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कैसा होगा पत्रकारिता का भविष्य, बताया वरिष्ठ पत्रकार अखिलेश शर्मा ने...

Published At: Tuesday, 20 February, 2018 Last Modified: Tuesday, 20 February, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

आने वाले वर्षों में पत्रकारिता का स्वरूप न सिर्फ बदल जाएगा, बल्कि यह बड़े पैमाने पर रोजगार और स्वरोजगार उत्पन्न करने का जरिया भी बन जाएगी। अगले पांच वर्षों में ही पूरे मीडिया और मनोरंजन उद्योग का आकार दोगुना होने की संभावना है और डिजिटल मीडिया पत्रकारिता की तस्वीर को पूरी तरह से बदल देगा। यह कहना है एनडीटीवी के राजनीतिक संपादक अखिलेश शर्मा का। उन्होंने यह बात देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर के पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्ययनशाला की ओर से भारत में पत्रकारिता का भविष्य़ पर आयोजित संगोष्ठी में कही।

इस संगोष्ठी में वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव, मुकेश कुमार, आजतक के एंकर सईद अंसारी ने हिस्सा लिया। विभागाध्यक्ष डॉक्टर जयंत सोनवलकर ने इस मौके पर सभी अतिथियों का स्वागत किया।

अखिलेश शर्मा ने बेहद प्रभावशाली पॉवर पाइंट प्रजेंटेशन के जरिए आने वाले वर्षों में पत्रकारिता के बदलते स्वरूप की तस्वीर श्रोताओं के समक्ष रखीं। शर्मा ने कहा कि देश के दो हिस्से हैं- एक इंडिया दूसरा भारत। इंडिया यानी वह जो शहरों में बसता है और भारत वह जो गांवों में बसता है। मीडिया का फोकस अब इंडिया से भारत की ओर जा रहा है क्योंकि मीडिया को अब अपने पाठक या दर्शक गांवों से ज्यादा मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब पत्रकारिता अंग्रेजी बोलने वाले बड़े शहरों से हिन्दी तथा अन्य भारतीय भाषाओं के मंझौले, छोटे तथा गांवों की ओर मुड़ रही है। उन्होंने आंकड़ों के जरिए बताया कि देश के टीवी समाचार चैनलों में सिर्फ एक फीसदी दर्शक अंग्रेजी चैनलों के हैं और बाकी हिन्दी व अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के।

उन्होंने डिजिटल माध्यम की बढ़ती ताकत की ओर ध्यान दिलाया और कहा कि हाथ में पकड़ा हुआ स्मार्टफोन सशक्तिकरण का बहुत बड़ा माध्यम बन रहा है। उन्होंने कहा कि आज सस्ते स्मार्टफोन और इंटरनेट की बढ़ती पहुंच के कारण डिजिटल मीडियम भी शहरों की ही तरह गांवों में लोकप्रिय हो रहा है। भविष्य में पत्रकारिता में सबसे ज्यादा प्रयोग हिन्दी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं का होगा। उन्होंने कहा कि आने वाले वक्त में विडियो सबसे ज्यादा प्रभावी माध्यम रहेगा और इससे जुड़े कंटेट को लेकर भारत में अपार संभावनायें हैं।

हालांकि संगोष्ठी में प्रश्नोत्तर के दौरान वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव इससे सहमत नजर नहीं आए। उनका कहना था कि चाहे आने वाले दो दशकों में हिन्दी और क्षेत्रीय भाषाओं का बोलबाला हो, लेकिन उसके बाद यह कह पाना मुश्किल है कि आने वाली पीढियां शुद्ध हिन्दी बोल भी पाएंगी या नहीं। उन्होंने कहा कि भाषा की शुद्धता बनी रहना चाहिए। हिन्दी की लोकप्रियता अंग्रेजी के मुकाबले कम है। उन्होंने कहा कि आज से पचास साल बाद बच्चे अंग्रेजी भाषा को अपनी पहली भाषा के रूप में प्रयोग करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर आज पत्रकारिता का ध्यान शहरों से हट कर गांवों की ओर जा रहा है तो वो इसलिए क्योंकि वहां का बाजार बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल माध्यम वाकई किसी पत्रकार को आर्थिक मजबूती दे पाएगा या नहीं, यह भी विचारणीय प्रश्न है।

वरिष्ठ पत्रकार और लेखक मुकेश कुमार ने भी पॉवर पॉइंट प्रजेंटेशन के माध्यम से पत्रकारिता के समक्ष मौजूद चुनौतियों का खाका खींचा। उन्होंने कहा कि पेड न्यूज और फेक न्यूज पत्रकारिता के समक्ष मौजूद दो सबसे बड़ी चुनौतियां हैं। उन्होंने यह बताया कि किस तरह से बाजार की ताकतें अपने हिसाब से मीडिया को झुका और मोड़ रही हैं। उन्होंने मौजूदा वक्त में पत्रकारिता की दयनीय स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि राजनीति ताकतें इसका अपनी स्वार्थपूर्ति के लिए इस्तेमाल कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बाजार की शक्ति के चलते दलित, शोषित व वंचित वर्ग की आवाज़ों को कुचला जा रहा है। वो मानते हैं कि डिजीटल माध्यम को भी इसी अंदाज में तोड़ा-मरोड़ा जा सकता है और इससे लोकतंत्र को पैदा होने वाले खतरे की भी चर्चा होनी चाहिए।

वहीं आजतक के एंकर सईद अंसारी विडियो कांफ्रेंस के माध्यम से संगोष्ठी में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि आज खबरों को पेश करने का तरीका बदल गया है। अब न्यूज नहीं व्यूज होते हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया ने हर व्यक्ति को पत्रकार बना दिया है लेकिन खबरों की विश्वसनीयता पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह भी लगा है। उन्होंने कहा कि पत्रकार वह होता है जो निष्पक्ष बात करे। अगर उसकी बात में पक्ष आ जाता है तो वह पत्रकार नहीं रहता, एक्टिविस्ट बन जाता है।

विभागाध्यक्ष डॉक्टर जयंत सोनवलकर ने कहा कि आने वाले पचास वर्षों में पत्रकारिता का स्वरूप कैसा होगा इस पर विस्तार से अध्ययन व चर्चा करने की आवश्यकता है। उन्होंने उपस्थित सभी वरिष्ठ पत्रकारों का स्वागत किया तथा यह उम्मीद जताई कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को काफी कुछ सीखने को मिलेगा। संगोष्ठी के अंत में प्रश्नोत्तर हुए जिसमें पत्रकारिता के छात्रों ने वर्तमान तथा भविष्य से जुड़े कई प्रश्नों को मजबूती से उठाया। पत्रकारिता के छात्रों में भविष्य में रोजगार के अवसरों तथा पत्रकारिता के मौजूदा विकृत स्वरूप को लेकर चिंता साफ झलक रही थी।

 

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