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जन्मदिन विशेष: मीडिया के भी प्रिय हैं राजनाथ सिंह

Tuesday, 10 July, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

वरिष्ठ भाजपा नेता और देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह आज 67 वर्ष के हो गए हैं। उनका जन्म 10 जुलाई, 1951 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के एक छोटे से गांव भाभोरा में हुआ था। बतौर गृहमंत्री जितना सख्त किसी राजनेता को होना चाहिएराजनाथ उतने सख्त हैंऔर इस ऊंचाई पर पहुंचकर जितना संवेदनशील किसी व्यक्ति को होना चाहिएउतनी संवेदनशीलता भी उनमें नजर आती है। 

राजनाथ सिंह दूसरे नेताओं से इसलिए भी अलग हैंक्योंकि वो बेकार के बयानों में अपना वक्त जाया नहीं करते। वे विवादास्पद टीका-टिप्पणी से भी दूर रहते हैंजो आजकल भारतीय राजनीति में फैशन बन गया है। राजनाथ के रूप में देश को एक ऐसा गृहमंत्री मिला हैजिसे देशवासियों की सुरक्षा की चिंता है और वो गंभीरता से इस दिशा में काम भी कर रहे हैं।

राजनाथ आम जनता ही नहीं पत्रकारों के बीच भी खासे लोकप्रिय हैं। वे सवालों के सीधे और सटीक जवाब देते हैं और सत्ता विरोधी प्रश्नों से बचने की कोशिश नहीं करते। पिछले साल जम्मू-कश्मीर की आशांति पर उनके एक जवाब ने वरिष्ठ पत्रकार राणा अय्यूब को उनका कायल बना दिया था। अय्यूब की गिनती ऐसे पत्रकारों में होती हैजो भाजपा सरकार की नीतियों को कठघरे में खड़ा करते रहते हैं। ऐसे में उनका राजनाथ सिंह को अपना हीरो कहना कहीं न कहीं सिंह के करिश्माई व्यक्तित्व को दर्शाता है।


दरअसलराजनाथ ने अनंतनाग में हुए आतंकी हमले की निंदा करते हुआ कहा था कि ‘जम्मू-कश्मीर के लोगों ने जिस तरह से अमरनाथ यात्रियों पर हमले की निंदा की हैयह दर्शाता है कि कश्मीरियत की भावना अभी जिंदा है

इसके जवाब में ‘मेक माय इंडिया ट्रिप’ की एडिटर और वेब ब्लॉगर शुचि सिंह कालरा ने लिखा था, ‘ऐसे मौके पर कश्मीरियत की चिंता कौन करता है। आपका काम तसल्ली देना नहीं है। कायरों को घसीटकर लाओ और टांग दो

इस पर राजनाथ सिंह ने जिम्मेदारीबुद्धिमत्ता और संवेदनशील गंभीरता से कहा, ‘मिस कालरामैं निश्चित रूप से करता हूं। यह निश्चित तौर पर मेरा काम है कि देश के सभी हिस्सों में शांति स्थापित हो। सभी कश्मीरी आतंकवादी नहीं होते। राजनाथ के शब्दों का चयन बिलकुल वैसा रहाजैसा एक परिपक्व लोकतांत्रिक सरकार के वरिष्ठतम मंत्री के शब्दों का होना चाहिए।

गृहमंत्री राजनाथ सिंह के इस कथन पर राणा अय्यूब इस कदर प्रभावित हुईं कि उन्होंने राजनाथ सिंह को अपना हीरो कह डाला। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा ‘राजनाथ सिंह मेरे हीरो ऑफ द डे हैं। ऐसा आज की राजनीति में दुर्लभ है

बात किसी एक पत्रकार तक ही सीमित नहीं हैराजनाथ सिंह के बारे में अधिकांश पत्रकारों का यही मानना है कि वे एक सुलझे हुए सरल इंसान हैंजिन तक बिना झिझक के अपनी बात पहुंचाई जा सकती है।

राजनाथ खुद भी यह मानते हैं कि पत्रकारिता कोई साधारण काम नहींबल्कि एक बहुत बड़ा काम हैजो सच्चाई को सामने लाता है। हालांकि वो पत्रकारों को यह समझाइश भी देते हैं। एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था, ‘पत्रकारों को यह भी देखना चाहिए कि वे जो काम कर रहे हैंवह देश और समाज के लिए उपयोगी है या नहीं। इस प्रोफेशन में धोखा और फरेब के लिए कोई जगह नहीं है।

राजनाथ सिंह जमीन से जुड़े नेता हैंउन्हें सबकुछ थाली में सजा-सजाया नहीं मिला, बल्कि उन्होंने सीढ़ी-दर-सीढ़ी सफलता हासिल की। 1974 में जनसंघ के जिला सचिव के रूप में सिंह ने अपना राजनीतिक सफर शुरू किया और फिर बस आगे ही बढ़ते गए। संघ के स्वयंसेवक से लेकर विद्यार्थी परिषद के नेता तक उन्होंने सभी पदों पर रहते हुए अपनी अनूठी कार्यशैली की छाप छोड़ी। जब वह भारतीय जनता युवा मोर्चे के अध्यक्ष बने तो उन्होंने युवाओं को भाजपा से जोड़ने का अभूतपूर्व कार्य किया।

सही मायनों में राजनाथ सिंह की क्षमता का आंकलन उस वक्त हुआ जब उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह की सरकार में उन्हें शिक्षा मंत्रालय सौंपा गया। उन्होंने यूपी बोर्ड की परीक्षाओं में नकल पर लगाम लगाईजो संभवतः सबसे मुश्किल काम था। इसके बाद 2004 में उन्होंने खुद देश के सबसे बड़े राज्य की कमान संभाली। हालांकि मुख्यमंत्री के तौर पर उनका कार्यकाल दो वर्ष से भी कम रहालेकिन इस छोटी से अवधि में भी उन्होंने कई उल्लेखनीय कार्य किए।

मुख्यमंत्रीकाल के बाद राजनाथ राज्य से निकलकर केंद्र की राजनीति में आए। उन्हें कृषि और भूतल परिवहन मंत्रालय सौंपा गया। 2005 में वे पहली बार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। राजनाथ सिंह ने उस दौर में भाजपा की बागडोर संभाली जब पार्टी आपसी मनमुटाव से गुजर रही थीमगर अपनी कार्यकुशलता की बदौलत राजनाथ ने काफी हद तक उस काबू पाया।

ऐसा है राजनीतिक करियर :

राजनाथ सिंह 1977 में मिर्जापुर से विधायक चुने गए, 1998 में भाजपा यूथ विंग के राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित हुए, 1991 में यूपी के शिक्षामंत्री बनें, 1994 में राज्यसभा सांसद चुने गए, 1997 में यूपी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बने, 1999 में राजग सरकार में सड़क परिवहन मंत्री, 2000-2002 तक यूपी के मुख्यमंत्री रहे, 2005-2009 तक भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे, 2014 में लखनऊ से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे और वर्तमान में देश के गृहमंत्री हैं।

पेंशन की दिलचस्प कहानी :

राजनाथ ने गोरखपुर विश्वविद्यालय से भौतिकी विषय में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है। उसके बाद 1971 में केबी डिग्री कॉलेज में वह प्रोफेसर नियुक्त किए गए। हालांकि बाद में राजनीति में सक्रिय भूमिक निभाने के लिए उन्होंने ये नौकरी छोड़ दी।

उनकी पेंशन को लेकर भी एक दिलचस्प किस्सा है। रिटायरमेंट के बाद सिंह को बतौर पेंशन 9,500 रुपए मिले, लेकिन उन्होंने इसे लेने से इनकार कर दिया। इस दौरान वह यूपी के मुख्यमंत्री थे। जब कॉलेज प्रशासन ने इसकी वजह पूछी तो उन्होंने दिल को छू लेने वाला जवाब दिया। उन्होंने कहा, ‘1992 के बाद से मैंने छात्रों को नहीं पढ़ायाइसलिए पेंशन भी उतने ही सालों के हिसाब से मिलनी चाहिए

राजनाथ भी मारते थे बंक... लेकिन

आमतौर पर स्कूल या कॉलेज से बंक मारने वाले युवा सीधे थिएटर का रुख करते हैंलेकिन राजनाथ सिंह का जब पढ़ने का दिल नहीं करता था तो वो कॉलेज से संघ के शिविरों में चले जाया करते थे। स्टूडेंट लाइफ से ही राजनाथ अपने मौजूदा अंदाज में नजर आते थे। माथे पर तिलकपैरों में सैंडल और धोती-कुर्ता। वे छात्र राजनीति में होने के नाते लोगों में काफी लोकप्रिय थे। राजनाथ अक्सर अपने दोस्तों को घेरकर उन्हें राजनीति के रोचक किस्से सुनाया करते थे। इमरजेंसी के दौरान वह कई महीनों तक जेल में बंद रहे थे। भाजपा में उनके कद का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गृह मंत्री और मोदी मंत्रिमंडल के वरिष्ठतम मंत्री के रूप में राजनाथ सिंह प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति में मंत्रिमंडल बैठकों की अध्यक्षता करते हैंउनकी वरिष्ठता भाजपा के सक्रिय नेताओं में सर्वोच्च है।

 

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