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Bday Spl : आखिर क्यों पत्रकारों की 'ताई' हैं सुमित्रा महाजन

Thursday, 12 April, 2018

प्रकाश हिन्दुस्तानी

वरिष्ठ पत्रकार ।।

आज लोकसभा की स्पीकर सुमित्रा महाजन का जन्मदिन है। पत्रकार के रूप में मैं उनसे दो दशक से भी अधिक समय से सतत संपर्क में हूं। मुझे जैसे अनेक पत्रकारों का सुमित्रा महाजन से निरंतर सम्पर्क बना हुआ है, वे पत्रकारों को पूरा सम्मान तो देती ही हैं, मौका आने पर उन्हें मीठा उलाहना और झिड़की देने से भी नहीं चूकतीं। कभी कोई उनके बारे में अपुष्ट समाचार, गुटबाजी, ईमानदारी पर संशय, निष्क्रियता की खबर दे तो वे उसका नोटिस लेती हैं और अपनी बात दमदारी से रखती हैं। 

सुमित्रा महाजन लोकसभा की माननीय स्पीकर हैं, लेकिन अपने संसदीय क्षेत्र और पत्रकारों के बीच वे ताई हैं। वे मूलत: मराठीभाषी हैं और मराठी में ताई बड़ी बहन को कहा जाता है। ताई के निवास पर कई बार आपको ऐसे पत्रकार नज़र आएंगे जो ताई के पास कोई अपना छोटा सा काम लेकर आए होंगे, ताई उन सभी को संतुष्ट करके ही रवाना करती हैं। कई बार वे पत्रकारों को डांटती भी हैं कि ग़लत या अनुचित काम की अपेक्षा से ना आये। उनका तरीका इतना अच्छा होता है कि काम न होने के बावजूद आगंतुक संतुष्ट होकर जाता है। 

सप्ताह में दो दिन संसदीय क्षेत्र को 

सुमित्रा महाजन आम तौर पर लोकसभा सत्र के दौरान सप्ताहांत में शुक्रवार की शाम को इंदौर आ जाती है और पूरे 2 दिन अपने परिवार और अपने चुनाव क्षेत्र को देती हैं। अपने संसदीय क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को निपटाने के लिए उन्होंने मीडिया से जुड़े दो लोगों को नियुक्त कर रखा है, जिन्हें  मीडिया के बारे में अंदर तक जानकारी है। वे पत्रकारों से मिलने में कभी संकोच नहीं करती, हमेशा उन्हें समय देती हैं और सिर्फ़  मुद्दे की बात करती  हैं। 

सुमित्रा महाजन 75 वर्ष की हैं। उनसे मिलने वाले पत्रकार आम तौर पर कम उम्र के होते हैं। वे सभी से मिलती अवश्य हैं पर कैमरे के सामने बाइट देनी हो तो संकोच करती हैं और कभी भी विवादास्पद बात नहीं करतीं। लाइव शो में आने से हमेशा परहेज करती हैं। पत्रकारों की शिकायत यह है कि वे डांटती बहुत हैं। जरा गलती हुई, या वक्त पर नहीं पहुंचे तो डांट तय है। 

दाल बाफला पार्टी और भाई दूज मिलन 

सुमित्रा महाजन 1989 में पहली बार लोकसभा चुनाव जीतकर दिल्ली गई थी, तब से वह लगातार पत्रकारों के संपर्क में अधिक है। उन्होंने  दिल्ली में इंदौर और आसपास के पत्रकारों के लिए एक वार्षिक कार्यक्रम शुरू किया, जिसमें उन्हें  मालवा के व्यंजन खिलाए जाते थे। उनकी यह दाल बाफले की पार्टी काफी लोकप्रिय हुई। कुछ समय बाद उन्होंने इंदौर में अपने निवास पर भाई दूज का त्यौहार मनाना शुरू किया। पहले इसमें गिने चुने पत्रकार ही जाते थे, पर अब यह इंदौर में एक वार्षिक मीडिया इवेंट बन गया है। हर वर्ष पत्रकारों को अपने घर पर भोजन के लिए आमंत्रित करती हैं और उन्हें महाराष्ट्रीयन व्यंजन खुद परोसती हैं। पूरा दिन पत्रकारों से मिलती हैं, लेकिन मुलाकात केवल निजी बातों तक सीमित होती है।

सुमित्रा महाजन स्पीकर हैं, लेकिन लोकसभा में। बाहर तो वे पत्रकारों की ताई यानी बड़ी बहन हैं। उनकी खुद की पार्टी के लोगविपक्ष के नेतासामाजिक कार्यकर्ता और अधिकारी भी उन्हें ताई कहते हैं। उनका व्यवहार भी ताई जैसा ही है। बड़ी बहन की तरह शालीन! अपनत्व से भरा।


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