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हिंदी दिवस पर विशेष: कब तक हिंदी से 'कमाने' वाले दबाते रहेंगे अंग्रेजी के पांव...

Published At: Friday, 14 September, 2018 Last Modified: Friday, 14 September, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

स्वतंत्रता के इतने दिनों के बाद भी हिंदी को वो दर्जा नहीं मिल पाया है जो उसे देश की सबसे बड़ी, सार्थक और ताकतवर भाषा के रूप में मिलना चाहिए। आज भी हिंदी या तो अंग्रेजी के अधीन है या फिर उसकी सहायिका। हमारे देश के नीति नियंता हमेशा ही हिंदी का सम्मान करने और उसका समर्थन करने की बात करते आ रहे हैं लेकिन उनके प्रयास से हिंदी को वो मुकाम नहीं मिल पाया है जिसकी वो असली हकदार है। इतना ही नहीं राजस्व अर्जन का मामला हो या फिर रोटी देने का, हिंदी ने अधिकांश को सहारा ही नहीं बल्कि पालने का भी काम किया है, फिर भी हिंदी खुद आज तक उपेक्षित रही है।

हिंदी फिल्म उद्योग की बात करें या फिर हिंदी पत्रकारिता पर आधारित मीडिया उद्योग की, सभी क्षेत्र हिंदी के सहारे ही फल-फूल रहे हैं लेकिन आज तक हिंदी देश में राज-काज की भाषा बनी रही, आज तक राष्ट्रभाषा नहीं बन पाई है। हिंदी पत्रकारिता को ही लें, चाहे वह प्रिंट मीडिया हो या फिर इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल मीडिया ही क्यों न हो, सभी की रोजी रोटी हिंदी पर ही आधारित है। मीडिया का इतना सबल माध्यम होने के बाद भी हिंदी निर्बल ही खड़ी है, मेरा तात्पर्य यहां देश में हिंदी के संवैधानिक और आधिकारिक अधिकार से है, क्योंकि स्वतंत्रता के इतने दिनों बाद भी हिंदी राजभाषा बनकर एक‘सहायिका’ बनी हुई है, उसे अभी तक राष्ट्रभाषा के रूप में मान्यता नहीं मिली है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तो राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हिंदी को नई पहचान और सम्मान दिलाने की पहल की। लेकिन अभी देखना बाकी है कि हिंदी के प्रति समर्पित दिखने वाली सरकार अपने बचे कार्यकाल में क्या हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिला पाती है या नहीं। अगर इसी हिंदी दिवस पर यह सरकार हिंदी के हक में कुछ बड़ा फैसला करे तो इस बार का हिंदी दिवस सफल हो जाए।

हिंदी दिवस के इस मौके पर समाचार4मीडिया ने मीडिया में हिंदी की भूमिका को लेकर उसके उत्थान और पतन, हिंदी के उत्कर्ष के प्रयास से हिंदी को गर्त में ढकेलने की कोशिश तक पर अलग-अलग आलेख प्रस्तुत कर अपना एक अनूठा प्रयास किया है। इस प्रयास का उद्देश्य अपने पाठकों को मीडिया में हिंदी की भूमिका से संबंधित आलेख एक जगह उपलब्ध कराना है।

  

 

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क्या इंडिया टीवी के चेयरमैन रजत शर्मा का क्रिकेट की दुनिया में जाना सही है?

हां, उम्मीद है कि वे वहां भी उल्लेखनीय कार्य कर सुधार करेंगे

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