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HC ने दैनिक भास्कर से पूछा- कब से प्रेस के लोग इतनी आसानी से आहत होने लगे

Published At: Thursday, 05 July, 2018 Last Modified: Thursday, 05 July, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

दिल्ली हाई कोर्ट ने एकल न्यायाधीश के फैसले के खिलाफ वेब पोर्टल कोबरा पोस्ट की अपील पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। एकल पीठ न्यायधीष ने कोबरा पोस्ट को एक वृत्तचित्र (डॉक्यूमेंट्री) को सार्वजनिक करने से रोक दिया था, जिसमें विभिन्न मीडिया घरानों पर पेड न्यूज जैसे अनैतिक कार्य में शामिल होने का आरोप लगाया गया था।

न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट्ट और न्यायमूर्ति ए के चावला की पीठ ने कोबरा पोस्ट और दैनिक भास्कर कॉरपोरेशन लिमिटेड की तरफ से दलीलों को सुनने के बाद कहा कि वह कुछ सप्ताह में अपना फैसला सुनाएगी। दैनिक भास्कर कॉरपोरेशन लिमिटेड की याचिका पर एकल न्यायाधीश ने फैसला सुनाया था।

दलील के दौरान अदालत ने दैनिक भास्कर से पूछा कि उसके पक्ष में क्यों अंतरिम रोक जारी रहनी चाहिए जब 44 अन्य प्रकाशनों को इसी तरह का लाभ हासिल नहीं है।

दैनिक भास्कर की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता साजन पूवैया ने दावा किया कि पोर्टल के पत्रकार द्वारा किया गया स्टिंग ऑपरेशन जाल में फंसाने के समान है और एकल न्यायाधीश को फैसला करना चाहिए कि अंतरिम आदेश जारी रखना चाहिए या नहीं।

पीठ हालांकि इन दलीलों से असहमत लगी क्योंकि उसने कहा कि जब कोई सरकारी अधिकारी स्टिंग में फंसता है तो भयभीत लगता है, लेकिन जब किसी पत्रकार या प्रकाशन की बात आती है तो आप इसे जाल में फंसाना कहते हैं। अदालत ने कहा कि भंडाफोड़ करने वाले विभिन्न रूप में आते हैं।

अदालत ने कहा, ‘आप दूसरे लोग क्या कर रहे हैं इसका खुलासा करने निकले हैं। कब से प्रेस के लोग इतनी आसानी से आहत होने वाले हो गए।

पोर्टल और उसके पत्रकार की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर दैनिक भास्कर ने उसे भेजे गए सवालों का जवाब दिया होता तो उसे वेबसाइट पर लगाया जाता।

उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल अब भी दैनिक भास्कर का जवाब लगाने को इच्छुक हैं बशर्ते वह जवाब दे। उन्होंने कहा कि मौजूदा मामले में जैसी अभिव्यक्ति पर रोक लगाई गई, वैसा आदेश नहीं जारी किया जा सकता।

 


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