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TV एंकर्स ने कुछ यूं किया मध्य प्रदेश का चुनावी विश्लेषण

Published At: Thursday, 06 December, 2018 Last Modified: Friday, 07 December, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

मध्यप्रदेश के सियासी समर में कूदे प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम में कैद हो चुका है। 11 दिसंबर को यह साफ हो जाएगा कि राज्य में भाजपा एक बार फिर सत्ता की चाबी संभालती है या फिर कांग्रेस का वनवास ख़त्म होता है। अब तक जो रुझान सामने आ रहे हैं, उसमें भाजपा का ही पलड़ा भारी नज़र आ रहा है, लेकिन सियासत भी क्रिकेट की तरह है, जहां आखिरी गेंद पर कुछ भी हो सकता है। समाचार4मीडिया ने विधानसभा चुनाव को कवर करने वाले टीवी पत्रकारों से जानने का प्रयास किया कि आखिर इस बार जनता किसके मन की मुराद पूरी करने जा रही है?

‘आजतक’ के सईद अंसारी की नज़र में भाजपा के सत्ता में वापसी की संभावनाएं काफी ज्यादा हैं। उनका कहना है, ‘इसके पीछे कई कारण है, सबसे पहला तो यही कि कांग्रेस को जिन मुद्दों को जोरशोर से जनता के सामने रखना चाहिए था, वो उसमें नाकाम रही। खासतौर पर एसटी-एसटी और व्यापाम जैसे मुद्दों पर कांग्रेसी सरकार के खिलाफ माहौल तैयार नहीं कर सके। किसान भी बड़े पैमाने पर सरकार से नाराज़ थे, लेकिन कांग्रेस उसका फायदा भी नहीं उठा सकी। जिस तरह से चुनाव पूर्व एसटी-एसटी एक्ट के विरोध में आंदोलन हो रहे थे, उसे देखकर लग रहा था कि इस बार समीकरण बदल सकते हैं, मगर वोटिंग तक आते-आते ये लहर ख़त्म हो गई। मुझे लगता है कि शिवराज सिंह ने आखिरी वक़्त पर डेमेज कंट्रोल कर लिया है।‘


सईद के मुताबिक, ‘भाजपा ने जिस तरह से बीपीएल परिवारों को एक रुपए किलो अनाज और पक्के घर के लिए ढाई लाख देने की योजना को मूर्तरूप दिया, उसका फायदा पार्टी को मिला है। लोगों में मुख्यमंत्री के तौर पर शिवराज सिंह को लेकर कोई नाराज़गी दिखाई नहीं दी। हालांकि एंटी इंकम्बेंसी का कुछ हद तक असर हो सकता है, फिर भी भाजपा के सरकार बनाने की संभावना काफी ज्यादा हैं। भाजपा ने मजबूत संगठन के रूप में चुनाव लड़ा, जबकि कांग्रेस इस बार भी बिखरी नज़र आई। इसके अलावा, संघ ने भी भाजपा के प्रति माहौल बनाने में जी-तोड़ मेहनत की है।‘ 

‘एनडीटीवी इंडिया’ के रवीश रंजन शुक्ला का कहना है, ‘इस बार मध्यप्रदेश में इलेक्शन नहीं रिजेक्शन वाला माहौल था। लोगों में केंद्र सरकार या व्यक्तिगत तौर पर शिवराज सिंह चौहान के प्रति खासी नाराज़गी देखने को नहीं मिली, लेकिन राज्य सरकार के कामकाज को लेकर उनमें गुस्सा ज़रूर था। लिहाजा कांग्रेस के पास सत्ता में आने का ज्यादा मौका है, मुझे तो लगता है कि कांग्रेस पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएगी।‘

शुक्ला के अनुसार, ‘कांग्रेस में इस बार एक अच्छी बात देखने को मिली कि जिस क्षेत्र में उनके क्षत्रप मजबूत थे जैसे कि ज्योतिरादित्य सिंधिया, दिग्विजय सिंह और कमलनाथ, वहां उनके हिसाब से टिकट बांटे गए। इन तीनों ने अपने प्रभाव वाले इलाकों में बहुत आक्रामक शैली में चुनाव प्रचार किया और मुझे लगता है कि इसका फायदा कांग्रेस को ज़रूर मिलेगा।‘

‘न्यूज़ नेशन’ के नावेद कुरैशी को लगता है कि भाजपा को मुश्किलों का सामना ज़रूर करना पड़ा है, लेकिन पलड़ा उसी का भारी है। उनके मुताबिक, ‘मध्यप्रदेश में लोगों को न मोदी सरकार से परेशानी थी और न ही शिवराज को लेकर खासा गुस्सा था, वो सिर्फ स्थानीय विधायकों से नाराज़ थे। इसके बावजूद कांग्रेस उनकी पहली पसंद बिलकुल नहीं रही। मैंने भिंड और बुंदेलखंड के कम से कम 20 निर्वाचन क्षेत्रों का दौरा किया, यहां मतदाता अपने स्थानीय प्रतिनिधियों से खफा थे, लेकिन फिर भी किसी ने बदलाव की बात नहीं कही। एंटी इंकम्बेंसी फैक्टर का कुछ असर ज़रूर देखने को मिला है, मगर भाजपा फिर भी सरकार बनाने की स्थिति में आ सकती है। कांग्रेस को लेकर मतदाताओं में कोई उत्साह नज़र नहीं आया।‘

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