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रिक्रूटमेंट करने पहुंचे अजीत अंजुम, बोले-मीडिया को खारिज करना आसान, पर विकल्प देना कठिन...

Published At: Tuesday, 04 December, 2018 Last Modified: Tuesday, 04 December, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के विद्यार्थियों को वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम और विनोद कापड़ी से सीधा संवाद कर पत्रकारिता की बारीकियां सीखने का मौका मिला। दोनों पत्रकार यहां पर कैंपस सलेक्शन के लिए आए थे।

विश्वविद्यालय में आयोजित 'एक संवाद' कार्यक्रम में अजीत अंजुम ने कहा, ‘आज मीडिया का विस्तार बहुत अधिक हो गया है। सूचनाओं के स्रोत बढ़ गए हैं। कई बार ऐसा होता है कि रिपोर्टर ने जो समाचार दिया है, वह संपादक के पास पहले ही विभिन्न माध्यमों (फेसबुक, ट्विटर, वॉट्सऐप) से आ जाता है। यह मल्टी-मीडिया, मल्टी-टास्किंग और मल्टी-प्लेटफार्म का समय है।’


उन्होंने कहा,‘हम सब यह मानते हैं कि आज टीवी मीडिया में जो हो रहा है, वह सब कुछ ठीक नहीं है। आज मीडिया में एक प्रकार का ध्रुवीकरण दिखाई देता है। एक ध्रुव की मीडिया को जो सही दिखता है, वह दूसरे ध्रुव की मीडिया को गलत दिखाई देता है। सच क्या है और झूठ क्या, दर्शक के लिए यह समझना मुश्किल हो गया है। सूचना स्रोत और तकनीक बढ़ने से फेक न्यूज की चपेट में बड़े-बड़े मीडिया संस्थान आ जाते हैं। ऐसे में तमाम प्रकार की कमियां बताकर मीडिया को खारिज कर देना बहुत आसान है, लेकिन विकल्प देना कठिन है। इस दौर में मीडिया की विश्वसनीयता को स्थापित करना बड़ी चुनौती है।‘

अजीत अंजुम ने छात्रों से कहा, ‘यह कहना ठीक है कि आज मीडिया से गांव, किसान और युवा गायब हो गए हैं, लेकिन यह भी तो हमें ही सोचना होगा कि इन्हें मीडिया में कैसे लेकर आएं? मीडिया में आलोचना के लिए जगह होना जरूरी है। सही को सही और गलत को गलत कहना ही पत्रकारिता है। एक पत्रकार को देश और समाज के हित को ध्यान में रखना चाहिए।‘

हिंदी समाचार चैनल ‘टीवी-9’ के संपादक एवं फिल्म निर्देशक विनोद कापड़ी ने कहा, ‘हमने यह मान लिया है कि टेलीविजन न्यूज में आज जो हो रहा है, उससे लोग खुश नहीं हैं। आज हमारे सामने चुनौती है कि नया क्या किया जाए? उन्होंने पत्रकारिता के विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे नए विचार पर काम करें और अपनी नई सोच के साथ मीडिया में आएं।’ उल्लेखनीय है कि कापड़ी की फिल्म ‘पीहू’ हाल ही में रिलीज हुई है।

वहीं, विश्वविद्यालय के कुलपति जगदीश उपासने ने कहा कि मीडिया में पहले भी चुनौतियां थीं और आज संसाधन, तकनीक और मीडिया के प्रकार बढ़ने के बाद भी चुनौतियां हैं। दरअसल, चुनौतियों का नाम ही पत्रकारिता है। उन्होंने कहा कि जिसके पास आइडिया है और जो हटकर सोचता है,  वही मीडिया में आगे जाएगा। उन्होंने कहा, ‘पत्रकारिता कला भी है और विज्ञान भी। जिस प्रकार एक वैज्ञानिक सत्य की खोज करता है, उसी प्रकार पत्रकार भी सत्य की खोज करता है। सत्य की खोज करना विज्ञान है और उस सत्य को जनता को बताना कला है।‘ कार्यक्रम में कुलाधिसचिव लाजपत आहूजा ने धन्यवाद ज्ञापित किया और कुलसचिव प्रो. संजय द्विवेदी ने अतिथियों का स्वागत कर कार्यक्रम की रूपरेखा बताई।

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