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अब 3 बार प्रिंट-इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में देना होगा उम्मीदवार का रिकॉर्ड: SC

Published At: Tuesday, 25 September, 2018 Last Modified: Tuesday, 25 September, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

दागी नेताओं के चुनाव लड़ने और ना लड़ने को लेकर याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। अब सभी उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से पहले तीन बार प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में अपने रिकॉर्ड की विस्तृत जानकारी देनी होगी।

वहीं कोर्ट ने दागी नेताओं के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि चार्जशीट के आधार पर जनप्रतिनिधियों पर कार्रवाई नहीं की जा सकती है। इसके अलावा राजनीति में अपराधीकरण को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार से कानून बनाने का भी आग्रह किया। इसके अतिरिक्त कुछ अहम निर्देश भी दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आम जनता को अपने नेताओं के बारे में पूरी जानकारी होना जरूरी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि हर नेता को अपने आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी चुनाव लड़ने से पहले चुनाव आयोग को देनी चाहिए। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, नामांकन भरने के बाद हर राजनीतिक दल को अपने प्रत्याशी के चुनाव क्षेत्र में तीन बार मीडिया में इश्तेहार देना होगा। यह इश्तेहार प्रिंट में और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में देना होगा। इश्तेहार उस क्षेत्र के क्षेत्रिय मीडिया में देना होगा।

इश्तेहार में बताना होगा कि उस प्रत्याशी के खिलाफ कितने आपराधिक मामले लंबित हैं। इसके अलावा सभी पार्टियों को अपने उम्मीदवारों की जानकारी अपनी वेबसाइट पर डालनी होंगी कि उनके कौन-कौन से प्रत्याशियों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं और उन पर आरोप क्या है।

बता दें कि इस याचिका की सुनवाई पांच जजों की पीठ कर रही थी। इस पीठ में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस आरएफ नरिमन, जस्टिस एम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा शामिल हैं।  

गौरतलब है कि इस मामले में अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। पिछली सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अपनी दलील में कहा था कि ज्यादातर मामलों में आरोपी नेता बरी हो जाते हैं,इसलिए सदस्यता रद्द करने जैसा कोई आदेश न दिया जाए। दरअसल,इस याचिका में मांग की गई थी कि अगर किसी व्यक्ति को गंभीर अपराधों में 5 साल से ज्यादा सजा हो और किसी के खिलाफ आरोप तय हो जाएं तो ऐसे व्यक्ति या नेता के चुनाव लड़ने पर रोक लगाई जाए। इसके अलावा याचिका में ये मांग भी की गई है कि अगर किसी सासंद या विधायक पर आरोप तय हो जाते हैं तो उनकी सदस्यता रद्द होनी चाहिए।

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