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मारवाह स्टूडियो: पूर्व राष्ट्रपति के विचार से ज्यादा अपने प्रचार को दी अहमियत

Published At: Wednesday, 19 September, 2018 Last Modified: Wednesday, 19 September, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

कार्यक्रमों की शोभा बढ़ाने के लिए जानी-मानी हस्तियों को आमंत्रित करना एक चलन बन गया है। आयोजक बखूबी जानते हैं कि ऐसा करने से उन्हें न केवल अप्रत्यक्ष मीडिया कवरेज मिलेगा, बल्कि उनके रसूख में भी कुछ न कुछ इजाफा हो जाएगा। आर्थिक, राजनीतिक मजबूरी या फिर व्यक्तिगत संबंधों के चलते अभिनेता-राजनेता इसके लिए तैयार भी हो जाते हैं। लेकिन क्या देश के सबसे बड़े संवैधानिक पद पर विराजमान रह चुके किसी व्यक्ति को ऐसे निजी कार्यक्रमों में शरीक होना चाहिए, जिसकी पब्लिसिटी में उन्हें सिर्फ पोस्टर बॉय के तौर पर प्रयोग किया जाए। वो तो तब जब कार्यक्रम का सीधे तौर पर कोई सामाजिक जुड़ाव न हो। 

अंग्रेजी अखबार 'द टाइम्स ऑफ इंडिया' के डेल्ही टाइम्स में छपी एक खबर ने पुन: इस चर्चा को जन्म दिया है। यह खबर मारवाह स्टूडियो से जुड़ी है। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी बीते दिनों नोएडा स्थित मारवाह स्टूडियो गए थे और वहां उन्होंने स्टूडेंट्स को संबोधित किया। मारवाह स्टूडियो के संस्थापक फिल्म निर्माता संदीप मारवाह हैं।  

आपको बता दें कि संदीप के बेटे की शादी में शरीक होने ही श्रीदेवी दुबई गई थीं, जहां उनका निधन हो गया था। संदीप को नोएडा फिल्म सिटी के फाउंडर के रूप में जाना जाता है। कुल मिलाकर कहा जाए तो फिल्म उद्योग में मारवाह पहचान के मोहताज नहीं हैं, उनका देश की बड़ी-बड़ी हस्तियों के साथ उठना-बैठना है और इसी के चलते उन्होंने प्रणब मुखर्जी को अपने स्टूडियो में आमंत्रित किया और वे तैयार भी हो गए।

राष्ट्रपति पद की अपनी एक गरिमा होती है और समझा जाता है कि कार्यक्रमों के चयन में उसे ध्यान में रखा जाएगा। बहरहाल यहां सवाल कार्यक्रम में शिरकत करने या न करने तक ही सीमित नहीं है। सवाल यह भी है कि आयोजकों ने देश के पूर्व राष्ट्रपति की मौजूदगी को कितनी अहमियत दी? महज आमंत्रण को ही अहमियत नहीं समझा जा सकता। प्रणब मुखर्जी ने कार्यक्रम में जो विचार रखे, उनकी भी अपनी एक अहमियत है, लेकिन शायद आयोजकों को इस ‘अहमियत’ की अहमियत समझ नहीं आई। कम से कम प्रकाशित खबर देखकर तो ऐसा ही लगता है। Delhi Times में इस तरह के इवेंट से जुड़ी खबरें अमूमन पेड होती हैं और खबर के साइज के हिसाब से उनका दाम तय होता है। ऐसे में जायज है मारवाह स्टूडियो ने भी दाम चुकाकर खबर प्रकाशित करवाई होगी और शायद इसलिए केवल उतनी ही जानकारी दी गई, जो मारवाह परिवार के इवेंट के बारे में लोगों को बताने के लिए जरूरी है। 

पूर्व राष्ट्रपति की शिरकत का अहसास दिलाने के लिए खबर में संदीप मारवाह और उनके बेटे की प्रणब मुखर्जी के साथ एक फोटो है और चंद शब्दों में यह बताया गया है कि पूर्व राष्ट्रपति ने मारवाह स्टूडियो की तारीफ में क्या कहा। यानी आयोजकों की नजर में प्रणब मुखर्जी के बोल, स्टूडेंट्स को दी उनकी सीख कोई मायने नहीं रखती। अगर ऐसा नहीं होता तो कम से कम मुखर्जी के संबोधन का कुछ हिस्सा तो खबर में शामिल किया जाता। ये कहना गलत नहीं होगा कि मरवाह परिवार ने अपने प्रचार-प्रसार को पूर्व राष्ट्रपति के विचारों से ज्यादा अहमियत दी। कवरेज में संदीप माराह और उनके दोनों बेटों की बाइट्स तो है, पर पूर्व राष्ट्रपित के बोल नदारद है। ऐसे आयोजनों में जहाँ देश के सर्वोच्च पद को सुशोभित करने वाले हस्तियां शिरकत करती हैं, आयोजकों की ज़िम्मेदारी और भी ज्यादा बढ़ जाती है। लेकिन यदि आयोजक कार्यक्रम को महज अपने तक ही सीमित करके रखे, तो सवाल उठना लाजमी हैं।       

 

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