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योगी सरकार के इस फैसले के खिलाफ वरिष्ठ पत्रकार ने दी आत्मदाह की धमकी...

Thursday, 01 February, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।


सांस्कृतिक विरासत को छेड़े बिना ही बनारस का विकास करने की बात को लेकर केंद्र की मोदी और यूपी की योगी सरकार लाख दावे करे, लेकिन वास्तविकता इससे परे हैं, क्योंकि यहां के अधिकारी प्राचीन धरोहरों को तहस-नहस करने पर अमादा हैं और इसका प्रमाण काशी विश्वनाथ मंदिर के विस्तार के लिए बनी योजना से सामने आया है, जिसको लेकर विरोध के सुर भी उठने लगे हैं। दरअसल, वरिष्ठ खेल पत्रकार पदमपति शर्मा ने आत्मदाह की धमकी दी है।


मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, काशी विश्वनाथ मंदिर के विस्तार के क्रम में 400 मीटर का कॉरिडोर बनाने और हर की पौड़ी की तरह गंगा की धारा को मंदिर तक पहुंचाने के लिए 167 भवनों का अधिग्रहण किए जाने की योजना है। इसके साकार करने के लिए विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ राजस्व विभाग की टीम ने प्रस्तावित कॉरिडोर के बीच पड़ रहे भवनों का सर्वे शुरू किया है। इस योजना पर 480 करोड़ रुपए खर्च किए जाने हैं। भवनों का सर्वे किए जाने की जानकारी मिलते ही काशी विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र के निवासियों की बीते मंगलवार को बैठक हुई, जिसमें ये ऐलान किया गया कि बाबा विश्वनाथ को गंगा दर्शन कराने के नाम पर हजारों साल की सांस्कृतिक विरासत का विध्वंस नहीं होने दिया जाएगा।


हालां इसके खिलाफ वरिष्ठ खेल पत्रकार पदमपति शर्मा ने एक फेसबुक पोस्ट लिखकर आत्मदाह की धमकी दी है। उनका फेसबुक पोस्ट सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना है, जिसमें उन्होंने योगी सरकार पर बड़ा हमला बोला। लिखा है कि जो काम बाबर और औरंगजेब नहीं कर सके वो योगी सरकार करने जा रही है। सनातन धर्म की रक्षा करने का दावा करने वाली प्रदेश सरकार एैसा फैसला कैसे कर सकती हैउनकी पूरी पोस्ट आप यहां पढ़ सकते हैं-

जो बाबर-औरंगजेब नही कर सके वो योगी सरकार करेगी!

महादेव की तरह ही अजन्मी काशी की सांस्कृतिक विरासत को मिटाने की साजिश एक बार फिर उफान पर है। देश की पहली राष्ट्रवादी सरकार का दावा करने वाली भाजपानीत एनडीए के राज मे यह सब हो रहा हैक्षोभ इसको लेकर है।

बताया जा रहा है कि विश्वनाथ मंदिर से सीधे मा गंगा का दर्शन कराने की सरकारी अधिकारियों की आठ साल पुरानी कुत्सित योजना को यूपी की योगी सरकार ने हरी झंडी दिखा दी है। विश्वास नही होता कि सनातन धर्म की रक्षक होने का दावा करने वाली प्रदेश सरकार ने यह जानते हुए कि मंदिर के आसपास की बस्ती खुद मे हजारों साल पुरानी सभ्यता समेटे हुए हैइस योजना पर आगे बढ़ना तय किया। यानी गंगा दर्शन के बहाने 450 मीटर के दायरे मे स्थित मंदिरधरोहर और हजारों साल पुराने स्मारक- मकान जमीदोज कर दिए जाएंगे। जो काम बाबर और औरंगजेब जैसे आक्राता मुगल शासक नही कर पाए वो काम हिदुत्व रक्षक होने का दावा करने वाली प्रदेश सरकार प्रधान मंत्री के इस संसदीय क्षेत्र मे करने जा रही है। मुझे सपने मे भी विश्वास नहीं था कि ऐसा होगा। मगर सोमवार 29 जनवरी को विकास प्राधिकरण के लोग सरस्वती द्वार के इस प्रहरी के घर आ धमके सर्वे के नाम पर।

उम्मीद की आखिरी किरण माननीय नरेन्द्र मोदी जी है जो अनगिनत बार कह चुके है कि काशी का विकास और उसका सुंदरीकरण उसकी विरासत को अक्षुण्ण रखते हुए ही किया जाएगा।

इसे धमकी न समझा जाययह चेतावनी है नगर के उस विधर्मी अधिकारी को कि यदि ऐसा हुआ तो पहला फावड़ा चलने के साथ ही विश्वेश्वर पहाड़ी ( लाहौरी टोला ) की चोटी पर पूर्वजों द्वारा लगभग 175 साल पहले निर्मित मकान मे रहने वाला आपका यह नाचीज प्राणोत्सर्ग करने से कतई नहीं हिचकेगा। याचना नही अब रण होगा और जिस दल की आधी सदी से भी ज्यादा समय से बिना किसी कामना के नि:स्वार्थ सेवा करने वाला यह शख्स उसी दल के इस कुकर्म के विरोध मे आत्यदाह पर विवश होगापीड़ा बस यही है।

 

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