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हिन्दुस्तान में 4 वरिष्ठ संपादकों को प्रमोट कर बनाया गया एग्जिक्यूटिव एडिटर

Friday, 29 June, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

दैनिक हिन्दुस्तान में इंक्रिमेंट और प्रमोशन की चिट्ठिया आ गई हैं। मिली जानकारी के मुताबिक, इस बार इंक्रिमेंट औसत हुआ है, पर पैसा कुछ इस तरह से बढ़ा है कि कई पत्रकारों की सैलरी पर कोई फर्क नहीं दिखाई दे रहा है। पहले जो सैलरी ब्रेकअप में रिअंबर्समेंट के तौर पर होता था, वो अब सैलरी का ही हिस्सा हो गया है।

वैसे बड़ी खबर ये है कि इस बार दिल्ली यूनिट के अंतर्गत कार्यरत चार वरिष्ठ पत्रकारों को प्रमोट कर एग्जिक्यूटिव एडिटर बनाया गया है। इनमें दिल्ली-एनसीआर के संपादक प्रताप सोमवंशी, बिहार की कमान संभाल रहे तीरविजय सिंह, लखनऊ के संपादक के.के.उपाध्याय और फीचर विभाग की इंचार्ज जयंती रंगनाथन शामिल हैं।

गौरतलब है कि प्रताप सोमवंशी एक अच्छे कवि है और मूल तौर पर वे यूपी के प्रतापगढ़ जिले के गांव हरखपुर से हैं। उन्होंने 1990 में इलाहाबाद में साहित्यिक पत्रकारिता से अपने करियर की शुरुआत की थी। उसके बाद वहीं अमर उजाला जॉइन किया और कानपुर में बतौर संपादकीय प्रभारी अमर उजाला का नेतृत्व किया है। वे फिलहाल कई सालों से हिन्दुस्तान के दिल्ली संस्करण के संपादक के तौर पर अपनी सेवा दे रहे हैं।

प्रताप सोमवंशी किसानों के सवाल और समस्याओँ पर पिछले दो दशक से लिखते रहे हैं। सिलिका खदान में काम करने वाली औरतें और बुंदेलखंड में किसान आत्महत्या के मुद्दे पर भी वे लिखते रहे हैं। उन्होंने कई गजलें, नज्में और कहानियां भी लिखी हैं। मलाला युसुफजई के पिता पर लिखी नज्म- ये कैसा पिता है जियाउद्दीन युसुफजई...’, पाकिस्तान के कई अखबारों में विभिन्न भाषाओं में प्रकाशित हुई। मलाला को नोबल पुरस्कार मिलने वाले दिन वॉयस ऑफ अमेरिका ने भी इसे प्रसारित किया। बच्चों पर उनकी तीन किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी एक गजल संग्रह इतवार छोटा पड़ गया भी है।  

वहीं तीरविजय सिंह बिहार में हिन्दुस्तान की कमान संभाल रहे हैं। वे बिहार की मीडिया में एक ऐसी शख्सियत हैं जिन्हें प्रिंट पत्रकारिता की हर विधा में माहिर माना जाता है। सोशियोलॉजी में पीएचडी कर चुके तीरविजय सिंह ने बनारस से पत्रकारिता में डिग्री हासिल की है। करीब 20 वर्ष से पत्रकारिता में सक्रिय तीरविजय सिंह इससे पहले अमर उजाला के साथ जुड़े हुए थे। मूल रूप से बिहार के सासाराम जिले के रहने वाले तीरविजय सिंह लम्‍बे समय तक अमर उजाला के बनारस यूनिट के संपादक रहे और अखबार को वहां पर पहचान देने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई। वे बरेली में भी रीजनल एडिटर के तौर पर काम कर चुके हैं। तीरविजय सिंह पत्रकार के अलावा शिक्षक भी रह चुके हैं। वे पांच साल तक पूर्वांचल विश्‍वविद्यालय में पत्रकारिता के लेक्‍चरर थे। अमर उजाला जॉइन करने से पहले वे राजस्‍थान में दैनिक भास्‍कर के साथ भी वरिष्‍ठ पद पर काम कर चुके हैं। तीरविजय सिंह की गिनती सुझले हुए पत्रकारों में की जाती है।

के.के. उपाध्याय ने देश के कई बड़े अखबारों जैसे दैनिक भास्करअमर उजाला और हिन्दुस्तान के साथ शीर्ष पदों पर काम किया है। वे मूल तौर पर राजस्थान के है।

अपने शालीन स्वभाव के कारण चर्चित रहने वाले उपाध्याय ने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 1988 में ग्वालियर से दैनिक स्वदेश से की थी। इसके बाद वे दैनिक भास्करके ग्वालियर एडिशन से जनरल डेस्क इंचार्ज के तौर पर जुड़े। 1996-98 के दौरान के.के. ने मध्य प्रदेश के पहले केवल टीवी जीएनटी की शुरुआत की, लेकिन आर्थिक कारणों के चलते उसे बन्द करना पड़ा। फिर वे दैनिक भास्कर के श्री गंगानगर यूनिट की लॉन्चिंग टीम से जुड़ गए और संपादकीय इंचार्ज के पद पर काम किया। एक साल बाद ही उन्हें बीकानेर एडिशन का संपादक बनाया गया। यहां से उन्होंने फिर वर्ष 2000 में अमर उजाला के आगरा एडिशन में डीएनई के पद पर जॉइन किया, जिसके बाद वे दैनिक भास्कर के भोपाल एडिशन में रीजनल कोर्डिनेटर के पद पर पहुंचे। बाद में जयपुर में रहते हुए राजस्थान के स्टेट कोऑर्डिनेटर भी रहे।

वहीं वरिष्ठ महिला पत्रकार और साहित्यकार जयंती रंगनाथन ने जहां मुंबई में सोनी टेलिफिल्म्स के साथ एक लंबी पारी खेली है, तो प्रिंट में वे  पत्रिका ‘वनिता’ की कोऑर्डिनेटिंग एडिटर रह चुकी है। कई उपन्यास, कहानी संग्रह लिख चुकीं जयंती अमर उजाला समूह की फीचर एडिटर भी रह चुकी है। फिलहाल वे हिन्दुस्तान में बतौर सीनियर फीचर एडिटर अपनी सेवा दे रही हैं। वे बाल पत्रिका नंदन की भी ‘संपादक’ हैं।

रंगनाथन ने 1985 में टाइम्स ऑफ इंडियासे अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत करते हुए धर्मयुगमें नौ साल और मनोरमा ग्रुपमें छह साल और सोनी टीवीऔर अमर उजालाके साथ भी काम किया। 

अमर उजालामें रहते हुए उन्होंने इसके फीचर सेक्शन को बहुत मजबूत किया और इसकी पांच पत्रिकाएं लॉन्च की। यहां पर रंगनाथन ने तीन साल तक कार्य किया। उसके बाद, इन्होंने पेंगुइन ग्रुप के लिए उपन्यास लिखना शुरू किया। इनका उपन्यास औरतें रोती नहींबहुत चर्चित रहा। फिर 2008 में इन्होंने मिलियन वर्डस मीडिया प्राइवेट लिमिटेड नाम से अपनी कंपनी खोली जो कि बच्चों की पत्रिका लिटिल वर्ड्स और मिलियन वर्ड्स प्रकाशित करती थी और ये पत्रिकाएं बहुत ज्यादा मशहूर रहीं।

 

 

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