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200 पत्रकारों पर सरकार की तिरछी नजर, जा सकती है मान्यता...

Published At: Thursday, 09 August, 2018 Last Modified: Thursday, 09 August, 2018

पूरे देश को हिला कर रख देने वाले मुजफ्फरपुर रेप केस में अखबार मालिक ब्रजेश ठाकुर का नाम आने के बाद से सरकार और अधिक सतर्क हो गई है। इसी मद्देनजर अब सरकार बड़े पैमाने पर पत्रकारों की मान्यता रद्द करने की कवायद में जुट गई है। बिहार सरकार के सूचना और जनसंपर्क विभाग 200 से अधिक पत्रकारों की मान्यता रद्द करने की तैयारी में है। फिलहाल राज्य में लगभग 600 मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं।

जी न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जुगाड़ कर मान्यता लेने वाले 200 से ज्यादा पत्रकारों की मान्यता रद्द होगी। पोर्टल और विभिन्न ऐसी पत्र-पत्रिकाओं के नाम पर ली गई है मान्यता, जो वास्तव में छपते ही नहीं हैं। इतना ही नहीं सरकार नए पत्रकारों को मान्यता देने के लिए नियमों में बदलाव कर रही है। मान्यता देने के लिए कई तरह के नए प्रावधान जोड़े जाएंगे। 

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अब पत्रकारों से मान्यता फॉर्म के साथ एफिडेविट भी लिया जाएगा। पत्रकारों के बारे में जानकारी के लिए सूचना विभाग टोल फ्री नंबर भी जारी करेगी। बदलाव के लिए विभाग हर स्तर सुझाव ले रहा है, जिन पत्रकारों की मान्यता रद्द होगी, उनकी लिस्ट बन रही है।

गौरतलब है कि मुजफ्फरपुर शेल्टर होम रेप केस के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर तीन अखबारों मुजफ्फरपुर से प्रकाशित हिंदी दैनिक अखबार‘प्रात: कमल’, पटना से प्रकाशित अंग्रेजी अखबार ‘न्यूज नेक्स्ट’ और समस्तीपुर जिला से उर्दू में प्रकाशित एक अखबार ‘हालात-ए-बिहार’ का मालिक है। उस पर इन अखबारों की कुछ प्रतियां छपवाकर उस पर बड़े-बड़े सरकारी विज्ञापन पाने में कामयाब होने का भी आरोप है।

बता दें कि ब्रजेश ने प्रात: कमल में अपना नाम विशेष संवाददाता के तौर पर रजिस्टर किया हुआ है, उसके बेटे राहुल आनंद न्यूज नेक्स्ट के संवाददाता और हलात-ए-बिहार के संवाददाता के रूप में एक शाईस्ता परवीन तथा संपादक के रूप में रामशंकर सिंह का नाम दर्शाया गया है। ब्रजेश को पीआईबी और राज्य सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (आईपीआरडी) दोनों से मान्यता प्राप्त पत्रकार का दर्जा प्राप्त था, जो कि उनके खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद उनकी मान्यता दोनों जगहों से रद्द कर दी गई।

 

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