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अरनब के चैनल पर Times Now पर हुई टिप्पणी, एम.के आनंद ने दिया जवाब...

Published At: Wednesday, 10 January, 2018 Last Modified: Monday, 08 January, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

अंग्रेजी के दो बड़े चैनल एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं। दरअसल ये दो चैनल हैं- टाइम्स नाउ और रिपब्लिक टीवी, जिनके हेड अपने चैनल की बादशाहत को नंबर-1 बनाने की एवज में फेसबुक पर उतर आए हैं और यह तब हुआ जब रिपब्लिक टीवी ने अपने प्रतिद्वंद्वी चैनल टाइम्स नाउ का नाम सीधे तौर पर अपने चैनल पर यह कहते हुए  “Viewership Annihilation and Demolition of Times Now Complete” 5 जनवरी, 2018 को चला दिया।

हालांकि समय-समय पर दोनों चैनलों ने शीर्ष पर होने का दावा करते रहते हैं, लेकिन यह पहली बार है कि रिपब्लिक टीवी ने टाइम्स नाउ के नाम को ऑनएयर किया।

एमटीवी इंडिया में एमटीवी व एमटीवी इंडीज रेवन्यू हेड और वॉयकॉम18 के सीनियर वाइज प्रेजिडेंट मेंडर माधुरी नाटेकर ने फेसबुक पोस्ट लिखा, जो यह बताता है कि कैसे दो चैनलों के बीच की लड़ाई आक्रामक रुख अख्तियार कर रही है। उन्होंने पोस्ट में लिखा, इंग्लिश न्यूज मार्केट वास्तव में हॉट हो रहा है और ऐसा बहुत कम ही देखने को मिलता हैप्रतिस्पर्धा की दौड़ में इस हद तक सनसनीखेज व आक्रमक हेडलाइंस।


उनके इस कॉमेंट के बाद कई शख्सियतों ने इस पर अपने कॉमेंट किए। पर चौंकाने वाला कॉमेंट आया टाइम्स नेटवर्क के एमडी व सीईओ एम.के. आनंद का, जबकि रिपब्लिक टीवी की ओर सीईओ विकास खनचंदानी ने कमेंट्स व काउंटर-कमेंट्स किए।


अपने कॉमेंट में आनंद ने लिखा, ‘नंबर केवल एक संकेतक है और कुछ नहीं, फिर भी हम नंबर्स को पाने के लिए (हमेशा निष्पक्ष तरीके से) अंत तक संघर्ष करते हैं और अपने शीर्ष क्रम को बरकरार रखते हैं। हमारा मुख्य फोकस कंज्यूमर के अनुभव और ब्रैंड की खासियत पर ही रहता है। शीर्ष क्रम जिस चीज की मांग करता है, शान से हम वहां तक खुद को ले जाते हैं। युद्ध के लिए तो हमारे पास स्टार मूवीज और सीएनबीसी जैसे चैनल हैं, क्या आपने इस खतरे को देखा है?’ आनंद ने सुझाव दिया कि चैनलों को प्रतिस्पर्धा में गर्व होना चाहिए, फिर चाहे वह कितना ही उग्र हो क्यों न हो।

आनंद की इस टिप्पणी के उत्तर में खनचंदानी ने कहा, निष्पक्षता के बड़े-बड़े दावे करना कितना आसान है, जबकि वास्तविकता कई बार किताब के सभी नियमों के उलट होती है। एक साल पहले तक शीर्ष क्रम के लिए तो ये संख्याएं ही सब कुछ थीं, लेकिन अब एक संकेतक लगती है। एक बार जब आप जंग छेड़ देते हो, तब किसी को पीछे नहीं हटना चाहिए। यही इतिहास रहा है। सिर्फ इतना कि अभी तक कोई ऐसा प्रतिद्वद्वी नहीं मिला है, जो कानूनी और पुलिस पचड़ों के बावजूद कड़ी मेहनत से डटकर लड़ता और खड़ा रहता है। सच यही है कि इनमें से कोई भी हमारे विश्वास को तोड़ने या हमारे जुनून को कम करने में कामयाब नहीं हो पाया है।

आप दोनों के अंग्रेजी में किए गए मूल कॉमेंट्स को नीचे देख सकते हैं...


 

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