलाएं सामने आईं और अपने साथ हुईं इस तरह की घटनाओं को साझा किया।

इस तरह के मामले आने के बीच इसका असर भी दिखने लगा है। अंग्रेजी दैनिक ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के प्रबंधन ने ऐसे ही आरोपों से घिरे हैदराबाद के सीनियर एडिटर के.आर श्रीनिवास को प्रशासनिक छुट्टी पर भेज दिया है। संस्थान की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि जब तक श्रीनिवास के खिलाफ चल रही जांच पूरी नहीं हो जाती, वह अवकाश पर रहेंगे।  

वहीं, इसी तरह के आरोपों में घिरे मुंबई में ‘डीएनए’ के एडिटर-इन-चीफ रहे गौतम अधिकारी ने ‘सेंटर फॉर अमेरिकन प्रोग्रेस’(CAP) के सीनियर फेलो के पद से इस्तीफा दे दिया है।

एडिटर्स गिल्‍ड ऑफ इंडिया (Editors Guild of India)  ने भी ऐसे मामलों की निंदा करते हुए एक बयान जारी किया है। इस बयान में मीडिया संस्थानों से ऐसे सभी मामलों की निष्पक्ष जांच करने को कहा गया है। इसके अलावा गिल्ड ने सार्वजनिक बहस में इस मुद्दे को उठाने का साहस दिखाने के लिए महिला पत्रकारों की प्रशंसा भी की है।

सिर्फ प्रिंट इंडस्ट्री ही नहीं, बल्कि एडवर्टाइजिंग एजेंसी भी पीड़ितों के समर्थन में उतर आई है। एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री से जुड़े और डेंट्सू एजिस नेटवर्क (साउथ एशिया) के चेयरमैन और सीईओ आशीष भसीन का कहना है कि यौन शोषण के मामले बर्दास्त नहीं किए जाएंगे। उनकी कंपनी ऐसे मामलों में जीरो टोलरेंस की नीति अपनाएगी।

कर्मचारियों को भेजे ई-मेल में आशीष भसीन का कहना है कि यदि उनकी कंपनी में इस तरह का कोई मामला सामने आता है तो जांच के बाद दोषी के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी और उसे तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया जाएगा। ‘DAN’ से जुड़ी IProspect  के एक कर्मचारी को पिछले संगठन में यौन दुर्व्यवहार के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है।

 एचआर की समस्या

#MeToo कैंपेन के तहत संस्थानो में यौन शोषण के मामले सामने आने के बाद इनमें नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ गया है। एक एजेंसी के हेड का कहना है कि भर्ती के समय आवेदक के बारे में तमाम तरह की जांच की जाती है, लेकिन उस दौरान यौन दुर्व्यवहार के बारे में कोई पूछताछ नहीं होती है। इसके अलावा एक मामला यह भी उठ रहा है कि सभी शिकायतें सोशल मीडिया पर साझा की जाती हैं और जिस कंपनी के कर्मचारी पर ये आरोप हैं, उससे शिकायत नहीं की जाती है।  

वहीं, एक जटिलता ये भी है, जिसके बारे में एक एजेंसी के हेड ने कहा कि यदि घटना किसी अन्य संस्थान में हुई है और अब आरोपी दूसरी जगह काम कर रहा है तो उसके खिलाफ किस तरह कार्रवाई की जाएगी।

ऐसे ही मामले में एक एजेंसी का कहना था, ‘आरोपी कर्मचारी के पिछले संस्थान से जानकारी जुटाई जा रही है कि क्या उसके खिलाफ पहले कोई कार्रवाई हुई थी। इसके अलावा, यदि पूर्व के एंप्लॉयर ने मामले की जांच के बाद आरोपी के खिलाफ उचित कार्रवाई की थी तो कानून के अनुसार एक ही अपराध में दो बार सजा नहीं हो सकती है।‘  

वरिष्ठ एचआर प्रॅफेशनल का कहना था कि वर्तमान एंप्लॉयर नैतिक आधार पर कर्मचारी को अभी भी स्पष्टीकरण जमा करने के लिए कह सकता है,  जिससे उन्हें आश्वस्त किया जा सके कि नए संस्थान को जॉइन करने से पूर्व मुद्दे को निपटा लिया गया था।

 

 

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