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इस वजह से बढ़ जाएंगे हिंदी न्यूज चैनलों के विज्ञापन रेट!

Published At: Saturday, 10 November, 2018 Last Modified: Saturday, 10 November, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव और उसके बाद आम चुनावों को देखते हुए न्यूज चैनलों की तैयारी भी जोर-शोर से चल रही है। जैसा कि हमेशा से होता आया है, चुनाव के दौरान न्यूज का उपभोग बढ़ जाता है। ऐसे में ऐडवर्टाइजर्स भी न्यूज चैनलों पर ज्यादा खर्च करने के लिए आगे आते हैं।

देश में टेलिविजन की व्यापक पहुंच को देखते हुए मीडिया ऐडवर्टाइजर्स के लिए यह काफी प्रमुख माध्यम बना हुआ है। यदि टीवी पर विज्ञापन खर्च की बात करें तो इसका सबसे ज्यादा शेयर 40 प्रतिशत है। इसके बाद 34 प्रतिशत शेयर के साथ प्रिंट दूसरे स्थान पर और 15 प्रतिशत शेयर के साथ डिजिटल तीसरे स्थान पर है।       

इस बारे में ‘एबीपी न्यूज नेटवर्क’ (ANN) के सीओओ अविनाश पांडे ने न्यूज जॉनर में हुई ग्रोथ और नेटवर्क के कवरेज प्लान के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि एबीपी न्यूज के प्रमुख चुनावी कार्यक्रम ‘देश का मूड’ (Desh Ka Mood) ने दो नवंबर को ‘CVoter’ एजेंसी द्वारा कराए गए सर्वे के परिणामों को जारी कर दिया है। इसमें देशभर के 15463 से ज्यादा लोगों के जवाब शामिल हैं।

पांडे का कहना है, ‘नेटवर्क के सभी चैनल इलेक्शन कवरेज कर रहे हैं। नेटवर्क के सभी न्यूज चैनलों पर मंथली पोल की शुरुआत कर दी गई है। इसके अलावा क्षेत्रीय चैनल रोजाना शाम को पांच से आठ बजे तक इलेक्शन की व्यापक कवरेज करते हैं।’

चुनावों को लेकर एबीपी न्यूज के शो ‘कौन बनेगा मुख्यमंत्री’ का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि नेटवर्क ने अब ‘सियासत का सेंसेक्स’ शो लॉन्च किया है। एक घंटे के इस शो का प्रसारण सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना रात आठ से नौ बजे तक किया जाता है और इसे नेहा पंत होस्ट करती हैं। इस शो का उद्देश्य चुनावों के दौरान मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान की जनता के मूड के साथ ही वहां के राजनीतिक परिदृश्य को सामने रखना है।

पांडे ने कहा, पांच साल पहले के मुकाबले अब स्थिति काफी बदल गई है। अब राजनीतिक विचारधारा और जमीनी हकीकत में काफी बदलाव हुए हैं। ऐसे में इनको लेकर तमाम न्यूज चैनलों समेत लोगों में कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। इलेक्शन कवरेज के मामले में कम से कम चार प्रमुख चैनल काफी अच्छा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञापन की बात करें तो अधिकांश न्यूज चैनल दिसंबर मध्य तक के लिए बुक हो गए हैं। पांडे के अनुसार, ‘नेटवर्क की बात करें तो बदलते राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए एबीपी न्यूज, एबीपी माझा और एबीपी अश्मिता पर न्यूज की भरमार है। माझा महाराष्ट्र पर फोकस करेगा तो अश्मिता का फोकस मध्य प्रदेश और राजस्थान चुनावों पर है। इलेक्शन को लेकर चैनल ने बहुत अच्छी प्रोग्रामिंग की है, जिसका नतीजा है कि विज्ञापन की दरों में इजाफा हुआ है और ऐडवर्टाइजर्स दिसंबर तक बुकिंग करा रहे हैं।

आम चुनाव के दौरान विज्ञापन में बढ़ोतरीः पांडे का मानना है कि चूंकि देश में आम चुनाव नजदीक आ रहे हैं, ऐसे में ऐडवर्टाइजर्स एडवांस में बुकिंग करा रहे हैं। उनका कहना है, ‘क्लाइंट्स आम चुनावों के आखिर तक यानी 15 मई 2019 के आसपास तक अपनी इन्वेंटरी को शामिल रखना चाहते हैं। अधिकांश सौदों पर बातचीत चल रही है।’   

पांडे का मानना है कि चुनाव के दौरान अधिकांश न्यूज चैनलों को दोहरे अंकों (डबल डिजिट) की ग्रोथ देखने को मिलेगी। हिंदी न्यूज जॉनर की बात करें तो इसमें 15 से 25 प्रतिशत ग्रोथ की उम्मीद है।

नेटवर्क की विज्ञापन दरों में संशोधन के बारे में उन्होंने कहा, ‘इस फेस्टिव सीजन में हमने करीब 10 प्रतिशत की वृद्धि की है, अब इनमें विधानसभा चुनाव और मतगणना वाले दिन और वृद्धि होगी और यह करीब 15 प्रतिशत हो सकती है। विज्ञापन की दरों में तीसरी बार बढ़ोतरी तब होगी, जब आम चुनावों की घोषणा की जाएगी और यह दरें 20 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं।’  

उन्होंने कहा कि सीजन के हिसाब से दरें अलग-अलग होती हैं। यह 10 सेकेंड के स्लॉट के लिए 3400 से 10000 रुपए तक हो सकती हैं। ये दरें खरीद के समय समेत कई बातों पर निर्भर करती हैं और यह टॉप के तीनों चैनलों के लिए समान होती हैं। पांडे के अनुसार, ‘विधानसभा चुनाव में मतगणना वाले दिन के लिए एबीपी न्यूज ने शुरुआत में 10 सेकेंड के स्लॉट के लिए कम से कम 20000 रुपए का रेट रखा है, जो रोजाना बढ़ता जाएगा।’ पांडे का कहना है, ‘रीजनल चैनलों की दर चुनाव के आसपास तय की जाएंगी, लेकिन यदि कोई एबीपी न्यूज नेटवर्क के तीनों चैनलों (माझा, अश्मिता और एबीपी न्यूज) को लेना चाहता है तो 27000 रुपए की दर से स्लॉट खरीद सकता है। लेकिन यदि कोई इन्हें मतगणना वाले दिन लेना चाहता है तो 10 सेकेंड के स्लॉट के लिए एक लाख रुपए से अधिक देने होंगे।’

कैटेगरी पर ज्यादा हो रहा खर्चः मीडिया ऐडवर्टाइजर्स का रुझान टेलिविजन विज्ञापनों पर खर्च करने में बढ़ रहा है। एफएमसीजी, ऑटोमोबाइल, उपभोक्ता सामान,  मोबाइल हैंडसेट और दूरसंचार जैसे क्षेत्रों की वजह से इनका रेवेन्यू बढ़ रहा है। न्यूज चैनल भी इस स्थिति में अपनी दर्शक संख्या बढ़ने की उम्मीद कर रहे हैं। एफएमसीजी के अलावा ऑटोमोबाइल और मोबाइल हैंडसेट पिछली साल की तुलना में विज्ञापन पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं।   

नेशनल बनाम रीजनलः रीजनल न्यूज चैनल तहसील और जिले की खबरों को कवर करते हैं, जबकि नेशनल चैनल बड़े मुद्दों को उठाते हैं। नेशनल चैनल के दर्शकों का नजरिया रीजनल चैनल के दर्शकों से काफी अलग होता है। हालांकि, चुनाव कवरेज की बात करें तो दोनों बहुत अच्छा कर रहे हैं। जैसे-पश्चिम बंगाल में ‘एबीपी आनंद’ की व्युअरशिप काफी बढ़ गई थी और यह अन्य चैनलों की कुल व्युअरशिप से लगभग दोगुनी हो गई थी।

नए चैनल लॉन्च करने की योजनाः पांडे का कहना है, ‘हमने नए चैनल लॉन्च करने की योजना बनाई है, लेकिन हमें इस दिशा में आगे बढ़ने से पहले मार्केट के हालात को भी देखना होगा। अगले वित्तीय वर्ष में हम इसकी घोषणा कर सकते हैं। फिलहाल इस बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।‘



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