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कैसे मिली दैनिक भास्कर को ये बड़ी सफलता, डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल ने बताई वजह...

Wednesday, 08 August, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

डीबी कॉर्प लिमिटेड (डीबीसीएल) ने 7 अगस्त को ये घोषणा की कि बिहार में दैनिक भास्कर दूसरा सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला अखबार बन गया है। वह भी अखबार द्वारा बिहार में सर्कुलेशन बढ़ाने का अभियान शुरू करने के महज छह महीने के भीतर। हंसा रिसर्च ग्रुप ने अपनी हालिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी है।

हंसा रिसर्च ग्रुप ने बिहार के सभी प्रमुख हिंदी अखबारों के रीडरशिप प्रोफाइल, रीडर एंगेजमेंट और ब्रैंड सैटिस्फैक्शन का पता लगाने के लिए सर्वे किया और जो रिपोर्ट निकलकर सामने आई उसके मुताबिक, दैनिक भास्कर 9.11 लाख पाठकों के साथ राज्य में दूसरे नंबर पर है, जबकि हिंदी दैनिक हिन्दुस्तान 9.98 लाख पाठकों के साथ पहले नंबर पर है। दोनों के बीच सिर्फ 9.5% का अंतर बचा है। वहीं इस रिपोर्ट के मुताबिक दैनिक जागरण 9.09 लाख पाठकों के साथ तीसरे स्थान पर है।

हमारी सहयोगी वेबसाइट एक्सचेंज4मीडिया ने उनकी इस सफलता को लेकर दैनिक भास्कर ग्रुप के डायरेक्टर व प्रमोटर गिरीश अग्रवाल से चैट पर बात की और ये जानने की कोशिश की कि बिहार में कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद किस तरह से उन्होंने यह सफलता हासिल करने के लिए कैंपेन व प्रमोशन किए। पेश है बातचीत के कुछ अंश:

कम्पटीशन में मात देने के लिए बिहार में डीबीसीएल द्वारा किए गए कैम्पेन्स और प्रमोशंस के बारे में कुछ बताएं?

यह कम्पटीशन में मात देने की बात नहीं है बल्कि मार्केट में आगे बढ़ने की बात है।हमारा माध्यम डोर-टू-डोर सर्विस देना है। हालांकि यह जरिया बहुत महंगा है, लेकिन यदि टीवी कैम्पेंस पर 10 करोड़ रुपए खर्च करूं तो वह क्या यह मुझे बिहार में इसी तरह की रीच (reach) दे सकता है? नहीं। हम इसके बजाय उपभोक्ताओं से सीधे जाकर बात करने मे ही खुशी महसूस करते हैं।

उत्तर प्रदेश के लिए अब आपकी क्या योजनाएं हैं?

उत्तर प्रदेश के लिए अभी कोई योजना नहीं है, हम बस बिहार और अन्य मार्केट्स पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

न्यूजप्रिंट के बढ़ते दामों से आपने किस तरह उसका सामना किया?

ईमानदारी से कहूं तो, न्यूजप्रिंट के दाम सिर्फ बढ़े ही नहीं बल्कि इसकी वजह से हम सभी को नुकसान सहना पड़ा। हमें उम्मीद है कि आने वाले दो या तीन तिमाही में न्यूजप्रिंट की बढ़ती कीमते नीचे आएंगी।

बिहार में अपने निवेश और मार्केट के तौर पर इसके महत्व के बारे में हमें बताएं।

हमने बिहार की मार्केट में करीब 200 करोड़ रुपए का निवेश किया है। जब मैं इस प्रकार का कोई निवेश करता हूं, तो इसका स्पष्ट रूप से मतलब है कि वह मार्केट बहुत ही महत्वपूर्ण है।

लेकिन बिहार में तो एडएक्स (Adex) अभी भी हाई नहीं है।

हां बिल्कुल, खरीद के नजरिए से देखें तो विज्ञापन गुजरात या राजस्थान में बहुत कम है लेकिन मार्केट को बदलना पड़ता है, लेकिन आप मार्केट को कब तक दबा सकते हैं? बड़े मार्केट्स पर ध्यान केंद्रित करने के चलते पहले हर किसी ने इस तरह के मार्केट्स को अनदेखा कर दिया था, लेकिन इस तरह की मार्केट्स में बहुत ग्रोथ है। बिहार में हमने राष्ट्रीय विज्ञापनों के साथ-साथ हमने स्थानीय विज्ञापनों को भी तवज्जो दिया। विज्ञापन खर्च के संदर्भ में जो ग्रोथ का आंकलन था, वो तो आपने भी देखा। 65 प्रतिशन स्थानीय विज्ञापन और 35 प्रतिशत राष्ट्रीय विज्ञापन है। वैसे वर्तमान में बिहार, झारखंड 500 करोड़ रुपए का मार्केट है, लेकिन यह जल्द ही 1,000 करोड़ रुपए का मार्केट बन सकता है।

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