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मीडिया न तो बिकती है, न ही कोई खरीद सकता है, बोले वरिष्ठ पत्रकार एन.के. सिंह

Published At: Wednesday, 17 October, 2018 Last Modified: Wednesday, 17 October, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

भारत में न तो मीडिया बिकती है और न तो कोई खरीदने की क्षमता रखता है। मीडिया पर उंगली उठाने वाले समाज को अपना आंकलन भी करना चाहिए। यूपी के गोरखपुर में एक कार्यक्रम के दौरान ये कहा ब्रॉडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन के पूर्व महासचिव व वरिष्ठ पत्रकार एन.के. सिंह ने। 

उन्होंने कहा कि भारतीय मीडिया का वर्तमान स्वरूप अत्यन्त सशक्त और जवाबदेह है। अनेक दोषों के बावजूद भारत की मीडिया दुनिया में अपनी प्रतिष्ठा बनाए हुए है। भारतीय मीडिया के वर्तमान स्वरूप से ही स्पष्ट है कि उसका भविष्य उज्ज्वल है। समाज सच को सच कहना सीखे।मीडिया सच बोलने, दिखाने और सुनाने के लिए मजबूर होगी।

गोरखपुर के जंगल धूसड़ स्थित महाराणा प्रताप महाविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा दो दिवसीय संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें वरिष्ठ पत्रकार एन.के. सिंह बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। पहले दिन 15 अक्टूबर को 'मीडिया और समाज' विषय पर चर्चा हुई, जबकि दूसरे दिन 16 अक्टूबर को ‘भारतीय मीडिया : वर्तमान और भविष्य' पर चर्चा की गई। ये सारी बातें एन.के. सिंह इसी दो दिवसीय कार्यक्रम में कहीं।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि ऐसा समाज जो मूल्य आधारित जीवन की संस्थाओं का गला घोंट रहा हो, भ्रष्टाचार को महिमा-मंडित कर रहा हो, उस समाज में मीडिया की अपनी सीमाएं हैं। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार देश और समाज की मूल समस्या है। भ्रष्टाचार मुक्त नैतिक समाज की मीडिया स्वत: नैतिक और जवाबदेह हो जाएगी। 

सिंह ने आगे कहा कि भारत की मीडिया समाज और सरकार से अलग नहीं है। भारत की मीडिया उस लोकतंत्रात्मक व्यवस्था में काम करती है, जहां बहुमत की सरकार है। आज देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती मीडिया नहीं, स्वस्थ्य समाज की स्थापना है। मां के गोद की वह पाठशाला जीवित करनी होगी, जहां जीवन मूल्य सिखाए जाते हैं।


उन्होंने कहा कि हर युग में शिक्षा और पत्रकारिता अपरिहार्य रही है, और हर युग में अपरिहार्य रहेगी। पत्रकारिता का स्वरूप बदलेगा। मीडिया तकनीक के आधार पर अपने नए-नए रूप में उपस्थित होगी। भारतीय मीडिया को भी अपना मूल्यांकन करते रहना होगा। उसे समाज हित में अपनी भूमिका अद्यतन करते रहना होगा। सरकार पर सामाजिक सत्ता के नियन्त्रण का उसे साधन बनना होगा।

व्याख्यान के मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार मृत्युंजय कुमार ने कहा कि मीडिया का क्षेत्र बहुत व्यापक हुआ है। प्रिंट मीडिया के बाद इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और अब सोशल मीडिया ने अपने प्रभाव में हर व्यक्ति को ले लिया है। मोबाइल पर आ चुकी मीडिया अब हर हाथ में उपलब्ध है। ऐसे में मीडिया की जितनी महत्वपूर्ण भूमिका है, उतने ही खतरे भी हैं। खतरों से सावधान जवाबदेह मीडिया का ही भविष्य है, लेकिन यह तय होना चाहिए कि मीडिया की जवाबदेही कहां तय होगी और कौन तय करेगा।  उन्होंने आगे कहा कि समाज मीडिया को प्रभावित करता है और मीडिया से समाज प्रभावित होता है। इसलिए मीडिया को देश और समाज के प्रति उत्तरदायी होना होगा, यानी मीडिया की जवाबदेही स्वयं मीडिया को ही तय करनी होगी। ऐसी मीडिया का भविष्य तो बेहतर ही है। 

कार्यक्रम के दौरान, प्रतिष्ठित साहित्यकार प्रो. रामदेव शुक्ल ने कहा कि हमारा समाज टेलिविजन का गुलाम हो चुका है। मीडिया में अधिकांश समस्याएं इलेक्ट्रॉनिक चैनलों के कारण आई हैं। प्रिंट मीडिया आज भी जवाबदेह है। 



पोल

पुलवामा में आतंकी हमले के बाद हुई मीडिया रिपोर्टिंग को लेकर क्या है आपका मानना?

कुछ मीडिया संस्थानों ने मनमानी रिपोर्टिंग कर बेवजह तनाव फैलाने का काम किया

ऐसे माहौल में मीडिया की इस तरह की प्रतिक्रिया स्वाभाविक है और यह गलत नहीं है

भारतीय मीडिया ने समझदारी का परिचय दिया और इसकी रिपोर्टिंग एकदम संतुलित थी

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