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जन्मदिन विशेष: मैं तो भाषा को कभी समझ भी नहीं पाया, भाषा से कोई चुनाव जीतता है तो कोई हारता...

Published At: Tuesday, 09 October, 2018 Last Modified: Tuesday, 09 October, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

संगीत की दुनिया में जर्रे से आफताब का सफ़र तय करने वाले उस्ताद अमजद अली खान आज 73 वर्ष के हो गए हैं। 9 अक्टूबर 1945 को ग्वालियर में जन्मे अमजद अली खान जितना अपने सरोद वादन के लिए प्रसिद्ध हैं, उतना ही अपनी सादगी के लिए भी पहचाने जाते हैं। उन्होंने पिछले साल ‘मास्टर ऑन मास्टर्स’ नाम से एक किताब भी लिखी थी, जिसमें उन्होंने नामचीन लोगों और अपने जीवन में उनके महत्व के बारे में बताया है।

‘मास्टर ऑन मास्टर्स’ में मुख्य तौर पर एमएस सुब्बालक्ष्मी, पंडित किशन महाराज, उस्ताद बिस्मिल्ला खान और मल्लिका ए गजल बेगम अख्तर का जिक्र है। हालांकि, पद्मभूषण और पद्मविभूषण से सम्मानित अमजद अली खान अपने लेखन को साधना नहीं मानते। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा था कि ‘मैंने कलम की साधना नहीं की है। मैं तो भाषा को कभी समझ भी नहीं पाया क्योंकि मेरा ऐसा मानना है कि भाषा के माध्यम से कई बार हेराफेरी हो जाती है। मैं ध्वनि की भाषा से जुड़ी दुनिया में रहता हूं और मुझे लगता है कि यह बहुत ही पारदर्शी है। लेकिन आज के समय में भाषा इस दुनिया पर राज कर रही है। भाषा की वजह से कोई चुनाव जीत जाता है तो कोई हार जाता है। मैं खुश हूं कि किताब के जरिए अपनी सोच को लोगों के सामने ला सका।’

अमजद अली खान उन कलाकारों में शुमार हैं, जो बेवजह के बयान से बवाल खड़ा करने में विश्वास नहीं रखते और न ही ऐसे विवादों का हिस्सा बनते हैं। कुछ वक़्त पहले गायक सोनू निगम ने सुर्खियां बंटोरने के लिए अज़ान को लेकर टिप्पणी की थी। जब पत्रकारों ने उस्ताद से इस पर बात करनी चाही, तो उन्होंने एक कलाकार ही तरह ही जवाब दिया। उन्होंने कहा ‘भगवान बहरा नहीं है और वह दिल से भी आपकी बात सुनता है। भगवान को सुनाने के लिए मंदिर, मस्जिद या चर्च पर लाउडस्पीकर बजाने की ज़रूरत नहीं है। हम फ़कीर लोग हैं, भगवान का आशीर्वाद लेते हैं। देश के साथ-साथ पूरी दुनिया में शांति का संदेश देते हैं। शब्द से राजनेता की सरकार बनती है, गिरती है। हम कलाकार हैं और अपने वाध्य यंत्र से अपनी बात कहते हैं।’

उज्जैन में मौनी बाबा जन्मोत्सव के दौरान पत्रकारों से चर्चा में उन्होंने धर्म और कला के नाम पर राजनीति करने वालों को बेहद सुलझे हुए लहजे में जवाब दिया था। उन्होंने कहा था कि ‘किसी भी कलाकार का धर्म उसकी कला है। यदि कला और धर्म को आपस में जोड़ा जा रहा है, तो यह राजनीति है। शास्त्रीय संगीत में 12 सुर होते हैं और इन्ही 12 सुरों में पूरे विश्व का संगीत है। संगीत से जुड़ा हर कलाकार एक परिवार है। परिवार में भी कुछ राजनीति करते हैं, उन्हें करने दें। कलाकार सिर्फ कला धर्म का पालन करें’।

वैसे तो उस्ताद कलाकारों के प्रति सरकारी उदासीनता को ज्यादा तवज्जो नहीं देते, लेकिन मध्य प्रदेश की बेरुखी उन्हें ज़रूर सालती है। कई मौकों पर उन्होंने मीडिया के समक्ष अपनी इस पीड़ा को बयां भी किया है। दरअसल, मध्य प्रदेश का होने के बावजूद राज्य सरकार द्वारा उन्हें संगीत कार्यक्रमों में आमंत्रित नहीं किया जाता। 2014 में शिवराज सरकार ने उनके पिता पदम भूषण हाफिज अली खान की 42वीं बरसी पर श्रद्धांजलि तक अर्पित नहीं की थी। जिससे नाराज़ होकर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा था। साथ ही उन्होंने अपने पिता से जुड़ी एक घटना का जिक्र करते हुए कहा था कि जब 1960 में हाफिज अली खान को पदम भूषण पुरस्कार मिला तो उसे लेने पूरा परिवार टैक्सी से राष्ट्रपति भवन गया। जब जवाहर लाल नेहरू और राजेंद्र प्रसाद ने उनके पिता से कुछ मागने को कहा तो उन्होंने उनसे संगीत में राग दरबारी की शुद्धता के लिए कुछ कदम उठाने की माग की, अपने लिए कुछ नहीं मांगा। संगीत के लिए समर्पित ऐसे परिवार के साथ मध्य प्रदेश सरकार का भेदभाव करना दुर्भाग्यपूर्ण है’। 

कम ही लोग जानते हैं कि 1976 में घर का किराया बहुत ज्यादा होने के चलते उस्ताद ने सरकारी मकान लेने की पहली और आखिरी कोशिश की थी। दरअसल, उस दौर में कई कलाकारों को सरकार की तरफ से आवास सुविधा उपलब्ध कराई गई थी, लिहाजा अमजद अली खान ने सोचा कि यदि उन्हें भी मकान मिल जाए तो कुछ मुश्किलें कम हो जाएं। इसी आस में वह कांग्रेस सरकार के मंत्री पीसी सेठी से मिलने पहुंचे, लेकिन निराशा हाथ लगी। उनसे कहा गया कि सरकार की ऐसी कोई नीति नहीं है। मंत्री के इस जवाब से अमजद अली खान को बहुत गुस्सा आया। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर सरकार से यह सवाल करने का मन भी बनाया कि यदि ऐसी नीति नहीं है तो दर्जनों कलाकारों को घर कैसे मिले हुए हैं? हालांकि उस्ताद ने यह सोचकर ऐसा नहीं कि उन कलाकारों के घर भी छिन जाएंगे। इसके बाद उन्होंने कभी सरकारी बंगला पाने की कोशिश नहीं की। 

संगीत की दुनिया के सरताज उस्ताद अमजद अली खान को समाचार4मीडिया की ओर से जन्मदिन की शुभकामनाएं।



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