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तो इस वजह से स्मृति ईरानी का हुआ डिमोशन, कर्नल को मिली कमान...

Tuesday, 15 May, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार रात अपनी कैबिनेट में फेरबदल कई अहम बदलाव किए। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी निभा रहीं स्मृति ईरानी को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से मुक्त कर दिया गया। अब वे सिर्फ कपड़ा मंत्रालय का कार्यभार संभालेंगी। अब उनके स्थान पर कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ को सूचना प्रसारण मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया है। अभी तक राठौड़ सूचना-प्रसारण राज्य मंत्री थे। राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि राज्य मंत्री राठौड़ को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया है। सूत्रों के अनुसार आगामी राजस्थान चुनावों को देखते हुए भी सरकार ने राठौड़ का कद बढ़ाया है।

 

स्मृति ईरानी का पोर्टफोलियो पहले के मुकाबले अब काफी हल्का हो गया है। स्मृति ईरानी से सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय वापस लेना एक बड़ा फैसला माना जा रहा है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का पूरा जिम्मा उन्हें सितंबर 2017 में मिला था। उनका कार्यकाल हमेशा विवादों से घिरा रहा है। शायद यही वजह है कि दूसरी बार उनसे कोई प्रमुख मंत्रालय वापस लिया गया है। पहले वो मानव संसाधन मंत्री के रूप में भी काम कर चुकी हैं और तब उनसे विश्वविद्यालयों में प्रदर्शन की वजह से यह मंत्रालय छिना गया था।

 

अब माना जा रहा है कि राष्ट्रपति और पीएमओ की नाराजगी की वजह से यह मंत्रालय उनके हाथ से गया है. क्योंकि उनके कार्यकाल में कई ऐसे बड़े विवादों ने जन्म लिया, जो नाराजगी की वजह बना।

 

स्मृती ईरानी के कार्यकाल में विवाद-

 

1. विवादों की शरुआत सूचना प्रसारण मंत्रालय के उस आदेश से हुई, जिसमें चुनाव से ठीक पहले 40 इन्फॉर्मेशन सर्विस ऑफिसर्स के तबादले की बात कही गई थी। अधिकारियों के तबादले से कैडर में नाराजागी उत्पन्न हो गई और इसकी शिकायत भी प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंची।


2.   ईरानी ने प्रसार भारती के अध्यक्ष से कुछ नियुक्तियों को लेकर हुए विवाद के बाद बतौर सूचना-प्रसारण मंत्री इस स्वायत्तशासी संस्था के फंड पर रोक लगा दी थी। साथ वेबसाइटों के लिए नियमावली बनाने को लेकर भी वह विवादों में रहीं।


3.    इसके बाद उनके एक आदेश को लेकर काफी विवाद हुआ। आदेश में कहा गया कि गलत जानकारी देने पर पत्रकारों की मान्यता रद्द कर दी जाएगी। हालांकि पीएमओ के हस्तक्षेप के बाद इस आदेश को कैंसल कर दिया गया।

 

4.    पिछले एक हफ्ते में मंत्रालय को दो और विवादों का सामना करना पड़ा। एक विवाद राष्ट्रीय फिल्म अवॉर्ड्स में 70 विजेताओं के बहिष्कार से जुड़ा था, जिसमें राष्ट्रपति भवन की फजीहत हुई थी, जिसके बाद यह मामला पीएमओ तक गया। तब सूचना प्रसारण मंत्रालय पर यह आरोप लगा कि उसने राष्ट्रपति को कार्यक्रम के बारे में सही जानकारी नहीं दी। अवॉर्ड पाने वाले कई लोगों ने विरोध किया, क्योंकि राष्ट्रपति सिर्फ 16 लोगों को ही अवॉर्ड देने वाले थे। इसके बाद राष्ट्रपति भवन के प्रवक्ता की तरफ से जानकारी आई कि उसने मंत्रालय को दो हफ्ते पहले ही जानकारी दे दी थी कि राष्ट्रपति सिर्फ 1 घंटे के लिए ही कार्यक्रम में रहेंगे।

 

5.    वहीं इस हफ्ते दूसरा विवाद एशिया मीडिया समिट के दौरान हुआ, जब कुछ इंटरनैशनल गेस्ट के लिए सही इंतजाम नहीं करने की बात सामने आई।

 

वहीं मानव संसाधन मंत्री रहते हुए कई ऐसे बड़े वाकये हुए जिस पर स्मृति ईरानी की टिप्पणी की वजह से सरकार को विवादों का सामना करना पड़ा। यहां देखें विवादों की लिस्ट-

 

1-    कई विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को हटाए जाने का निर्णय


2-    रोहित वेमुला आत्महत्या और जेएनयू विवाद

 

3- आईआईटी में संस्कृत पढ़ाए जाने का प्रस्ताव

 

4- डिग्री विवाद

 

5- केंद्रीय विद्यालयों में जर्मन की जगह संस्कृत को ऑप्शनल सब्जेक्ट बनाने का विवाद

 

6- आईआईटी के डायरेक्टर का पद छोड़ना

 

7- HRD मंत्रालय के अधिकारियों का अपने होम कॉडर वापस लौटना

 

8- न्यूक्लियर साइंटिस्ट अनिल काकोदकर का स्मृति ईरानी पर आरोप लगाकर पद छोड़ना

 

 

गौरतलब है कि मई 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल का ये पांचवां फेरबदल है। इससे पहले नवंबर 2014, जुलाई 2016, सितंबर 2017 में कुछ नए मंत्रियों को कैबिनेट में शामिल किया गया था और कुछ के मंत्रालय बदले गए थे। इसके अलावा जुलाई 2017 में भी मंत्रिमंडल में बदलाव हुआ था।





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