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‘भाषण-ज्ञान’ पर भारी पड़ी नॉन-परफॉर्मेंस, रवीश कुमार की विदाई का समय?

Published At: Friday, 27 January, 2017 Last Modified: Friday, 21 April, 2017

समाचार4मीडिया ब्यूरो मीडिया अब एक बिजनेस मॉडल के तहत चलती है। टीवी बिजनेस की रनिंग कॉस्ट ज्यादा है, सरोकार की बात करने वाले एंकर्स भी लाखों की सैलरी पाते हैं, ऐसे में लगातार उन पर बार्क रेटिंग्स में अच्छा परफॉर्म करने का प्रेशर रहता है। पढ़ें: अरनब गोस्वामी के वेंचर REPUBLIC के नाम पर संकट के बादल सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पिछले कई महीनों से रात 9 बजे आने वाला एनडीटीवी इंडिया का प्राइम टाइम शो टीआरपी के पैमाने पर जिस बुरी तरह फेल हो रहा है, उसके बाद अब शो के एंकर रवीश कुमार की परफॉर्मेंस का विश्लेषण लगातार हो रहा है। बताया जा रहा है कि रवीश कुमार के प्राइम टाइम शो के स्पॉन्सर तक अब मार्केटिंग-सेल्स टीम को सपोर्ट देने में पीछे हटने का संकेत दे चुके हैं। ऐसे में जब ये माना जाता है कि एनडीटीवी समूह रेटिंग्स के चक्कर से दूर रहता है, उसके एंकर्स खुद ही ब्रैंड होते हैं, पर अब ब्रैंड रवीश भी अपने शो के लिए प्रीमियम स्लॉट होते हुए भी रेवेन्यु जुटाने में असफल हो गया है। पढ़ें: वरिष्ठ पत्रकार पंकज पचौरी शुरू करेंगे नया न्यूज चैनल ‘GO NEWS’ ravishसूत्रों का कहना है कि जिस तरह प्राइम टाइम के एंकर रवीश कुमार अपने शो के जरिए भाषण और ज्ञान बांट रहे हैं, पर रेटिंग्स बटोर नहीं पा रहे हैं , ऐसे में चैनल के लिए रेवेन्यू कमाने वाली टीम मार्केट में प्रीमियम स्लॉट को सेलआउट करने भी बहुत मुश्किल महसूस कर रही है, जिसके चलते रवीश कुमार का बोझ अब चैनल उठाने में इंटरेस्टेड नहीं है। हालांकि सूत्र बता रहे हैं कि  चैनल के मैनेजिंग एडिटर ऑनिंदियो चक्रवर्ती लगातार रवीश कुमार के पक्ष में दलीलें दे रहे हैं, पर रेटिंग्स के मामले में शो लगातार फेल हो रहा है। वैसे यहां ये भी गौरतलब है कि रवीश को लेकर उस समय भी संस्थान में काफी चर्चा हुई थी जब उनके भाई को बिहार चुनाव में कांग्रेस की ओर से टिकट मिला था। हालांकि उस वक्त स्थानीय स्तर पर रविश कुमार (पांडे) के भाई ब्रजेश कुमार पांडे के कांग्रेस की ओर से मैदान में उतरने के चलते रवीश बिहार के चुनावी मैदान में कुछ ही चरणों में नजर आए थे। वैसे ये भी माना जा रहा है कि लगातार जिस तरह रवीश कुमार पत्रकारिता की दुनिया और टीवीravish मीडिया को कोस रहे हैं, ऐसे में उन्होंने अब इससे परे ही जाकर अपने लिए कुछ दूसरा विकल्प तय किया हुआ होगा। वैसे भी टीवी स्क्रीन को काली-पीली करने और लगातार कई प्रयोगो के बाद भी उनके शो की रेटिग्स और उसके जुड़े रेवेन्यू पर कोई फर्क नहीं पड़ा। यहां तक कि रवीश कुमार ने खुद भी एक शो के दौरान माना था कि उसका प्रोग्राम दसवें नंबर का है। ऐसे में अब चैनल शायद उनकी नॉन-परफॉर्मेंस के चलते उनको यूपी चुनावों के बाद टाटा-बायबाय बोल सकता है। फेसबुक और ट्विटर से दूर भाग चुके रवीश कुमार अब एसएमएस और वॉट्सऐप के भी जवाब देने में सहज महसूस नहीं कर पा रहे है। हमारे संवाददाता ने उन्हें दोनों माध्यमों के जरिए संपर्क किया पर रवीश शायद आम पत्रकारों को जवाब देने में गुरेज करते हैं, ऐसे में उन्होंने हमारे सवाल का जवाब नहीं दिया। लेकिन एनडीटीवी इंडिया के मैनेजिंग एडिटर ऑनिंदियो चक्रवर्ती अभी संवाद की प्रकिया का महत्व समझते हैं, इसलिए उन्होंने हमारे एसएमएस का जवाब देते हुए लिखा कि ऐसा कुछ भी नहीं है, ऐसा झूठ फैलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ये सवाल इसलिए उठाया जा रहा है ताकि रविश कुमार की विदाई की अफवाह फैल सकें।

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