Share this Post:
Font Size   16

एडिटर्स गिल्‍ड ऑफ इंडिया (Editors Guild of India) पर महिला मेंबर ने उठाए सवाल...

Monday, 07 May, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

एडिटर्स गिल्‍ड ऑफ इंडिया (Editors Guild of India) के पूर्व प्रेजिडेंट राज चेंगप्‍पा को लिखे एक ई-मेल में गिल्ड की महिला सदस्य मधु किश्‍वर का कहना है, 'वर्तमान में गिल्‍ड मजाक बनकर रह गया है। यहां मुझसे साधारण सदस्‍य की तरह भी पेश नहीं आया जाता है। इनमें से कई सदस्‍य तो अपने वार्षिक बकाया का भुगतान भी नहीं करते हैं। मैं गुजारिश करती हूं कि मैंने लाइफटाइम मेंबरशिप के नाम पर गिल्‍ड के पास अपनी मेहनत की कमाई के जो दस हजार रुपए जमा कराए थेवह मुझे वापस दिला दिए जाएं।'

ई-मेल में किश्‍वर का कहना है, मैं उन चुनिंदा लोगों में शामिल हूं, जिन्‍होंने एडिटर्स गिल्‍ड की लाइफटाइम मेंबरशिप ली हुई है और गिल्‍ड की मेंबरशिप लेने वाली मैं पहली महिला थी। मैं कई दशक पहले गिल्‍ड को उस समय जॉइन किया था जब गिल्‍ड में आज के समय में जो स्‍टार बने हुए हैं, वे इसकी मीटिंग्‍स से दूर रहते थे और एडिटर्स की पुरानी पीढ़ी को तिरस्‍कार की भावना से देखते थे। उस समय गिल्‍ड आज के समय जैसी सही स्थिति में नहीं था लेकिन उस समय के लोगों ने इसके मूल्‍यों को जिंदा रखा हुआ था।

इस ई-मेल में तमाम आरोप लगाते हुए किश्‍वर का कहना है कि समय के साथ उन्‍हें पूछना बंद कर दिया गया और उन्‍हें मीटिंग की सूचना तक नहीं दी जाती है। एक आर्गनाइजेशन के न्‍यूनतम रस्‍मोरिवाज का भी गिल्‍ड की ओर से पालन नहीं किया जा रहा है। किश्‍वर का कहना है कि उन्‍होंने ये दस हजार रुपए उस समय जमा कराए थे जब एमजे अकबर गिल्‍ड के प्रेजिडेंट थे, तभी से एडिटर्स गिल्‍ड के पतन की शुरुआत हो गई थी। किश्‍वर का यह भी कहना था जब उन्‍हें श्रीनगर कोर्ट की ओर से एक भी सुनवाई के बिना तीन बार गैरजमानती गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ था, तब गिल्‍ड ने इसके विरोध में एक भी शब्‍द नहीं बोला था। ऐसे में मुझे इस कागजी शेर का मेंबर बने रहने में कोई दिलचस्‍पी नहीं है जो निष्‍पक्षता का मुखौटा ओढ़ने में भी यकीन नहीं करता है। इसके बाद लिखी गई एक और मेल में मधु किश्‍वर का कहना था कि गिल्‍ड की ओर से उन्‍हें कोई जवाब नहीं मिला है लेकिन वह पीछा छोड़ने वालों में से नहीं हैं। उन्‍हें अपने सवालों के जवाब हर हाल में चाहिए और इस तरह शुतुमुर्ग की तरह जमीन में गर्दन छिपाने से वह इन सवालों का जवाब देने से बच नहीं सकते हैं।

मधु किश्‍वर के इन ई-मेल के बाद लगातार सवाल-जवाबों का दौरा शुरू हो गया है और यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है।

वहीं, किश्‍वर के मेल के जवाब में राज चेंगप्‍पा का कहना है, 'गिल्‍ड के बारे में आपका इस तरह का अनुभव रहा, इसके लिए मैं आपसे माफी मांगता हूं। मैंने कुछ समय पहले ही पद छोड़ा है। मेरी गुजारिश है कि इन मुद्दों को आप नए पदाधिकारियों के समक्ष उठाएं।' यह भी लिखा है, 'जहां तक मेरा मानना है कि लाइफटाइम मेंबरशिप का मतलब है कि जब तक मेंबर अथवा ऑर्गनाइजेशन हैं, यह खत्‍म नहीं होती है। लाइफटाइम सबस्क्रिप्‍शन के नाम पर ली गई राशि को कोई भी संस्‍था या संगठन वापस नहीं करता है। इस राशि का इस्‍तेमाल संस्‍था के कार्यों में ही होना चाहिए। मधु किश्‍वर काफी पैसे वाली (rich enough) हस्‍ती हैं और उनके लिए कुछ हजार रुपए कोई बड़ी बात नहीं हैं। खासकर उस संस्‍था के लिए, जिसके लिए उन्‍होंने लाइफटाइम मेंबरशिप ली हुई हो। यह तो और अच्‍छी बात है कि उन्‍होंने इस राशि पर ब्‍याज की मांग नहीं की है। मैं उनसे गुजारिश करता हूं कि वे इस तरह की बातें न करें।'

राज चेंगप्‍पा के इस मेल के जवाब में मधु किश्‍वर ने फिर एक मेल लिखा। इस मेल में उन्‍होंने 'rich enough'  जैसे शब्‍दों का इस्‍तेमाल न करने की बात करते हुए लिखा है कि बात पैसे की नहीं है। मैं अपनी मैगजीन 'मानुषि' में काफी पैसा लगा रही हूं, जबकि वहां से इसका उतना अपेक्षित आर्थिक परिणाम नहीं आ रहा है। यदि किसी ने मानुषि का सबस्क्रिप्‍शन लिया है और अब वह अपने पैसे वापस चाहता है तो मैं उसे वह वापस कर दूंगी। उन्‍होंने कहा कि मेरे साथ भी ऐसा हुआ था जब गिल्‍ड के मेंबर रहे हरि कुमार ने उनसे मानुषि के सबस्क्रिप्‍शन के लिए गए मात्र दो सौ रुपए मांगे थे। यह रुपए उन्‍होंने तब जमा कराए थे, जब वह जेएनयू में पढ़ते थे लेकिन जब वापस मांगे तब वह डेक्‍कन हेराल्‍ड जैसे अखबार के एडिटर बन चुके थे। ऐसा इसलिए था क्‍योंकि उन्‍हें मानुषि में लिखे कुछ आर्टिकल पसंद नहीं आए थे। हालांकि उस समय वे मुझसे भी ज्‍यादा पैसे वाले थे। लेकिन मैंने उन्‍हें तुरंत दो सौ रुपए वापस भेज दिए हालांकि वह पहले से ही करीब दो साल तक इसका सबस्क्रिप्‍शन ले चुके थे।    

उधर, एडिटर्स गिल्‍ड के कोषाध्‍यक्ष जॉन दयाल का कहना है कि उनकी नजर में प्रत्‍येक मेंबर को यह विकल्‍प मिलना चाहिए कि वह गिल्‍ड में रहना चाहता है अथवा पूर्व में दी गई अपनी फीस को लेकर इसे छोड़ना चाहता है। लेकिन वह तो इसमें बने रहना चाहेंगे। दयाल के इस बयान पर किश्‍वर ने उन्‍हें करारा जवाब देते हुए कई सवाल भी उठाए हैं।

किश्‍वर का कहना है, 'आपको गिल्‍ड की जरूरत है, क्‍योंकि इससे आपके हित सधते हैं। इसलिए यह समझा जा सकता है कि आप तो इसके मेंबर बने रहना ही चाहोगे। लेकिन मुझे ऐसे संगठन में बने रहने का कोई औचित्‍य समझ में नहीं आ रहा है, जिसके अंदर इतना भी शिष्‍टाचार नहीं है जो आपको मीटिंग के लिए बुलाए।'

इसके साथ ही किश्‍वर ने यह सवाल भी उठाए कि नए पदाधिकारियों की नियुक्ति किस तरह की गई है, क्‍या इसके लिए कोई आम बैठक बुलाई गई थी। यदि नहीं बुलाई गई थी तो इनका चुनाव किस तरह किया गया। यदि मीटिंग बुलाई गई थी तो क्‍या इसके लाइफटाइम मेंबर्स को सूचना दी गई थी। लंबे समय में मुझे मीटिंग के लिए कोई सूचना नहीं मिल रही है। किश्‍वर का यह भी कहना था कि 1980 के दशक में जब उन्‍होंने गिल्‍ड को जॉइन किया था तब इसमें अधिकांश रिटायर्ड एडिटर्स ही शामिल होते थे। ऐसे वर्किंग एडिटर्स कम ही थे, जिन्‍होंने कभी इसकी मीटिंग अटैंड की होगी। कुलदीप नैय्यर और उनके कुछ साथियों ने इसे अपनी मर्जी के मुताबिक चलाया और पदाधिकारियों को अपनी पसंद के अनुसार चुन लिया जाता था, क्‍योंकि मुझे याद नहीं है कि कभी गिल्‍ड के पदाधिकारी किसी चुनाव के लिए एकत्रित हुए हों। कुलदीप नैय्यर ने एक बार किसी सज्‍जन को पदाधिकारी बनाने के लिए लाए थे, जबकि वह गिल्‍ड का सामान्‍य मेंबर भी नहीं था।बाद में भी लोग यहां के प्रेजिडेंट और सेक्रेटरी का पद खुशी-खुशी संभाल लेते थे क्‍योंकि इससे सरकार व राजनीतिक हलकों में उनका रसूख बढ़ता था लेकिन कार्यकाल पूरा होने के बाद वे गिल्‍ड को भूल जाते थे।   

किश्‍वर का यह भी कहना है कि गिल्‍ड के पास न तो अपना कोई ऑफिस है और न ही कोई वेबसाइट। हालांकि उन्‍होंने अपने निजी खर्च पर गिल्‍ड को वेबसाइट तैयार कराने का ऑ‍फर दिया था लेकिन वे इसके पुराने स्‍वरूप में कोई बदलाव नहीं करना चाहते थे। उस जमाने के कुछ एडिटर्स लगातार मीटिंग करते रहते थे और इनमें से कुछ तो अपने समय के बड़े एडिटर्स में शुमार हो गए थे। मैं वर्षों तक उन्‍हें आचार संहिता बनाने के लिए कहती रही और जब उन्‍होंने इसके लिए कमेटी बनाई तो मुझे ही उसमें से बाहर कर दिया गया। इसके बाद दूसरे देशों की आचार संहिता को कॉपी-पेस्‍ट कर एक नई आचार संहिता बना दी गई। हालांकि कभी उस आचार संहिता का पालन नहीं किया गया है।

किश्‍वर के अनुसार, 'ऐसे लोग प्रेस की स्‍वतंत्रता के नाम पर सरकारी जमीन लेने, सरकारी मकान और अन्‍य सुविधाएं लेने को कोई गलत नहीं मानते हैं। ऐसे मुफ्तखोर ही इस प्रोफेशन को अपवित्र कर रहे हैं। सिर्फ मैंने ही इसके खिलाफ आवाज उठाई लेकिन मेरी बात को किसी ने नहीं सुना। हालांकि पहले मुझे बोर्ड में रखा गया था और एग्जिक्‍यूटिव कमेटी में भी शामिल किया गया था।'

अपने आरोपों के सि‍लसिले में मधु किश्‍वर ने वरिष्‍ठ पत्रकार प्रभु चावला द्वारा लिखा मेल भी संलग्‍न किया है। इस मेल में प्रभु चावला ने लिखा है, 'गिल्‍ड की मीटिंग में मुझे हमेशा से आमंत्रित किया जाता रहा है। हालांकि कई वर्षों से मैंने इन मीटिंग को अटैंड नहीं किया है। सबसे बड़ी बात है कि किसी ने भी मुझसे मेंबरशिप के नाम पर किसी तरह के पैसे की मांग नहीं की है। यही नहीं, मुझे कहीं पर भी गिल्‍ड का कोई पता और ईमेल आदि भी नहीं दिखता है, जिस पर इसके मेंबर अपनी बात पहुंचा सकें। यदि कुछ ऐसा है तो मैं उस लिंक आदि से अपडेट होना चाहूंगा।'

प्रभु चावला के अनुसार, 'मधु ने कई महत्‍वपूर्ण मुद्दे उठाए हैं और उन्‍हें सभी के नहीं तो कम से कम कुछ सवालों के जवाब जरूर मिलने चाहिए। मेरी सलाह यह भी है कि गिल्‍ड को अपनी कोई वेबसाइट आदि भी बनानी चाहिए ताकि इसके बारे में पूरी जानकारी जुटाई जा सके कि इसकी मेंबरशिप कैसे ली जाती है, क्‍या योग्‍यता होनी चाहिए, कौन मेंबरशिप देता है, इसका संविधान (यदि कुछ है तो) कैसा है। इसके पदाधिकारियों का नाम व उनका कार्यकाल कितना है, यह जानकारी भी पता होनी चाहिए। इसके अलावा, समय-समय पर होने वाली मीटिंग्‍स के मिनट्स की भी लोगों को जानकारी होनी चाहिए। हम सभी चाहते हैं कि पत्रकारों की आवाज उठाने के लिए गिल्‍ड एक जिम्‍मेदारी और विश्‍वसनीय संस्‍था बने और इसके पदाधिकारियों का चुनाव भी उचित तरीके से होना चाहिए।आखिर में किश्‍वर ने कहा कि वह चाहती हैं कि उनकी मेंबरशिप को खत्‍म कर उनके दस हजार रुपए वापस कर दिए जाएं ताकि इस तरह के निर्णय लेने वाले पत्रकारों की लिस्‍ट में मेरा नाम इस्‍तेमाल न किया जाए जिसके बारे में मुझे सूचना तक न दी गई हो।


माचार4मीडिया.कॉम देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल exchange4media.com की हिंदी वेबसाइट है। समाचार4मीडिया में हम अपकी राय और सुझावों की कद्र करते हैं। आप अपनी रायसुझाव और ख़बरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो कर सकते हैं।

Tags headlines


Copyright © 2018 samachar4media.com