Share this Post:
Font Size   16

चार साल बाद हो रही ‘IRS’ की वापसी को लेकर उत्साहित है प्रकाशक

Wednesday, 17 January, 2018

निशांत सक्‍सेना ।।

इंडियन री‍डरशिप सर्वे’ (IRS) 2017 के आंकड़े 18 जनवरी 2018 को जारी किए जाएंगे। ‘मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल’ (MRUC)और ‘ऑडिट ब्‍यूरो ऑफ सर्कुलेशंस’ (ABC) के संयुक्‍त तत्‍वावधान में गठित ‘द रीडरशिप स्‍टडीज काउंसिल ऑफ इंडिया’ (RSCI)  ने यह घोषणा की है।

मीडिया रिसर्च यूजर काउंसिलका कहना है कि आईआरएस 2017’ में चारों तिमाहियों के फील्‍डवर्क को मिलाकर तैयार की गई पूरी रिपोर्ट शामिल होगी। इससे पहले दुनिया के सबसे बड़े पाठक सर्वे आईआरएसके आंकड़े वर्ष 2014 में जारी किए गए थे, जो काफी विवादित रहे थे और बड़े मीडिया हाउस ने इन्‍हें स्‍वीकार नहीं किया था। मीडिया घरानों ने इस रिपोर्ट को दोषपूर्ण करार देते हुए इसमें कई विसंगतियां होने की बात भी कही थी।

ऐसे में अब यह सवाल उठ रहा है कि क्‍या इस बार पब्लिशर्स इन आंकड़ों का स्‍वागत करेंगे अथवा पिछली बार की तरह इन्‍हें अस्‍वीकार कर देंगे। यह तो आने वाला समय ही बताएगा लेकिन आईआरएस 2017’ को लेकर पूर्व में पब्लिशर्स ने जिस तरह की प्रतिक्रिया जताई थी, उसे देखते हुए यह बात तो तय है कि इस बार के आंकड़ों को वे पूरी तरह नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं।

इस बारे में ‘सकाल मीडिया ग्रुप’ के सीईओ प्रदीप द्विवेदी ने ट्वीट कर कहा है, ‘इन आंकड़ों से देश में प्रिंट मीडिया के लिए मीजरमेंट विधि की एक नई शुरुआत होने की उम्‍मीद है।

वहीं, ‘जागरण प्रकाशन लिमिटेडके पूर्णकालिक निदेशक शैलेष गुप्‍ता ने कहा, ‘कई वर्षों के बाद आईआरएस 2017 के आंकड़े 18 जनवरी को जारी होंगे।वहीं ‘आउटलुक ग्रुप’  के सीईओ इंद्रानिल रॉय ने उम्‍मीद जताई है कि इस बार ये आंकड़े ज्‍यादा सटीक होंगे और इनमें गलतियां भी नहीं होंगी।

आईआरएस की स्‍टोरी

MRUC द्वारा अखिल भारतीय स्‍तर पर देश की जनसांख्यिकी रिपोर्ट के साथ मीडिया और इसके इस्‍तेमाल के व्‍यवहार को मापने और इसकी सदस्‍य कंपनियों की रिसर्च की जरूरतों को पूरा करने के लिए इंडियन रीडरशिप सर्वेलॉन्‍च किया गया था।

वर्ष 1995 में ये पहली बार जारी किए गए थे और तब से इसके आंकड़े काफी मान्‍य माने जाते हैं और एडवर्टाइजर्स, पब्लिशर्स और एजेंसियों के साथ ही ब्रॉडकास्‍टर्स के लिए भी मीडिया और कंज्‍यूमर के बारे में पता लगाने का सबसे अच्‍छा स्रोत्र माने जाते हैं।

हालांकि वर्ष 2014 में जारी हुए आंकड़ों को लेकर काफी बवाल मचा था और तकरीबन 18 सदस्‍य प्रकाशकों ने इन्‍हें त्रुटिपूर्ण बताते हुए खारिज कर दिया था। आईआरएस 2013 की रिपोर्ट जारी होने के तुरंत बाद अखबारों ने जनहित में संयुक्‍त रूप से एक बयान जारी कर इन आंकड़ों को काफी चौंकाने वाला बताया था।

वर्तमान में उम्‍मीदें

हालांकि MRUC इस बार इन आंकड़ों के जारी होने को लेकर पूरी तरह आश्‍वस्‍त है, लेकिन पब्लिशर्स के बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है। ‘आउटलुक ग्रुप’  के सीईओ इंद्रानिल रॉय का कहना है कि जिन पब्लिशर्स के आंकड़े ज्‍यादा होंगे, वे बहुत खुश होंगे और जिन लोगों की रीडरशिप घटी होगी, वे दुखी होंगे।

वहीं, शैलेष गुप्‍ता सर्वे को लेकर ज्‍यादा आशावादी दिखाई दिए, उनका मानना है कि इस सर्वे को लेकर पब्लिशर्स का रवैया भी सकारात्‍मक है। उनका कहना है, ‘जब से नई प्रक्रिया शुरू हुई है, पब्लिशर्स तब से ही आईआरएस का समर्थन करते आ रहे हैं। आईआरएस सचिवालय और तकनीकी टीम द्वारा काफी मेहनत की गई है और सभी लोग 18 जनवरी को जारी होने वाले डाटा को लेकर काफी सकारात्‍मक हैं।

शैलेष गुप्‍ता ने स्‍वीकार किया कि वर्ष 2014 के बाद से आईआरएस की नामौजूदगी के कारण निर्णय लेने समेत अन्‍य कई तरह की समस्‍याएं आ रही थीं। आखिरी विश्‍वसनीय डाटा वर्ष 2012 की चौथी छमाही के जारी किए गए थे।

उन्‍होंने कहा कि आईआरएस 2013 और 2014 के साथ कई समस्‍याएं थीं, जिसने दोबारा से आईआरएस के बारे में सोचने पर मजबूर किया। मेरी नजर में प्रिंट का भी काफी विकास हुआ है।

आईआरएस 2017 में ये है खास

एमआरयूसीके अनुसारटीम ने फील्‍ड विजिटदोबारा जांचजीपीएस ट्रैकिंग डिवाइस का इस्‍तेमालऑडियो रिकॉर्डिंग और तिमाही नतीजों के द्वारा स्‍क्रूटनी के स्‍तर को काफी बड़ा रखा था। इसके अलावा मीडिया एजेंसी के कर्मचारियों का भी इसमें काफी सक्रिय सहयोग रहाजिन्‍होंने आंकड़ों के पुनर्मूल्‍यांकन में काफी मदद की। चारों तिमाहियों के फील्‍डवर्क के डाटा सत्‍यापन का पूरा काम पिछले महीने ही पूरा हुआ था। 

एमआरयूसीकी ओर से जारी बयान के अनुसारइंडस्‍ट्री को विश्‍वसनीय और मजबूत आंकड़े उपलब्‍ध कराने के लिए ‘IRS Techcom’, ‘RSCI’, ‘MRUC’ के साथ मार्केट रिसर्च फर्म ‘नील्‍सन’ (Nielsen)  की टीम ने भी अपने स्‍तर से कोई कसर नहीं छोड़ी है।   

आईआरएस 2017की रिपोर्ट को तैयार करने के लिए सैंपल साइज में भी करीब 40 प्रतिशत की वृद्धि की गई थी। आईआरएस 2013 में जहां 2,35000 घरों का सर्वे किया गया, वहीं आईआरएस 2017 के सर्वे में 330,000 हाउसहोल्‍ड को शामिल किया गया। इनमें शहरी क्षेत्र में 2.14 लाख और ग्रामीण क्षेत्रों में 1.16 लाख घरों को शामिल किया गया।

आईआरएस 2017 में 600 से ज्‍यादा पब्लिकेशंस को कवर किया गया है। पहुंच व स्‍तर के आधार पर 71 प्रॉडक्‍ट कैटेगरी बनाई गई हैं। 28 राज्‍यों, चार केंद्र शासित प्रदेशों के अलावा पांच लाख से अधिक जनसंख्‍या वाले 95 शहरों, 91 जिलों और 101 जिला समूहों को इसके तहत कवर किया गया है।

 

समाचार4मीडिया.कॉम देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल exchange4media.com की हिंदी वेबसाइट है। समाचार4मीडिया में हम अपकी राय और सुझावों की कद्र करते हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो कर सकते हैं। 

Tags headlines


Copyright © 2018 samachar4media.com