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स्मिता प्रकाश मामला: कुछ यूं छलका बरखा दत्त का दर्द

Published At: Saturday, 05 January, 2019 Last Modified: Saturday, 05 January, 2019

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और ‘एएनआई’ की एडिटर स्मिता प्रकाश के बीच हुई ज़ुबानी जंग के बाद जिस तरह से मीडिया स्मिता प्रकाश के समर्थन में आया है, उसे लेकर भी अब सवाल खड़े होने लगे हैं। कई पत्रकारों को लगता है कि जब उन्हें निशाना बनाया जा रहा था, तब किसी ने आवाज़ नहीं उठाई।

दरअसल, राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू लेने वालीं स्मिता प्रकाश को ‘लचीला’ कहा था, जो सवाल कर रहीं थीं और जवाब भी खुद दे रही थीं। इसके बाद ‘Zee News’ के संपादक सुधीर चौधरी,  आजतक के एंकर रोहित सरदाना सहित कई पत्रकारों ने इस पर आपत्ति जताई। एडिटर गिल्ड ऑफ़ इंडिया द्वारा भी इसकी निंदा की गई। कुल मिलकर यह राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बन गया।

अब इस बहस ने कई पत्रकारों के पुराने ज़ख्म हरे कर दिए हैं, वो सवाल कर रहे हैं कि जब उन पर हमले हो रहे थे,  तब बाकी पत्रकार और एडिटर गिल्ड जैसी संस्थाएं क्यों आगे नहीं आईं? क्या वो इस जमात का हिस्सा नहीं? कुछ पत्रकारों ने प्रत्यक्ष तौर पर इस ‘सक्रियता’ को कठघरे में खड़ा नहीं किया है, लेकिन उनके समर्थक ज़रूर इसे मुद्दा बना रहे हैं।

वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त ने भी एक ट्वीट के जवाब में अपनी नाराज़गी व्यक्त की है। उन्होंने लिखा है ‘मैं भी यही कहूंगी। पिछले कुछ वर्षों से कई पत्रकारों को काम करने से रोकने के लिए सक्रिय प्रयास हो रहे हैं। हैरानी की बात है कि मीडिया इंडस्ट्री से शायद ही किसी ने इसके खिलाफ आवाज़ उठाई हो। हम जैसे कई पत्रकारों को अकेले ही ये लड़ाई लड़नी पड़ी है।’ हालांकि,  ये बात अलग है कि इसके लिए भी उन्हें सोशल मीडिया पर निशाना बनाया जा रहा है। अधिकांश यूजर्स ने बरखा के इस ट्वीट के लिए उन्हें आड़े हाथ लिया है।

दरअसल, बरखा दत्ता ने चीनू महापात्रा नामक फ्रीलांस राइटर के एक ट्वीट के जवाब में यह बात कही। चीनू ने अपने ट्वीट में उन पत्रकारों पर निशाना साधा है, जो राहुल गांधी की टिप्पणी को स्मिता प्रकाश का अपमान करार दे रहे हैं। ट्वीट में उन्होंने लिखा है ‘जो पत्रकार राहुल गांधी की #Pliable (लचीला) संबंधी टिप्पणी को गलत ठहरा रहे हैं, क्या उन्होंने उस वक़्त आवाज़ उठाई थी, जब पुण्य प्रसून बाजपेयी और अभिसार शर्मा को चैनल से निकाला जा रहा था? ये पत्रकार उस समय क्यों खामोश रहे जब आईटी सेल की ट्रोल आर्मी बरखा दत्त और स्वाति चतुर्वेदी को लगातार जान से मारने की धमकी दे रही थी’?

गौरतलब है कि स्मिता प्रकाश के मामले में किसी भी पत्रकार ने त्वरित प्रतिक्रिया नहीं दी थी। राहुल गांधी की प्रेस कांफ्रेंस में बैठे मीडियाकर्मियों ने इस पर उनसे कुछ नहीं कहा था, जब स्मिता ने ट्वीट करके राहुल को तीखा जवाब दिया था, तब उनके समर्थन में हाथ उठने लगे थे। सुधीर चौधरी ने तो अपने शो में इस मुद्दे को उठाया था और पाकिस्तान की एक घटना का जिक्र करते हुए भारतीय पत्रकारों को पाकिस्तान की मीडिया से कुछ सीखने की नसीहत दी थी।

 

 

 



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