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चैनल बंद, बाहर हुए पत्रकारों ने अपनाया मोदी का ये फंडा...

Published At: Saturday, 03 November, 2018 Last Modified: Sunday, 04 November, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

पाकिस्तान की मीडिया के अंदर इन दिनों कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान पर मीडिया संस्थानों को दबाने का आरोप लगा है। उन पर यह आरोप यहां के पत्रकारों ने लगाया है। बताया जा रहा है कि इसी दबाव के चलते एक न्यूज चैनल का संचालन ही बंद कर दिया गया है और सभी पत्रकारों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। 

लेकिन इस बीच एक ऐसा विडियो वायरल हुआ है, जिसमें निष्कासित पत्रकार मोदी की कही बातों पर अमल करते हुए दिखाई दे रहे हैं। दरअसल इमरान सरकार का ध्यान खींचने और अपना विरोध जताने के लिए कई पत्रकारों ने पाकिस्तानी संसद के बाहर पकौड़े तलने शुरू कर दिए।


गौरतलब है कि पाकिस्तान में इन दिनों आर्थिक बदहाली से जूझ रहा है। लिहाजा इमरान की सत्ता वाली सरकार इस बदहाली से निपटने के लिए तरह-तरह के पैतरे अपना रही है। इस बीच नवनिर्वाचित सरकार मीडिया संस्थानों पर भी नियंत्रण की कोशिश कर रही है, जिसके चलते पाकिस्तान के कुछ भागों में मीडिया चैनलों के प्रसारण रोक दिया गया है।


सरकार ने मीडिया घरानों को सरकारी विज्ञापनों के रूप में दी जा रही सब्सिडी पर भी रोक लगा दी है, जिसकी वजह से अब कई पत्रकारों को नौकरी से निकाला जा रहा है। इतना ही नहीं कई संस्थानों में पत्रकारों को सैलरी देर से मिल रही है। सरकारी मदद न मिलने की वजह से उर्दू न्यूज चैनल ‘वक्त न्यूज’ का ऑपरेशन हमेशा के लिए बंद कर दिया गया है और सभी पत्रकारों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इन्हीं निकाले गए पत्रकारों ने संसद भवन के सामने पकौड़े तले और उसे स्टॉल लगाकर बेचा।

वहीं पाकिस्तान की विपक्षी पार्टी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) भी पत्रकारों के समर्थन में आ गई है। पीपीपी के मुखिया बिलावल भुट्टो पत्रकारों के समर्थन में पहुंचे। उन्होंने पत्रकारों से बात की और इस मामलें का निपटारा करने का भरोसा दिलाया। इस दौरान भुट्टो ने देश में हो रहे पत्रकारों पर हमले की निंदा की।

देखें विडियो-  

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‘नेटफ्लिक्स’ और ‘हॉटस्टार’ जैसे प्लेटफॉर्म्स को रेगुलेट करने की मांग को लेकर क्या है आपका मानना?

सरकार को इस दिशा में तुरंत कदम उठाने चाहिए

इन पर अश्लील कंटेट प्रसारित करने के आरोप सही हैं

आज के दौर में ऐसे प्लेटफॉर्म्स को रेगुलेट करना बहुत मुश्किल है

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