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सोनिया सिंह ने कहा, एनडीटीवी को नहीं मिल रहे ऑफिशियल ऐड…

Published At: Thursday, 21 December, 2017 Last Modified: Wednesday, 20 December, 2017

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

एनडीटीवी से हाल ही में बड़ी छंटनी होने वाली है, करीब 25 प्रतिशत स्टाफ में कटौती होनी है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की बातें कही जा रही है, ऐसे में एनडीटीवी की एडिटोरियल डायरेक्टर और सीनियर एंकर सोनिया सिंह ने एक पत्रकार के ट्वीट पर जवाब देते हुए उलटा एक सवाल दाग दिया, जिसका सीधा सा मतलब था कि एनडीटीवी को अब सरकारी ऐड नहीं मिल रहे। दिलचस्प बात है कि एनडीटीवी की पूर्व मैनेजिंग एडिटर बरखा दत्त ने भी पॉयनियर के उसी पत्रकार के सुर में सुर मिलाया।

दरअसल पॉयनियर में स्पेशल कॉरेस्पॉन्डेंट जे गोपीकृष्णन को जैसे ही एनडीटीवी से मास छंटनी की खबर मिली तो एक ट्वीट किया और वो ट्वीट एक तरह से एनडीटीवी किस्म की पत्रकारिता पर एक बड़ा सवाल तो था ही, उन लोगों पर भी सवाल था, जो अपनी अपनी विचारधाराओं के पत्रकारों के हक में आवाज उठाने प्रेस क्लब पर जमा हो जाते हैं।

जे. गोपीकृष्णन का ट्वीट था, ‘NDTV informs Stock Exchange of terminating 25% of staffers...anybody assembling in Press Clubs to protest?’। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सोनिया सिंह ने भी एक ट्वीट के जरिए उलटा सवाल दागते हुए सरकार को निशाने पर ले लिया।

सोनिया सिंह ने इस ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा कि, कि जमा तो होना चाहिए प्रेस क्लब पर लेकिन ये सवाल उठाने के लिए कि एनडीटीवी को कोई ऑफिशियल ऐड क्यों नहीं मिल रहा? उनका ट्वीट था, ‘Yes they should actually to ask why NDTV isnt getting any 'official' ads. Speaking truth to power has its financial costs & we're paying it’


इस ट्वीट के बाद ट्विटरत्तियों ने सोनिया सिंह की जमकर क्लास ट्विटर पर लगानी शुरू कर दी। हालांकि सोनिया ने एक दो लोगों को जवाब देने की कोशिश की, लेकिन फिर ट्रॉल होने के चलते खामोश रहने में ही भलाई समझी। इसमें एक और दिलचस्प बात ये थी कि जे. गोपीकृष्णन के सुर मे सुर मिलाया एनडीटीवी की पूर्व मैनेजिंग एडिटर बरखा दत्त ने भी।

बरखा ने गोपी के ट्वीट के जवाब में लिखा


यानी एक तरह से बरखा भी उन एनडीटीवी कर्मचारियों के पक्ष में हैं, जिनकी छंटनी की गई है। लेकिन ना बरखा ने और ना सोनिया ने एक दूसरे के ट्वीट के बारे में कुछ भी नहीं लिखा। लेकिन इतना जरूर इस ट्विटर वॉर से तय हो गया है कि एनडीटीवी ने बड़ी छंटनी हो रही है, दूसरे सरकारी ऐड या तो बंद हुए हैं या फिर बड़ी कटौती हुई है। ऐसे में अगर एनडीटीवी ऑफिशियली इस बात का विरोध नहीं कर रहा है तो इसके पीछे भी कुछ राज है, यानी कुछ ना कुछ टेक्निकल लोचा तो है, जिसके बहाने सरकार ने ऐसी ऐड कटौती की है, जिसका विरोध भी ऑफिशियली करना आसान नहीं।

 

 

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