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एक ही कलम से लिखी है डॉक्‍टरों और पत्रकारों की जिंदगी: डॉ. महेश शर्मा

Thursday, 22 February, 2018

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।

एक्‍सचेंज4मीडिया न्‍यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (ENBA)  का दसवां एडिशन 10 फरवरी को नोएडा के होटल रेडिसन ब्‍लू में धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम में मुख्‍य अतिथि व केंद्रीय पर्यटन एवं संस्‍कृति मंत्री महेश शर्मा ने मीडिया के समक्ष आ रही चुनौतियों के बारे में विस्‍तार से जानकारी दी।

अपने भाषण की शुरुआत में महेश शर्मा ने इस अवॉर्ड के दसवें एडिशन में पहुंचने पर सबसे पहले ‘बिजनेसवर्ल्ड’ (BusinessWorld)  ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) ग्रुप के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ अनुराग बत्रा और उनकी टीम को बधाई दी। उन्‍होंने कहा कि आज मेरे लिए काफी खुशी की बात है कि इस कार्यक्रम के माध्‍यम से आज नसीम जैदी व आलोक मेहता जैसे दिग्‍गजों से मुलाकात करने का अवसर मिल रहा है। श्रेष्‍ठ में से श्रेष्‍ठतम चुनने का विचार काफी अच्‍छा है। जीवन की दौड़ में यदि ये तलाश खत्‍म हो जाएगी तो फिर काफी मुश्किल होगी। हम लोग हमेशा से बेहतर की तलाश में रहते हैं और इस कार्यक्रम के जरिये ‘एक्‍सचेंज4मीडिया’ ने बहुत काफी अच्‍छा काम किया है। 

दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में मीडिया अपनी भूमिका अच्‍छे से निभा रही है। आज सारी दुनिया की नजरें हम पर टिकी हुर्इ हैं और आने वाले समय में भारत पूरी दुनिया का प्रतिनिधित्‍व करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे दूरदर्शी व्‍यक्तित्‍व के नेतृत्‍व में भारत लगातार आगे बढ़ रहा है। एक्‍सचेंज4मीडियाने इंडस्‍ट्री से जुड़े श्रेष्‍ठ लोगों को तलाश कर बहुत ही सराहनीय प्रयास किया है। एक डाक्‍टर होने के नाते मैं बता सकता हूं कि सबसे तेज और सबसे आगे रहने के लिए कितने तरह के तनावों से गुजरना पड़ता है और प्रतिस्‍पर्द्या की दौड़ में सबसे आगे निकलने के लिए क्‍या कुछ नहीं करना पड़ता है और वह भी चौबीस घंटे और 365 दिनों में। ये बात हम अच्‍छी तरह से जानते है कि कोई भी गलत इनफॉमेशन अथवा छोटी सी गलती भी कितना नुकसान कर सकती है, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। ऐसे में ऊंचाइयों तक पहुंचना और वहां टिके रहना, वो भी क्रेडिबिलिटी और नवीन सूचनाओं के साथ काफी बड़ी बात होती है। आज जूरी ने जिन लोगों को बेस्‍ट सलेक्‍ट किया है, मैं उन्‍हें बधाई देता हूं। मुझे इस श्‍हर में 34-35 साल हो गए हैं। बड़े अरमानों के साथ  दिल्‍ली-एनसीआर के बॉर्डर पर यह शहरा बसा था और आप लोगों की भी ये कर्म भूमि है। एक जनप्रतिनिधि होने के नाते मैं आपका अभिनंदन भी करता हूं कि आपने इस कार्यक्रम को मेरी राजनीतिक कर्मभूमि पर किया है।

महेश शर्मा ने कहा, ‘आजकल न्‍यूज लगभग सभी माध्‍यम में उपलब्‍ध है, ऐसे में आधुनिक पत्रकारिता में किस तरह का तनाव है, मैं यह अच्‍छी तरह समझ सकता हूं। यह लगातार चलने वाला माध्‍यम है और कंपटीशन में आगे रहने की होड़ व कड़ी प्रतिस्‍पर्धा के चलते पत्रकारों को मानसिक शांति के रूप में इसकी कीमत चुकानी पड़ती है। ऐसे में इंडस्‍ट्री में अपना बेहतरीन योगदान देने वालों की पहचान कर उन्‍हें इनबा अवॉर्ड्स से सम्‍मानित करना वाकई में काफी अच्‍छी पहल है।

इस मौके पर केंद्रीय मंत्री ने ब्रॉडकास्‍ट मीडिया जगत से कहा कि वे आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर देशहित के बारे में चिंता करें। उनका कहना था, ‘पत्रकारों को बुद्धिजीवी कहा जाता है। हो सकता है कि इनमें आपस में मतभेद हों लेकिन जब बात राष्‍ट्र के हितों की हो तो हमें एकजुट होना होगा। यह हम सभी के लिए जरूरी है कि हम अपने निजी, व्‍यावसायिक और वैचारिक मतभेदों को भुलाकर देशहित को सबसे ऊपर रखें।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. महेश शर्मा ने फेक न्‍यूज के खतरों के प्रति भी चेताया और इससे निपटने के लिए आम सहमति की बात भी की। उनका कहना था, ‘मेरा मानना है कि इन दिनों मीडिया के समक्ष जो सबसे बड़ी चुनौती है, वह सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म पर फैलाई जा रहीं गलत सूचनाएं हैं। कई बार इन सूचनाओं की पुष्टि करना काफी मुश्किल हो जाता है। हम सभी को बोलने की स्वतंत्रता के हित में इस मुद्दे का हल खोजने के लिए एक साथ आने की जरूरत है।उनका कहना था कि आज सोशल मीडिया काफी विस्‍तार कर रहा है। हम लोग कई बार विचारों की स्‍वतंत्रता और अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता की बात करते हैं, यह अच्‍छी बात है लेकिन कभी-कभी सोशल मीडिया पर एक छोटी सी गलत खबर भी कुछ इस तरह फैल जाती है कि हमें इंटरनेट तक बंद करना पड़ता है। ऐसे में हमें इन चीजों पर विशेष ध्‍यान रखना होगा।


डॉ. महेश शर्मा ने कहा, ‘प्रिंट मीडिया के आलोक मेहता जी खासतौर पर इस बात को समझ सकते हैं कि प्रिंट मीडिया में करेक्‍शन और सलेक्‍शन की गुंजाइश है लेकिन इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया खासकर सोशल मीडिया में जब इस तरह की बातें होती हैं तो मुश्किल होती है। मेरा मानना है कि यहां पर मीडिया के थिंक टैंक इस बात को लेकर चिंतन करें और इसके बाद जो निष्‍कर्ष निकलकर आएगा वो केवल न केवल देश को बल्कि मानवीयता को एक नई दिशा देने को तत्‍पर होगा। आज जिस सोशल मीडिया के माध्‍यम से हम प्रजातंत्र को और मजबूती प्रदान कर सकते हैं। पहले कई बड़ी सूचनाएं अथवा घोटाले और अपराध की बड़ी खबरें देश को पता नहीं चल पाती थीं, लेकिन सोशल मीडिया और इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया के माध्‍यम से ये सब चीजें बड़ी आसानी से वायरल हो जाती हैं और पलक झपकते ही लोगों तक ये सूचनाएं फैल जाती हैं। लेकिन इसकी कमियों को आप सब लोग मिलकर दूर कर लेंगे, यह मेरा विश्‍वास है। ताकि हमारे ये ताकत हमें परेशानी की ओर न ले जाए, ये भी हमारे लिए चिंता का विषय होना चाहिए। आपको मैं क्‍या उदाहरण दूं क्‍योंकि आप इस पेशे को मुझसे ज्‍यादा समझते हैं। ऐसे में मेरी इल्तिजा है कि आप इस ओर जरूर देखेंगे।अपने पड़ोसी का उदाहरण देते हुए महेश शर्मा ने बताया कि उनका एक पड़ोसी ज्ञान किसी सरकारी दफ्तर में काम करता था। एक दिन मैंने उससे पूछा कि ज्ञान बाबू तुम अखबार पढ़ते हो और तीन मिनट बाद ही उसे उठाकर रख देते हो। इतने कम समय में ऐसा उसमें क्‍या पढ़ लेते हो तो वह बोला कि मैं तो सिर्फ इसलिए हेडलाइंस देखता हूं कि कहीं किसी बड़े नेता की मौत की खबर तो नहीं छपी ताकि उस दिन की छुट्टी मिल जाए। उन्‍होंने कहा कि यह सब सोच-सोच का फर्क होता है।

उन्‍होंने कहा कि आज के इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया के युग में मुझे लगता है कि हम डॉक्‍टरों और मीडिया के लोगों की जिंदगी खासतौर पर एक ही किसी लेखनी से लिखी गई है, एक ही धागे से बंधी हुई है और ग्रह दशा भी एक जैसे लगते हैं क्‍योंकि जब दुनिया में अलर्ट होता है तो हम सब रेड अलर्ट पर आ जाते  हैं। कोई घटना-दुर्घटना पर हम रेड अलर्ट पर आ जाते हैं।

महेश शर्मा ने कहा कि जब जैदी साहब कहते हैं कि अब मैं इलेक्‍शन की तारीख घोषित करने जा रहा हूं और इतने मिनट इतने सेकेंड पर तो हमारी अलर्टनेस और बढ़ती चली जाती है। फिर कंप्‍टीशन शुरू हो जाता है कि सबसे पहले कौन न्‍यूज आगे फ्लैश करता है। इस दौड़ में एक डाक्‍टर के नाते मैं ये भी कहता हूं कि अपने आपको दिमागी रूप से शांत रखना चाहिए।

उन्‍होंने कहा, 'ब‍हुत सारे लोग इस तरह के तनाव से जूझ रहे हैं, जिसके बारे में उन्‍हें गंभीर होने की जरूरत है। मुझे एक फायदा आज से करीब तीस साल पहले हुआ था जब मैं महर्षि योगी जी का यहां आश्रम हुआ करता था तो मुझे दिखना भी बंद हो गया था और सुनना भी कम हो गया था। मुझे पहले ज्‍यादा दिखता था उन्‍होंने मेरा सही काम कर दिया कि जितना देखना चाहते हैं, उतना दिखेगा और जितना सुनना चाहते हैं, उतना सुनाई देगा। तो आपको अपनी सेहत के लिए स्‍वार्थी बनकर उस दौड़ से थोड़ा समय निकालना होगा। क्‍योंकि यदि हम स्‍वस्‍थ हैं तो सारा जमाना हमारा है। हम जमाने के लिए हैं और जमाना हमारे साथ है। अपने लिए भी थोड़ा समय निकालें और अपने आपको फिट रखें।'



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क्या इंडिया टीवी के चेयरमैन रजत शर्मा का क्रिकेट की दुनिया में जाना सही है?

हां, उम्मीद है कि वे वहां भी उल्लेखनीय कार्य कर सुधार करेंगे

नहीं, जिसका काम उसी को साजे। उनका कर्मक्षेत्र मीडिया ही है

बड़े लोगों की बातें, बड़े ही जाने, हम तो सिर्फ चुप्पी साधे

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