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ड्राइविंग के दौरान इयरफोन लगाकर कैसे सिक्युरिटी की जाती है, रवीश कुमार से सीखिए...

Saturday, 05 May, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।


दो-तीन दिन पहले सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हुईजिसमें रवीश कुमार एक कार की ड्राइविंग सीट पर हैं और कान में इयरफोन लगा है। तो जैसा कि न्यूज चैनल्स वाले अक्सर नेताओं की तस्वीरें बिना हेल्मेट या सीट बेल्ट के चलाते हैंउसी तरह की कानून तोड़ने की बात  इस तस्वीर के साथ भी शेयर की जा रही थी।

तस्वीर के वायरल होने के बाद रवीश कुमार का अपने फेसबुक पेज पर इस तस्वीर के बारे में एक दिलचस्प जवाब आयाजिसमें उन्होंने इयरफोन लगाने की एक बड़ी दिलचस्प वजह बताई और ये भी कहा कि मैं इसे लगाना छोड़ूंगा नहीं।

पर इससे पहले, पढ़िए इसी साल की डेक्कन क्रॉनिकल की ये रिपोर्ट-


Hyderabad: Use earphoneswhile driving and face music


ये रिपोर्ट कहती है कि हैदराबाद पुलिस ने फरवरी महीने के केवल 13 दिनों में ही 192 लोगों को इयरफोन या हेडफोन लगाकर गाड़ी चलाने के जुर्म में पकड़ा और 6 को जेल भी भेज दिया। सजा पूरी होने के बाद उनकी काउंसलिंग होगीतब जाकर उन्हें अपनी गाड़ी मिलेगी। कहने का मतलब ये है कि अगर आप इयरफोन लगाकर ड्राइविंग करते हैंबिना हेल्मेट के बाइक चलाते हैंया सीट बेल्ट के बिना कार चलाते हैंतो कम से कम उसे जस्टीफाई करने की जरूरत नहीं है। लेकिन रवीश जी ने किया है।


रवीश कुमार अपनी सफाई में कहते हैं, अब मेरी एक तस्वीर वायरल की जा रही हैमैं इयरफोईन लगाकर रखता हूं और रखूंगा।कल रात मेरी सुरक्षा से एक समझौता हुआ। ट्रैफिक जाम में फंसा हुआ था। तभी देखा कि एक लड़का अपना चेहरा छिपा कर फोन ऊपर कर तस्वीर ले रहा है। विडियो भी बना रहा होगा। उसका चेहरा नहीं दिख रहा था। मैं सुरक्षा कारणों से इयरपीस लगा कर रखता हूं। अचानक लोग चेज़ करते रहते हैं। मेरे पास इसके अलावा कोई रास्ता नहीं है। एक पूरा गिरोह है जो मुझे लगातार चेज़ कर रहा है। कई बार कार का पीछा कर देते हैं। फोटो लेने लगते हैं। फैन का फोटो खींचना अलग होता है। मगर ये लोग चेज़ करते हैं। संदिग्ध तरीके से फोटो लेकरगाड़ी का नंबर लेने लगते हैं। अब दिमाग़ ऐसा हो गया है कि पहले अलर्ट बटन ऑन हो जाता है। कल मेरी कार जाम में रुकी हुई थी। फोन पर लगातार ट्रोल के फोन आ रहे थे।


शक हो गया कि पता नहीं यह इस सूचना का क्या करेगा। किसे बताएगा। मैं इयरपीस पर बात नहीं करता। मुझे पता है इसके ख़तरे, मगर मैं इयरपीस लगाकर रखता हूं और रखूंगा। मैं इसका कुछ नहीं कर सकता। आप क्या करेंगे जब कोई चेज़ करने लगे। आप अंत समय में तार नहीं खोजेंगे। फोन नहीं खोजेंगे।


अब सोचिए किसी बंदे को इयरफोन लगाकर ड्राइविंग करते दिल्ली पुलिस पकड़ ले तो क्या ये सारे तर्क पुलिस वाले मान लेंगेबिलकुल नहीं। ट्रॉलर्स को ब्लॉक करेंया फिर उनके खिलाफ एफआईआर करेंपुलिस एक्शन ना ले तो अपने चैनल पर उसकी बैंड बजा देंया कमिश्नर के घर के बाहर धरने पर बैठ जाएं। इतने बड़े पत्रकार की सुनवाई आखिर कैसे नहीं होगी।


गौरतलब है कि पिछले साल ‘न्यूज24’ की एंकर साक्षी जोशी से फेसबुक पर किसी ने बदतमीजी कीएफआईआर के बाद नोएडा पुलिस उसे गुजरात से घसीट कर लाई थी। ऐसे में पुलिस। की मदद ली जानी ही चाहिए।


वैसे रवीशजी फोन को खोजने की जरूरत ही वैसे क्या हैशर्ट की जेब में रखें या चार्जिंग में। शायद आपने ‘नानू की जानू’ फिल्म तो नहीं देख ली :) 


रवीश जी आगे तर्क देते हैं, ‘जो लड़का फोटो खींच रहा था वो एक प्राइवेट टैक्सी में जा रहा था और आगे की सीट पर बैठा था। मैंने कार बराबर ले जाकर हॉर्न भी बजाया कि ये कौन है क्यों फोटो खींच रहा है, तो पीछे की सीट पर बैठे उसके मां-बाप हंस रहे थे। ट्रैफिक जाम के कारण एक बार और मौका मिला तो साथ बैठे किसी को भेजा। लड़के ने कहा कि तस्वीर इसलिए ली क्योंकि हम उनके फैन हैं।’ जबकि इसी पोस्ट में वो आगे लिखते हैं, ‘इस लड़के ने मेरी सुरक्षा से भी क्रांपोमाइज किया है। अब सबको पता है कि मैं अकेले आता हूं कार चला कर।’ 


वो आगे लिखते हैं, ‘ऐसे किसी वक्त किसी पत्रकार जी ने जोश में फर्ज़ी सैलरी लिख दी। मेरी सुरक्षा को ख़तरे में डाल दिया। रवीश जी आप गूगल करिएआपकी ही नहीं सारे बड़े पत्रकारों की सैलरी पर गूगल और यूट्यूब में पैकेज बने पड़े हैंये सोशल मीडिया का दौर है तो क्या उन सबकी सिक्युरिटी भी खतरे में हैक्या वो सब भी शोर मचा रहे हैंसच ये है कि आपने नियम तो तोड़ा हैआप चाहे इसकी वजह मोदी को मानिए या बीजेपी कोउसके बाद आप वैसे ही हास्यास्पद तर्क दे रहे हैंजैसे आपके शो में सत्ताधारी नेता फंसने के बाद देते हैं।


रही बात सिक्युरिटी की तो आपकी चिंता वाकई में वाजिब हैतो पुलिस से बात करिएआपकी बात को कौन टालने वाला हैसारे ट्रॉलर्स के खिलाफ एफआईआर करवाइए। कोई कार चेज करे तो 100 नंबर पर कॉल करिए। अगर कोई सुनवाई ना हो तो तब फेसबुक पर लिखें या शो करें या धरने पर बैठें तब सभी लोगों को लगेगा भी कि आप वाकई में विक्टिमाइज्ड हैंखामखां माहौल नहीं बना रहे हैं।

 

रवीश कुमार की ये पोस्ट आप यहां पढ़ सकते हैं

 

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